बारिश-ओलावृष्टि से फसल बर्बादी पर कृषि मंत्री ने साझा किए आंकड़े, मुआवजे को लेकर दी बड़ी जानकारी

Crop damage 2026: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि अब तक करीब 2.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुई हैं. यह नुकसान ऐसे समय हुआ है जब किसान कटाई की तैयारी कर रहे थे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ सकता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 11 Apr, 2026 | 09:02 AM

Crop damage 2026: देश के किसानों के लिए इस समय चिंता की बड़ी खबर सामने आई है. हाल के दिनों में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने कई राज्यों में रबी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है. खेतों में खड़ी फसलें अचानक आई तेज बारिश और ओलों की मार से गिर गईं, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया.

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि अब तक करीब 2.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुई हैं. यह नुकसान ऐसे समय हुआ है जब किसान कटाई की तैयारी कर रहे थे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ सकता है.

अचानक बदला मौसम, बढ़ी परेशानी

पिछले कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली. तेज हवाएं, बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया. कई जगहों पर गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई, जिससे उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है. यह बदलाव मुख्य रूप से पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुआ, जिसके चलते उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में असामान्य मौसम देखने को मिला.

तीन विभाग कर रहे हैं सर्वे

सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए नुकसान का सही आकलन शुरू कर दिया है. कृषि मंत्री के अनुसार, तीन अलग-अलग विभाग मिलकर सर्वे कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस इलाके में कितना नुकसान हुआ है. राज्य सरकारों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने स्तर पर जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार करें. इन रिपोर्ट्स के आधार पर किसानों को राहत देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

गेहूं और बागवानी फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित

अब तक के आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं की फसल को हुआ है. यह रबी सीजन की सबसे महत्वपूर्ण फसल होती है, इसलिए इसका नुकसान बड़ा असर डाल सकता है. इसके अलावा आम और लीची जैसी बागवानी फसलें भी प्रभावित हुई हैं. कई जगहों पर तेज हवाओं और ओलों के कारण पेड़ों से फल गिर गए, जिससे बागवानों को भी नुकसान उठाना पड़ा है.

मौसम विभाग की चेतावनी और आगे का खतरा

IMD ने पहले ही चेतावनी दी थी कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में इसका असर साफ देखने को मिला. मौसम विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में मौसम पूरी तरह स्थिर नहीं रहेगा, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ सकती है.

सरकार का भरोसा

कृषि मंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि सरकार इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लगातार राज्यों के संपर्क में है और हर स्थिति पर नजर रख रही है. सरकार का कहना है कि जैसे ही सर्वे रिपोर्ट पूरी होगी, प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे.

उर्वरकों पर भी सरकार का फोकस

आने वाले खरीफ सीजन को देखते हुए सरकार ने उर्वरकों की उपलब्धता पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया है. फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों पर करीब 41,534 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई है, ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके और उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो. इसके साथ ही सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि वैश्विक स्तर पर किसी भी तरह की कमी का असर भारतीय किसानों पर न पड़े.

डिजिटल खेती की ओर बढ़ते कदम

सरकार खेती को आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल तकनीक पर भी जोर दे रही है. हरियाणा और मध्यप्रदेश में ‘एग्रीस्टैक’ योजना के तहत किसानों की डिजिटल पहचान बनाई जा रही है. इससे किसानों को बीज, खाद और सब्सिडी सीधे मिल सकेगी और बीच के बिचौलियों की भूमिका कम होगी. इससे योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी.

खेती का बदलता फोकस

सरकार अब सिर्फ अनाज उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहती. अब फल, सब्जी, दूध, दलहन और तिलहन जैसे क्षेत्रों पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों की आय बढ़ सके और देश पोषण के मामले में मजबूत बन सके.

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