1 रुपये किलो हुआ प्याज, नाराज किसान ने खेत में लगा दी आग.. अब सड़क पर उतरेंगे अन्नदाता

मार्च और अप्रैल के दौरान बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि  से रबी सीजन की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुईं. करीब 1.59 लाख एकड़ कृषि भूमि पर खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है. सबसे ज्यादा असर नासिक, अहमदनगर और मराठवाड़ा के कुछ इलाकों में देखा गया है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 12 May, 2026 | 01:31 PM

Onion Mandi Bhav: महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. इसके साथ ही प्याज की कीमतें भी गिरकर कई मंडियों में 1 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं. कीमतों में भारी गिरावट से किसानों में गुस्सा और नाराजगी बढ़ गई है. कई जगहों पर किसानों ने विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है. कम कीमत मिलने से नाराज एक किसान ने प्याज की फसल में आग लगा दी. इसी बीच स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेतृत्व में किसान संगठनों ने 15 मई को मुंबई में विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है. यह मार्च गिरगांव चौपाटी से शुरू होकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास ‘वर्षा’ तक जाएगा. इस आंदोलन को उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) का भी समर्थन मिला है.

हालांकि, कीमतों में गिरावट के साथ-साथ किसान मौसम की मार भी झेर रहे है. मार्च और अप्रैल के दौरान बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि  से रबी सीजन की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुईं. करीब 1.59 लाख एकड़ कृषि भूमि पर खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है. सबसे ज्यादा असर नासिक, अहमदनगर और मराठवाड़ा के कुछ इलाकों में देखा गया है. यहां प्याज, गेहूं, आम, काजू, अंगूर और अनार जैसी फसलों को भारी नुकसान हुआ है. लेकिन ज्यादा नुकसान प्याज किसानों को हुआ है. करीब 44,000 हेक्टेयर में प्याज की फसल प्रभावित हुई है. रिकॉर्ड उत्पादन, कमजोर निर्यात, पर्याप्त स्टोरेज की कमी और मांग घटने के कारण बाजार में प्याज के दाम भी तेजी से गिर गए हैं.

किसानों को मंडी में नहीं मिल रहा रेट

महाराष्ट्र भारत के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्यों में से एक है, जहां नासिक, अहमदनगर, धाराशिव, बीड, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर जैसे जिलों में लाखों किसान इस फसल पर निर्भर हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बीज, खाद, मजदूरी, सिंचाई और ट्रांसपोर्ट जैसे खर्चों में लगातार बढ़ोतरी के कारण खेती की लागत काफी बढ़ गई है. लेकिन दूसरी तरफ मंडियों में प्याज के दाम उत्पादन लागत  से भी नीचे गिर गए हैं. कई जगह किसानों को सिर्फ 2 से 5 रुपये प्रति किलो तक ही दाम मिल रहे हैं, जबकि कुछ मामलों में मजबूरी में 1 रुपये या उससे भी कम कीमत पर बिक्री करनी पड़ रही है.

किसान ने फसल में लगाई आग

नेशनल हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, धाराशिव जिले के टिंतराज गांव में एक दुखद मामला सामने आया. यहां के प्याज किसान भगवान साबले ने मंडी में सही कीमत न मिलने के कारण अपनी फसल में आग लगा दी. बताया जा रहा है कि उन्हें लागत के हिसाब से उचित दाम नहीं मिल रहे थे, जिससे वे भारी नुकसान और निराशा में इस कदम तक पहुंच गए. भगवान साबले ने करीब 4 एकड़ जमीन में प्याज की खेती की थी. इसमें से ढाई एकड़ की फसल पहले ही काटकर 600 बोरियों में भर दी गई थी. उनका कहना है कि इस फसल में लगभग 3 से 4 लाख रुपये का खर्च आया था, लेकिन मंडी में दाम गिरकर करीब 1 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए, जिससे फसल बेचना फायदेमंद नहीं रहा.

प्याज पर MSP लागू करने की उठी मांग

इसी तरह छत्रपति संभाजीनगर जिले के पैठन तालुका के वरुडी गांव के किसान प्रकाश गालधर को भी बेहद कम दाम मिले. उन्होंने 25 बोरियों में भरे 1,262 किलो प्याज के लिए सिर्फ 100 रुपये प्रति क्विंटल का भाव पाया, जो लगभग 1 रुपये प्रति किलो के बराबर है. किसान संगठनों का कहना है कि इस सीजन में प्याज किसानों की आमदनी बढ़ने की उम्मीदें टूट गई हैं और वे फिर से कर्ज के बोझ में फंसते नजर आ रहे हैं. वे मांग कर रहे हैं कि प्याज के लिए MSP  जैसी व्यवस्था लागू की जाए, सरकारी खरीद केंद्र बनाए जाएं और निर्यात नियमों में ढील दी जाए, ताकि किसानों को उनकी फसल का सही और लाभकारी दाम मिल सके.

22,000 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा

किसानों ने महाराष्ट्र सरकार की तरफ से फसल नुकसान के लिए घोषित 22,000 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे को भी बहुत कम बताया है और कहा है कि यह असली नुकसान की तुलना में नाकाफी है. इसके अलावा किसान संगठनों का दावा है कि कोंकण क्षेत्र में आम और काजू की फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है, जिससे किसानों को करोड़ों रुपये का घाटा हुआ है.

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Published: 12 May, 2026 | 01:28 PM
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