BRICS Grain Exchange: जयपुर से उठी एक ऐसी पहल, जो दुनिया के अनाज कारोबार का खेल बदल सकती है. रूस ने BRICS देशों के सामने एक डिजिटल ग्रेन एक्सचेंज का खाका रखा है, जहां किसान, निर्यातक और खरीदार बिना बिचौलियों के सीधे सौदा करेंगे. अनुमान है कि इस प्लेटफॉर्म पर हर साल 1 ट्रिलियन डॉलर (करीब 87 लाख करोड़ रुपये) से अधिक का कृषि कारोबार हो सकता है.
बिचौलियों की छुट्टी, किसान को मिलेगा बेहतर दाम
राजस्थान के जयपुर में हुई BRICS आर्थिक और विदेश व्यापार मंत्रियों की 16वीं बैठक में रूस ने BRICS Grain Exchange की अवधारणा पेश की. यह एक साझा डिजिटल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म होगा, जहां सदस्य देशों के कृषि उत्पादक और खरीदार सीधे लेन-देन कर सकेंगे. रूस के उप आर्थिक विकास मंत्री व्लादिमीर इलिचेव के अनुसार, आज सप्लाई चेन में हर अतिरिक्त बिचौलिया अपना मुनाफा जोड़ देता है. इसका नुकसान किसान और खरीदार दोनों को उठाना पड़ता है. नए एक्सचेंज का उद्देश्य कृषि उत्पादों का निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्य तय करना है.
कैसे काम करेगा यह डिजिटल अनाज बाजार?
प्रस्तावित प्लेटफॉर्म BRICS देशों के भीतर गेहूं, मक्का, चावल, दालें और अन्य कृषि जिंसों की वास्तविक मांग और आपूर्ति का डेटा दिखाएगा. इससे सदस्य देश अपनी खाद्य आपूर्ति और निर्यात पर अधिक नियंत्रण रख सकेंगे. इस मॉडल में ट्रेडिंग, मूल्य निर्धारण, डिजिटल सेटलमेंट और लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराने की योजना है. यानी खरीदार और विक्रेता सीधे जुड़ेंगे, जिससे समय और लागत दोनों कम होंगे.
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2023 से 2026 तक ऐसे बनी दुनिया बदलने वाली योजना
इस पहल की शुरुआत 2023 के अंत में रूस के ग्रेन एक्सपोर्टर्स एंड प्रोड्यूसर्स यूनियन ने की थी. 2024 में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसका समर्थन किया और कहा कि भविष्य में यह एक पूर्ण विकसित कमोडिटी एक्सचेंज बन सकता है. कजान BRICS शिखर सम्मेलन 2024 की घोषणा में भी इस एक्सचेंज को शामिल किया गया. अप्रैल 2025 में BRICS कृषि मंत्रियों ने इसे औपचारिक समर्थन दिया, जबकि जून 2026 तक इसके तकनीकी मॉडल और संचालन ढांचे पर साझेदार देशों के साथ काम शुरू हो चुका है.
भारत समेत BRICS देशों को क्या होगा सबसे बड़ा फायदा?
BRICS में दुनिया की बड़ी आबादी और विशाल कृषि उत्पादन क्षमता मौजूद है. यदि यह एक्सचेंज शुरू होता है तो अंतरराष्ट्रीय अनाज व्यापार में पश्चिमी कमोडिटी एक्सचेंजों पर निर्भरता कम हो सकती है. भारत, रूस, ब्राजील, चीन और अन्य सदस्य देश अपने उत्पादों का मूल्य अधिक संतुलित तरीके से तय कर सकेंगे. रूसी ग्रेन यूनियन का अनुमान है कि इस डिजिटल मंच पर कृषि और उससे जुड़े उत्पादों का वार्षिक कारोबार 1 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक पहुंच सकता है. यही वजह है कि इसे वैश्विक खाद्य व्यापार की दिशा बदलने वाली सबसे बड़ी BRICS पहल माना जा रहा है.