अब खेत नहीं, गमले में उगाएं लाल मोतियों जैसा अनार, जानें घर पर फल पाने का आसान तरीका
अनार एक ऐसा फलदार पौधा है जो भारतीय जलवायु में आसानी से ढल जाता है. यह गर्म मौसम पसंद करता है और ज्यादा देखभाल की मांग नहीं करता. झाड़ीदार प्रकृति होने के कारण यह कम जगह में भी अच्छे से बढ़ता है. सही धूप, थोड़ी समझदारी और नियमित देखभाल के साथ आप अपने घर पर ही ताजा अनार उगा सकते हैं.
farming at home: आजकल लोग शुद्ध और ताजा फल खाने के लिए बाजार पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते. इसी सोच के चलते घर पर फल-सब्जियां उगाने का चलन तेजी से बढ़ा है. अगर आप भी अपने घर की बालकनी, छत या आंगन में कोई फलदार पौधा लगाना चाहते हैं, तो अनार एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. लाल मोती जैसे चमकदार दानों वाला अनार न सिर्फ देखने में खूबसूरत होता है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. अच्छी बात यह है कि अनार को गमले में उगाना उतना मुश्किल नहीं है, जितना लोग समझते हैं.
अनार का पौधा क्यों है खास
अनार एक ऐसा फलदार पौधा है जो भारतीय जलवायु में आसानी से ढल जाता है. यह गर्म मौसम पसंद करता है और ज्यादा देखभाल की मांग नहीं करता. झाड़ीदार प्रकृति होने के कारण यह कम जगह में भी अच्छे से बढ़ता है. सही धूप, थोड़ी समझदारी और नियमित देखभाल के साथ आप अपने घर पर ही ताजा अनार उगा सकते हैं. इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और विटामिन पाए जाते हैं, जो इम्यूनिटी बढ़ाने और शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं.
सही जगह और धूप
अनार के पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए धूप सबसे जरूरी है. इसे ऐसी जगह रखें जहां दिन में कम से कम 6 से 7 घंटे सीधी धूप आती हो. बालकनी, छत या आंगन जहां भरपूर सूरज की रोशनी मिले, वहां अनार का गमला रखना सबसे बेहतर रहता है. कम धूप में पौधा तो बढ़ जाएगा, लेकिन फल आने में दिक्कत हो सकती है.
गमला और मिट्टी का सही चुनाव
अनार की जड़ें गहरी होती हैं, इसलिए इसे छोटे गमले में लगाना सही नहीं होता. बेहतर है कि आप बड़ा गमला, ड्रम या प्लास्टिक की मजबूत बाल्टी का इस्तेमाल करें. गमले के नीचे पानी निकासी के लिए छेद होना जरूरी है, ताकि जड़ें सड़ने से बची रहें. मिट्टी की बात करें तो अनार के लिए हल्की और उपजाऊ मिट्टी सबसे अच्छी रहती है. साधारण बगीचे की मिट्टी में कोकोपीट, गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिलाकर पॉटिंग मिक्स तैयार किया जा सकता है. थोड़ी सी चूना मिट्टी में मिलाने से पौधे को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और ग्रोथ बेहतर होती है.
पौधा लगाने का सही तरीका
बीज से अनार उगाना संभव है, लेकिन इसमें ज्यादा समय और मेहनत लगती है. अगर आप जल्दी और बेहतर नतीजा चाहते हैं, तो नर्सरी से स्वस्थ सैपलिंग यानी छोटा पौधा लाना ज्यादा अच्छा रहता है. गमले के निचले हिस्से में सूखे पत्ते या कंकड़ डालें, फिर मिट्टी का मिश्रण भरें और पौधे को सावधानी से रोपें. पौधा लगाने के बाद हल्का पानी दें और गमले को धूप वाली जगह पर रख दें.
पानी और खाद का संतुलन
अनार के पौधे को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. दिन में एक बार हल्का पानी देना काफी है. मिट्टी में नमी बनी रहे, लेकिन पानी जमा न हो. महीने में एक या दो बार जैविक खाद जैसे गोबर की खाद या घर की बनी कंपोस्ट डालने से पौधा स्वस्थ रहता है और फल देने की क्षमता बढ़ती है.
कीटों से बचाव और देखभाल
घर में उगाए गए पौधों पर भी कीट लग सकते हैं. इससे बचाव के लिए नीम का तेल एक सुरक्षित और असरदार उपाय है. नीम तेल को पानी में मिलाकर हल्का स्प्रे करने से कीट दूर रहते हैं और पौधे को कोई नुकसान भी नहीं होता.
छंटाई और फल आने का समय
गमले में पौधा ज्यादा फैल न जाए, इसके लिए समय-समय पर छंटाई करना जरूरी होता है. जब पौधा 2–3 फुट ऊंचा हो जाए, तो हल्की प्रूनिंग करें. इससे नई शाखाएं निकलती हैं और फूल व फल ज्यादा आते हैं. सही देखभाल मिलने पर अनार का पौधा 5 से 6 महीने में फूल और फल देना शुरू कर सकता है.
गमले में उगाया गया अनार न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन होता है, बल्कि इसे खुद उगाने का संतोष भी अलग ही होता है. थोड़ी सी मेहनत और नियमित देखभाल से आप अपने घर पर ही लाल मोती जैसे अनार के दाने पा सकते हैं और अपने परिवार को ताजा, रसायन-मुक्त फल खिला सकते हैं.