देश में जल संकट गहराया, दक्षिण भारत में हालत सबसे खराब, जानें किस राज्य में कितना पानी मौजूद

मौसम विभाग के अनुसार 1 मार्च से 29 अप्रैल के बीच देश के एक बड़े हिस्से में सामान्य से कम बारिश हुई है. लगभग एक तिहाई क्षेत्रों में या तो बहुत कम बारिश हुई या बिल्कुल नहीं हुई. हालांकि कुछ दक्षिणी हिस्सों में प्री-मानसून बारिश शुरू हो चुकी है, लेकिन इससे अभी तक जलाशयों के स्तर में ज्यादा सुधार नहीं आया है.

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नई दिल्ली | Published: 1 May, 2026 | 02:23 PM

water crisis 2026: देश में गर्मी बढ़ने के साथ पानी का संकट भी गहराता नजर आ रहा है. ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत के बड़े जलाशयों में पानी का स्तर लगातार घट रहा है. स्थिति यह है कि देश के आधे से ज्यादा प्रमुख बांधों में पानी की मात्रा उनकी कुल क्षमता के 40 प्रतिशत से भी नीचे पहुंच गई है. यह हालात आने वाले महीनों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ाने वाले हैं.

कुल जल भंडारण में आई बड़ी गिरावट

केंद्रीय जल आयोग (CWC) के आंकड़ों के मुताबिक देश के 166 प्रमुख जलाशयों में कुल जल भंडारण अब 38.72 प्रतिशत रह गया है. इन जलाशयों की कुल क्षमता 183.565 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) है, जिसमें से अभी केवल 71.082 BCM पानी ही मौजूद है. हालांकि यह स्तर पिछले साल की तुलना में कुछ बेहतर है, लेकिन सामान्य औसत से अभी भी कम माना जा रहा है. जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, पानी की खपत भी बढ़ रही है, जिससे जलाशयों का स्तर तेजी से नीचे जा रहा है.

दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा असर

देश के दक्षिणी हिस्से में पानी की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है. यहां के 47 जलाशयों में पानी का स्तर कुल क्षमता के केवल 28 प्रतिशत तक ही रह गया है. तेलंगाना में यह स्थिति सबसे खराब है, जहां जल स्तर सिर्फ 20.87 प्रतिशत तक पहुंच गया है.

कर्नाटक में भी पानी का स्तर 24 प्रतिशत के आसपास है. आंध्र प्रदेश में स्थिति थोड़ी बेहतर है, जहां 39 प्रतिशत जल भंडारण है, जबकि तमिलनाडु में 37 प्रतिशत और केरल में 28 प्रतिशत पानी मौजूद है.

पूर्वी भारत में भी गिरावट, बंगाल की स्थिति खराब

पूर्वी भारत के जलाशयों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है. इस क्षेत्र के 27 जलाशयों में कुल भंडारण 34 प्रतिशत ही रह गया है. पश्चिम बंगाल में पानी का स्तर केवल 12 प्रतिशत तक गिर गया है, जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है. वहीं असम में यह स्तर 18.5 प्रतिशत है.

ओडिशा के बांधों में 33 प्रतिशत पानी है, जबकि झारखंड के जलाशय आधे खाली हो चुके हैं. हालांकि मेघालय और त्रिपुरा में स्थिति थोड़ी बेहतर है, जहां जल स्तर क्रमशः 70 प्रतिशत और 58 प्रतिशत दर्ज किया गया है.

उत्तर भारत में मिला-जुला हाल

उत्तर भारत के 11 जलाशयों में पानी का स्तर औसतन 43 प्रतिशत है. पंजाब में स्थिति बेहतर है, जहां जल स्तर 68 प्रतिशत तक है. लेकिन हिमाचल प्रदेश में यह स्तर 36.6 प्रतिशत और राजस्थान में 48.3 प्रतिशत दर्ज किया गया है. इससे साफ है कि कुछ राज्यों में स्थिति संभली हुई है, जबकि कुछ जगहों पर गिरावट जारी है.

पश्चिम और मध्य भारत में भी दबाव

पश्चिमी भारत के 53 जलाशयों में पानी का स्तर 45 प्रतिशत के आसपास है. गुजरात में यह 51.8 प्रतिशत है, जबकि महाराष्ट्र में 39 प्रतिशत पानी ही बचा है. गोवा के एकमात्र जलाशय में 41 प्रतिशत जल स्तर दर्ज किया गया है.

मध्य भारत में स्थिति थोड़ी बेहतर दिख रही है, जहां 28 जलाशयों में औसतन 45.7 प्रतिशत पानी है. छत्तीसगढ़ में 59 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 47 प्रतिशत जल भंडारण है. उत्तर प्रदेश में यह स्तर 41 प्रतिशत और उत्तराखंड में 30 प्रतिशत तक पहुंच गया है.

कम बारिश और बढ़ती गर्मी बनी वजह

मौसम विभाग के अनुसार 1 मार्च से 29 अप्रैल के बीच देश के एक बड़े हिस्से में सामान्य से कम बारिश हुई है. लगभग एक तिहाई क्षेत्रों में या तो बहुत कम बारिश हुई या बिल्कुल नहीं हुई. हालांकि कुछ दक्षिणी हिस्सों में प्री-मानसून बारिश शुरू हो चुकी है, लेकिन इससे अभी तक जलाशयों के स्तर में ज्यादा सुधार नहीं आया है.

गिर सकता है जल स्तर

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के चरम पर पहुंचने के कारण आने वाले दिनों में जलाशयों का स्तर और गिर सकता है. पानी की मांग बढ़ने और बारिश की कमी के चलते स्थिति और गंभीर हो सकती है. ऐसे में जल प्रबंधन और पानी बचाने की जरूरत पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है.

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