भारत में बढ़ता जल संकट, 2050 तक 807 BCM पानी की मांग का अनुमान, सरकार ने बताया ‘वॉटर बजटिंग’ ही समाधान

India water crisis: भारत में जल संकट तेजी से बढ़ रहा है. 2050 तक सिंचाई के लिए पानी की मांग 807 BCM तक पहुंचने का अनुमान है. कृषि में 80–90 फीसदी पानी इस्तेमाल होने से दबाव और बढ़ रहा है. इसी कारण सरकार वॉटर बजटिंग और अटल भूजल योजना जैसे उपायों से जल प्रबंधन को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 31 May, 2026 | 08:14 AM

Indian Irrigation Water Demand: भारत, जहां दुनिया की करीब 17.5 फीसदी आबादी और 11.6 फीसदी पशुधन रहता है, आने वाले समय में गंभीर पानी की कमी की समस्या का सामना कर सकता है. जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, साल 2050 तक खेती के लिए पानी की जरूरत बढ़कर लगभग 807 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) तक पहुंच सकती है. यह स्थिति देश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है.

कृषि क्षेत्र पर सबसे ज्यादा निर्भरता

ग्रामीण भारत में पानी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल खेती में होता है, करीब 80 से 90 प्रतिशत तक. फसलों की सिंचाई, पशुपालन और खेती से जुड़े कार्यों के कारण पानी पर दबाव लगातार बढ़ रहा है. पशुओं की संख्या बढ़ने से भी पानी की जरूरत और ज्यादा हो रही है. केंद्रीय जल आयोग की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल औसतन करीब 3,880 BCM बारिश होती है. लेकिन इसमें से वेपराइजेशन और प्राकृतिक कारणों के बाद सिर्फ लगभग 1,999.20 BCM पानी ही उपयोग के लिए बच पाता है. इससे साफ है कि देश में पानी की उपलब्धता और जरूरत के बीच पहले से ही बड़ा अंतर मौजूद है.

बढ़ता पशुधन और बढ़ती समस्या

2012 से 2019 के बीच देश में पशुधन संख्या 51.2 करोड़ से बढ़कर 53.6 करोड़ हो गई. इसमें गायों की संख्या में लगभग 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इसका सीधा असर पीने के पानी, चारे की खेती और ग्रामीण जल उपयोग पर पड़ रहा है, जिससे जल संकट और गहरा हो रहा है.

जल बजटिंग क्यों जरूरी है?

जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, अब भारत को पानी प्रबंधन के पुराने तरीके (जहां जितना पानी उपलब्ध है उतना दिया जाता है) की बजाय नया तरीका अपनाना चाहिए, जिसमें पहले यह तय किया जाए कि पानी की कितनी जरूरत है. वॉटर बजटिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें गांव, ब्लॉक या जिले में यह देखा जाता है कि पानी कितना है और उसकी कितनी मांग है. इसके बाद योजना बनाकर तय किया जाता है कि पानी का इस्तेमाल कहां और कितना करना है.

इससे किसान अपनी फसल, सिंचाई का तरीका और बुवाई का समय बेहतर तरीके से चुन सकते हैं. पानी की बर्बादी कम होती है और खेती ज्यादा टिकाऊ बनती है. नाबार्ड से जुड़ी कई योजनाओं में इसके अच्छे नतीजे भी देखने को मिले हैं.

सरकारी योजनाओं की भूमिका

भारत सरकार ने पानी बचाने के लिए अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojana) और राष्ट्रीय जल मिशन जैसी योजनाएं शुरू की हैं. अटल भूजल योजना 2019 में शुरू हुई थी और इसे 7 राज्यों के 229 ऐसे इलाकों (ब्लॉकों) में लागू किया जा रहा है, जहां पानी की सबसे ज्यादा कमी है. रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 और 2024-25 के आकलन में 229 में से 180 ब्लॉकों में भूजल स्तर में सुधार देखा गया है

पारंपरिक जल संरक्षण और महिलाओं की भागीदारी

सरकार ने पुराने और पारंपरिक पानी बचाने वाले ढांचों जैसे जोहड़, बावड़ी, टांका, डिग्गी और कल्याणी को फिर से ठीक करने और इस्तेमाल में लाने पर जोर दिया है. अब तक करीब 81,700 जल संरचनाओं को बनाया या दोबारा ठीक किया जा चुका है. इसके साथ ही ‘नारी शक्ति से जल शक्ति’ अभियान के तहत महिलाओं को भी पानी के प्रबंधन से जोड़ा जा रहा है. उत्तराखंड के उधम सिंह नगर में हजारों महिलाओं को जल जीवन मिशन के तहत ट्रेनिंग दी गई है.

इसके अलावा वरुणी (Varuni) वेब एप्लिकेशन जैसे डिजिटल टूल से ब्लॉक स्तर पर पानी का हिसाब तैयार किया जा रहा है. यह सिस्टम बारिश, जमीन का उपयोग, आबादी और खेती के तरीके के आधार पर पानी की जरूरत और उपलब्धता का अनुमान लगाता है.

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