El Nino 2026: दुनियाभर में अल नीनो को लेकर चर्चा तेज है और भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकता. मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है. भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मानसून की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, इसलिए सरकार ने संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है. कृषि मंत्रालय ने का कहना है कि, किसानों को किसी भी तरह की परेशानी से बचाने के लिए पहले से रणनीति तैयार की जा रही है, ताकि अगर बारिश कम भी हो तो खेती पर उसका असर कम से कम पड़े.
अल नीनो को लेकर हुई बड़ी समीक्षा बैठक
नई दिल्ली के कृषि भवन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में एक अहम समीक्षा बैठक हुई. इसमें कई राज्यों के कृषि मंत्री, कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि सचिव, जिला कलेक्टर और कृषि विशेषज्ञ शामिल हुए.
बैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि अगर अल नीनो के कारण बारिश कम होती है, तो किसानों को नुकसान से कैसे बचाया जाए और खेती पर इसका असर कम करने के लिए क्या कदम उठाए जाएं. अधिकारियों ने विभिन्न राज्यों की स्थिति और संभावित चुनौतियों की समीक्षा करते हुए जरूरी तैयारियों पर भी विचार-विमर्श किया.
कम बारिश की स्थिति के लिए बनाई गई रणनीति
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि अगर किसी क्षेत्र में सामान्य से कम बारिश होती है तो किसानों को कौन-सी वैकल्पिक फसलें उगाने की सलाह दी जाए. इसके अलावा पानी की उपलब्धता, सिंचाई व्यवस्था और कृषि प्रबंधन के अलग-अग उपायों पर भी चर्चा की गई. समय रहते सही सलाह और योजना किसानों के नुकसान को काफी हद तक कम कर सकती है. इसी सोच के साथ सरकार ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है.
हर जिले के लिए तैयार है कंटीजेंसी प्लान
कृषि मंत्री ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत कार्यरत CRIDA संस्थान ने देश के सभी जिलों के लिए विशेष आकस्मिक योजनाएं यानी कंटीजेंसी प्लान तैयार किए हैं. इन योजनाओं में यह तय किया गया है कि अगर किसी जिले में बारिश कम होती है, देर से होती है या सूखे जैसी स्थिति बनती है तो वहां कौन-कौन से कदम उठाए जाएंगे. सरकार का कहना है कि, ये योजनाएं सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर इन्हें तुरंत लागू किया जाएगा.
किसानों तक समय पर पहुंचेगी मौसम और खेती की जानकारी
सरकार ने कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और कृषि मौसम विज्ञान इकाइयों को भी खास जिम्मेदारी सौंपी है. इन संस्थानों के वैज्ञानिक किसानों तक मौसम और खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी समय पर पहुंचाएंगे. एग्रोमेट एडवाइजरी बुलेटिन के माध्यम से किसानों को यह बताया जाएगा कि बदलते मौसम में कौन-सी फसलें लगानी चाहिए, सिंचाई कब करनी चाहिए और फसल को नुकसान से बचाने के लिए कौन-कौन से उपाय अपनाने चाहिए.
राज्य सरकारों को भी दिए गए निर्देश
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से कहा है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की परिस्थितियों के अनुसार योजनाओं को अपडेट रखें. जिला प्रशासन और कृषि विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जाए और किसानों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए.
आपदा को अवसर में बदलने की तैयारी
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, हमें संकट आने का इंतजार नहीं करना है, बल्कि पहले से तैयारी करनी है. उनका कहना है कि हमारा दृष्टिकोण प्रोएक्टिव होना चाहिए, न कि केवल प्रतिक्रिया देने वाला. उन्होंने आगे कहा कि, हमें वैज्ञानिक प्रोटोकॉल और विशेषज्ञों के सुझावों के अनुसार ही कार्य करना है. सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि, मौसम की अनिश्चितताओं के बावजूद किसानों की फसल और आय दोनों सुरक्षित रहें. समय रहते सही कदम उठाकर हम अल नीनो की संभावित चुनौतियों के प्रभाव को कम कर सकते हैं.