बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का असर, 2026 में गेहूं उत्पादन बढ़ेगा लेकिन सरकारी अनुमान से कम रहने के आसार
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है और यहां साल में एक ही बार गेहूं की खेती होती है. इसकी बुवाई अक्टूबर-नवंबर में होती है और कटाई मार्च-अप्रैल में शुरू हो जाती है. सरकार ने इस साल रिकॉर्ड 120.21 मिलियन टन गेहूं उत्पादन का अनुमान जताया था. हालांकि, उद्योग से जुड़े संगठनों का मानना है कि वास्तविक उत्पादन इससे कम रह सकता है.
देश में इस साल गेहूं की फसल को लेकर मिली-जुली तस्वीर सामने आ रही है. एक तरफ अच्छी बात यह है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने फसल को कुछ नुकसान पहुंचाया है, जिससे कुल उत्पादन शुरुआती अनुमान से कम रह सकता है.
विशेषज्ञों और व्यापार से जुड़े लोगों का मानना है कि मौसम की मार के बावजूद स्थिति पूरी तरह खराब नहीं है, लेकिन गुणवत्ता और पैदावार दोनों पर कुछ असर जरूर पड़ा है.
उत्पादन बढ़ेगा, लेकिन लक्ष्य से पीछे रहेगा
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है और यहां साल में एक ही बार गेहूं की खेती होती है. इसकी बुवाई अक्टूबर-नवंबर में होती है और कटाई मार्च-अप्रैल में शुरू हो जाती है.
सरकार ने इस साल रिकॉर्ड 120.21 मिलियन टन गेहूं उत्पादन का अनुमान जताया था. हालांकि, उद्योग से जुड़े संगठनों का मानना है कि वास्तविक उत्पादन इससे कम रह सकता है.
रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अनुसार, इस साल उत्पादन करीब 113.5 से 114 मिलियन टन के बीच रह सकता है. यह आंकड़ा उनके पहले के अनुमान 115 मिलियन टन से थोड़ा कम है, लेकिन पिछले साल के करीब 109.5 से 110 मिलियन टन उत्पादन से ज्यादा है. इससे साफ है कि कुल उत्पादन में सुधार होगा, लेकिन उम्मीद जितना नहीं.
मौसम बना सबसे बड़ा कारण
इस साल गेहूं की फसल पर सबसे ज्यादा असर मौसम ने डाला है. फरवरी के आखिर में अचानक तापमान बढ़ गया था, जिससे फसल पर दबाव पड़ा. इसके बाद मार्च में कई इलाकों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि हुई, जिससे तैयार हो रही फसल को नुकसान पहुंचा. खासकर उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में ओलों ने फसल को गिरा दिया, जिससे गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. हालांकि, बारिश का एक सकारात्मक पहलू भी रहा. इससे खेतों का तापमान कम हुआ और तेज गर्मी से होने वाला नुकसान कुछ हद तक टल गया.
किसानों के लिए राहत और चिंता दोनों
किसानों के लिए इस बार स्थिति पूरी तरह नकारात्मक नहीं है. कई किसान मानते हैं कि बारिश ने फसल को गर्मी से बचा लिया, लेकिन ओलावृष्टि ने कुछ क्षेत्रों में नुकसान जरूर किया है.
पंजाब जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य के किसानों का कहना है कि बारिश ने फसल को बचाने में मदद की, लेकिन कुछ जगहों पर ओलों से नुकसान हुआ है. इसका मतलब है कि कुल उत्पादन तो अच्छा रहेगा, लेकिन कुछ इलाकों में फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है.
खेती का रकबा बढ़ा, उम्मीदें भी बढ़ीं
इस साल किसानों ने गेहूं की खेती का रकबा भी बढ़ाया है. पिछले साल जहां 32.8 मिलियन हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई थी, वहीं इस साल यह बढ़कर 33.4 मिलियन हेक्टेयर हो गई है. इसका मुख्य कारण पिछले साल का अच्छा मानसून रहा, जिससे मिट्टी में नमी बनी रही और किसानों ने ज्यादा क्षेत्र में बुवाई की. रकबा बढ़ने से उत्पादन बढ़ने की उम्मीद भी मजबूत हुई, लेकिन मौसम की अनिश्चितता ने इसमें कुछ कमी ला दी.
गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
इस बार गेहूं की मात्रा भले ही ज्यादा हो, लेकिन गुणवत्ता को लेकर चिंता बनी हुई है. ओलावृष्टि और तेज हवाओं के कारण कई जगहों पर फसल झुक गई है, जिससे दानों की चमक और आकार पर असर पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में बाजार में कीमतों पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि अच्छी क्वालिटी के गेहूं की मांग ज्यादा होती है.