पंजाब-हरियाणा में होगी पर्यावरण फ्रेंडली खेती, किसानों को मिलेगा कार्बन क्रेडिट.. बंपर कमाई का मौका

पंजाब और हरियाणा के छोटे किसानों के लिए ग्रो इंडिगो का कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा दे रहा है. डायरेक्ट सीडिंग और नो टिलेज अपनाने पर किसानों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त कार्बन क्रेडिट मिलेंगे, जिससे आय बढ़ेगी और मिट्टी व जल संरक्षण को मजबूती मिलेगी.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 19 Jan, 2026 | 11:56 AM

Carbon Credits: पंजाब और हरियाणा के छोटे किसानों को पर्यावरण के अनुकूल खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक नया कार्यक्रम शुरू किया गया है. इसके तहत इन किसानों को कार्बन क्रेडिट दिया जाएगा. पहली बार इस कार्यक्रम के तहत लगभग 30,000 एकड़ क्षेत्र की खेती को शामिल किया जाएगा और 50,000 से ज्यादा कार्बन क्रेडिट जारी होंगे. यह क्रेडिट उन किसानों को मिलेगा जिन्होंने डायरेक्ट सीडिंग और लो टिलेज जैसी टिकाऊ खेती की तकनीक अपनाई है. भविष्य में इसे अन्य फसलों और क्षेत्रों तक भी बढ़ाने की योजना है.

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्यक्रम 2022 में निजी कंपनी ग्रो इंडिगो (GIPL) ने शुरू किया था, जो भारतीय बीज कंपनी महिको और अमेरिकी कंपनी इंडिगो का संयुक्त उद्यम है. कार्बन क्रेडिट जारी होने के बाद कंपनी इसे एकत्रित कर खरीदारों को बेचेगी और इससे होने वाली कमाई का 75 फीसदी हिस्सा सीधे किसानों को मिलेगा. इस कार्यक्रम का ऑडिट कार्बन स्टैंडर्ड (Verra) प्रोटोकॉल के तहत पूरा किया गया है, जो एक वैश्विक स्वैच्छिक ग्रीनहाउस गैस (GHG) कमी कार्यक्रम है.

मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद करेंगे

ग्रो इंडिगो की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर उषा बारवाले जेहर ने कहा कि लंबी ऑडिट और समीक्षा प्रक्रिया के बाद, इस मंजूरी से हमारा मकसद पूरा होता है कि हम छोटे किसानों की आजीविका पर सकारात्मक और सतत प्रभाव डाल सकें और ऐसे उपाय ला सकें जो उन्हें जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में मदद करें. उषा ने कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त कार्बन क्रेडिट किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद करेंगे. उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि 2027 तक सालाना एक मिलियन कार्बन क्रेडिट उत्पन्न किए जाएं.

एक कार्बन क्रेडिट की कीमत 10 से 40 डॉलर के बीच

कार्यक्रम में पंजीकृत किसान हर एकड़ पर सालाना एक कार्बन क्रेडिट कमा सकते हैं. वर्तमान में एक कार्बन क्रेडिट की कीमत 10 से 40 डॉलर के बीच है और यह एक टन CO2 उत्सर्जन में कमी के बराबर है. ग्रो इंडिगो के COO कार्बन उमंग अग्रवाल के मुताबिक, कंपनी इस समय पंजाब और हरियाणा में 1 लाख से अधिक किसानों के साथ 10 लाख एकड़ भूमि पर सतत खेती के तरीकों पर काम कर रही है. भविष्य में किसानों को पानी की अधिक खपत वाले धान की जगह मक्का उगाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा.

मार्केट के लिए एक फ्रेमवर्क भी जारी किया

वैज्ञानिकों के अनुसार, वेर्रा की पद्धति के तहत कार्बन क्रेडिट जारी करना छोटे किसानों के लिए भूमि प्रबंधन के सबसे सख्त और भरोसेमंद मानकों में से एक माना जाता है. जो किसान सिधा बोया गया धान (Direct Seeded Rice) और नो टिलेज (No Tillage) जैसी खेती की तकनीक  अपनाते हैं, जिससे पानी की बचत होती है और मिट्टी की जैविक उर्वरता बनी रहती है, वे धान और गेहूं बोने से पहले इस कार्यक्रम में पंजीकरण कराते हैं और कार्बन क्रेडिट हासिल करते हैं. ये कार्बन क्रेडिट उन उद्योगों द्वारा खरीदे जा सकते हैं, जैसे एवीएशन, खनन या उर्वरक निर्माता, जो अपने व्यवसाय की प्रकृति के कारण कार्बन उत्सर्जन कम नहीं कर सकते. कृषि मंत्रालय ने स्वैच्छिक कार्बन मार्केट के लिए एक फ्रेमवर्क भी जारी किया है, जिसका उद्देश्य सभी हितधारकों को एक साथ लाना, वर्तमान कृषि प्रथाओं में बदलाव लाना और उत्सर्जन कम करने में मदद करना है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 19 Jan, 2026 | 11:52 AM

कीवी उत्पादन के मामले में देश का सबसे प्रमुख राज्य कौन सा है