किसानों की कर्जमाफी में लगाई गईं कठिन शर्तों का मामला हर दिन तूल पकड़ता जा रहा है. महाराष्ट्र में एनसीपी एसपी विधायक रोहित पवार के आह्नान पर संभाजीनगर में उनके नेतृत्व में आंदोलन के लिए हजारों की संख्या में किसान जुटे हैं. रोहित पवार ने कहा कि दूसरे जिलों से आंदोलन में शामिल होने आ रहे किसानों को पुलिस रोक रही है. उन्होंने सरकार और स्थानीय प्रशासन को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर हमने नाकेबंदी शुरू की तो सरकार झेल नहीं पाएगी.
रोहित पवार के नेतृत्व में किसानों का जेल भरो आंदोलन शुरू
महाराष्ट्र सरकार ने किसानों की कर्जमाफी योजना को मंजूरी दी है, लेकिन योजना की शर्तों और नियमों ने इसे सियासी रंग दे दिया है. किसानों के साथ कथित अन्याय के खिलाफ विधायक रोहित पवार ने आज से जेल भरो आंदोलन की शुरुआत संभाजीनगर से की है. बता दें कि रोहित पवार करीब 10 दिन पहले भूख हड़ताल कर चुके हैं, तब राज्य सरकार के मंत्री के आश्वासन पर उन्होंने हड़ताल खत्म की थी. लेकिन, वादाखिलाफी के चलते फिर से वह जेलभरो आंदोलन कर रहे हैं.
किसानों को प्रदर्शन स्थल पहुंचने से रोकने पर भड़के विधायक
विधायक रोहित पवार ने कहा कि संभाजी नगर में Elgar Annadatyachya आंदोलन के लिए आ रहे किसानों को पुलिस रास्ते में ही रोक रही है और उन्हें विरोध स्थल तक पहुंचने से रोका जा रहा है. सरकार को कम से कम अन्नदाताओं के साथ रुकावट डालने वाला यह खेल नहीं खेलना चाहिए. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हमने खुद नाकेबंदी शुरू कर दी, तो सरकार इसे झेल नहीं पाएगी.
किसानों को जेल ले जाने के लिए 30 से ज्यादा बसें पहुंचीं
उन्होंने कहा कि छत्रपति संभाजी नगर में सरकार ने न्याय के लिए लड़ रहे अन्नदाता के ‘स्वागत’ के लिए बसों को तैयार कर रखा है. जिनमें किसानों को बैठाकर जेल ले जाया जाएगा. उन्होंने कहा कि प्रशासन ने आंदोलन स्थल पर 30 से ज्यादा बसें बुलाई हैं और सैकड़ों पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया है. लेकिन अन्नदाता के न्याय का संघर्ष नहीं रुकेगा, किसान घबराने वाले नहीं हैं और हम किसानों के हक की लड़ाई लड़कर और न्याय हासिल करके रहेंगे.
न्यायासाठी संघर्ष करणाऱ्या अन्नदात्याच्या ‘स्वागता’साठी छत्रपती संभाजीनगरमध्ये सरकारने जय्यत तयारी केलाय. त्यासाठी ३० पिंजरे (बस) आणून उभे केले असून शेकडो पोलिसही तैनात केलेत. पण तरीही अन्नदात्याच्या न्यायाचा संघर्ष थांबणार नाही.
भेटू थोड्याच वेळात..!
केंब्रिज चौक,… pic.twitter.com/r520x77815— Rohit Pawar (@RRPSpeaks) June 29, 2026
70 फीसदी किसानों के साथ अन्याय करने का दावा
महाराष्ट्र सरकार ने बीते 2 जून को राज्य के 56 लाख से अधिक किसानों के कर्ज को माफ करने की मंजूरी दी. इसके तहत किसानों पर बकाया कर्ज 36,585 करोड़ रुपये को लोन माफी स्कीम के तहत स्वीकृति दी गई. लेकिन, कर्जमाफी योजना में लगाई गई शर्तों को लेकर लगातार बखेड़ा खड़ा हो रहा है. महाराष्ट्र में NCP (SP) के विधायक रोहित पवार ने दावा किया कि महाराष्ट्र सरकार की कृषि ऋण माफी योजना कई शर्तों वाली है और इससे राज्य के लगभग 70 प्रतिशत किसानों के साथ अन्याय होगा.
कर्जमाफी योजना की शर्तें जो विरोध की वजह बनीं
महाराष्ट्र सरकार 36,585 करोड़ रुपये की कृषि लोन माफी स्कीम को मंजूरी दी है और इसके तहत 56 लाख किसानों को लाभ मिलना है. पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्जमुक्ति योजना के तहत किसानों का 2 लाख रुपये तक के कृषि लोन माफी का प्रावधान है. इसके तीन हिस्से हैं लोन माफी, वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) और इंसेंटिव बेनिफिट.
- माफी वाले हिस्से के तहत जिन किसानों का कुल बकाया शॉर्ट टर्म फसल लोन, मूलधन और ब्याज मिलाकर 2 लाख रुपये तक है, वे पूरी कर्ज माफी के लिए पात्र होंगे. लोन 1 अप्रैल 2019 और 31 मार्च 2025 के बीच दिए गए होने चाहिए. 30 सितंबर 2025 तक ओवरड्यू रहने चाहिए और 31 मार्च 2026 तक बिना पेमेंट के रहने चाहिए.
- जिन किसानों का बकाया 2 लाख रुपये से ज्यादा है, वे OTS हिस्से के तहत कवर होंगे. ऐसे कर्जदारों को 2 लाख रुपये से ज्यादा की रकम चुकानी होगी. इसके बाद वे 2 लाख रुपये की छूट के हकदार हो जाएंगे. उन्हें बकाया रकम में से अपना हिस्सा जमा करने के लिए 31 मार्च 2027 तक का समय दिया गया है.
- इंसेटिव बेनेफिट के तहत जिन किसानों ने अपने लोन का कुछ हिस्सा जमा किया है, उन्हें 50 हजार रुपये तक कम लोन जमा करना होगा.