India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड डील को लेकर संसद से लेकर सड़क तक सियासत तेज हो गई है. केंद्र सरकार इसे भारत की आर्थिक ताकत का ऐतिहासिक पड़ाव बता रही है, तो विपक्ष इसे किसानों और राष्ट्रीय हितों के साथ बड़ा समझौता करार दे रहा है. संसद में वॉकआउट, सड़क पर विरोध और तीखे आरोपों के बीच सवाल सिर्फ एक है, क्या यह डील भारत के लिए सुनहरा मौका है या फिर आम जनता पर पड़ने वाली भारी कीमत?
सरकार का पक्ष: ‘भारत का कद बढ़ा’
अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत हर्ष वर्धन श्रृंगला ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इसका पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है. उनके मुताबिक, इस डील से MSMEs, किसान और निर्यातकों को सीधा फायदा मिलेगा और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति और मजबूत होगी.
#WATCH दिल्ली: अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत हर्ष वर्धन श्रृंगला ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कहा, “यह ऐतिहासिक समझौता है जिसका श्रेय हमारे प्रधानमंत्री को जाता है। यह समझौता हमारे MSMEs, किसानों, निर्यातकों को फायदा पहुंचेगा। इससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का कद बढ़ा… pic.twitter.com/3plahQDK81
और पढ़ें— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 3, 2026
वहीं भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि यह समझौता स्वागत योग्य है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने टैरिफ कम किया है, भारत-EU FTA भी हुआ है और अब 27 देशों का बाजार जीरो टैरिफ पर भारत के लिए खुल गया है. इससे भारत के निर्यात में तेजी आई है और आने वाले समय में और बढ़ोतरी होगी.
विपक्ष का हमला: ‘किसानों के साथ धोखा’
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी दबाव में आकर इस ट्रेड डील को फाइनल कर बैठे और भारतीय किसानों की मेहनत को ‘बेच’ दिया. राहुल ने यह बात संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान कही. राहुल ने सवाल उठाया कि आखिर चार महीने से अटके इस व्यापार समझौते को अचानक क्यों फाइनल किया गया और इसके पीछे प्रधानमंत्री पर भारी दबाव था.
#WATCH दिल्ली: लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी घबराए हुए हैं। जो ट्रेड डील 4 महीने से रुकी हुई थी। किसी न किसी कारण से नरेंद्र मोदी ने कल शाम उस डील को साइन कर दिया। नरेंद्र मोदी पर दबाव है, भयंकर दबाव है। नरेंद्र मोदी की इमेज का… pic.twitter.com/uOVsAiuksa
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 3, 2026
शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया कि यह ट्रेड डील राष्ट्रीय और किसानों के हितों के खिलाफ है. उन्होंने दावा किया कि यह समझौता किसी खास उद्योगपति को बचाने के लिए किया गया है और विपक्ष इसका सड़क से संसद तक विरोध करेगा.
वहीं राजद सांसद मनोज झा ने सवाल उठाया कि यह डील भारत की शर्तों पर हुई या अमेरिका के दबाव में. उन्होंने कहा कि पहले जिन चीजों पर 2-3% टैक्स था, उन्हें पहले बढ़ाया गया और अब घटाकर 18% किया जा रहा है. इससे भारत की संप्रभुता पर सवाल खड़े होते हैं.
AAP सांसद संजय सिंह ने सबसे तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में अमेरिका के लिए बाजार खोलकर मोदी सरकार ने करोड़ों किसानों की पीठ में छुरा घोंपा है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रूस से सस्ता तेल छोड़कर अमेरिका से महंगा तेल खरीदने की मजबूरी देश पर डाली जा रही है.
दूसरी तरफ कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि अमेरिका के कृषि उत्पाद जीरो ड्यूटी पर भारत में आएंगे, जिससे भारतीय किसान बर्बाद हो जाएंगे. उन्होंने कपास, मक्का, गेहूं, डेयरी और ड्राई फ्रूट्स का जिक्र करते हुए इसे किसानों के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात बताया.
#WATCH दिल्ली: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, “…अमेरिका के कृषि मंत्री ने कहा है इस ट्रेड डील में अमेरिका का सारे खेती उत्पाद जीरो ड्यूटी पर भारत में बेचे जाएंगे। देश के किसान के लिए इससे बड़ा विश्वासघात हो ही नहीं सकता। अब अमेरिका की… pic.twitter.com/934LTqo4ZI
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 3, 2026
सपा सांसद डिंपल यादव ने सवाल उठाया कि टैरिफ की घोषणा भारत सरकार की बजाय अमेरिका के राष्ट्रपति ने क्यों की. उन्होंने कहा कि यह भारत की कूटनीतिक कमजोरी को दिखाता है.
इंडस्ट्री का रुख: “एक्सपोर्ट को मिलेगा बूस्ट”
इधर इंडस्ट्री बॉडीज ने इस ट्रेड डील का स्वागत किया है. CII के अध्यक्ष राजीव मेमानी ने कहा कि टैरिफ में 18% की कमी से भारतीय निर्यात की ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ेगी और नए बाजारों तक पहुंच आसान होगी. उनके मुताबिक, यह डील ट्रेड, टेक्नोलॉजी और निवेश के रिश्तों को और मजबूत करेगी.
India-US ट्रेड डील को लेकर सरकार विकास का रास्ता बता रही है, इंडस्ट्री इसे मौका मान रही है, जबकि विपक्ष इसे किसानों और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बता रहा है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक गर्मी पैदा कर सकता है.