हर राज्य का अलग कृषि रोडमैप बनाने के लिए नई व्यवस्था शुरू, फार्मर आईडी, प्राकृतिक खेती समेत कई घोषणाएं 

जयपुर रीजनल कृषि कॉन्फ्रेंस से खेती-किसानी का नया रोडमैप पेश किया गया है. कृषि मंत्री ने कहा कि फार्मर आईडी आगे की योजनाओं का लाभ पाने के लिए किसानों का आधार बनेगी. उन्होंने कहा कि सभी किसानों को फार्मर आईडी से जोड़कर खाद, बीज, बीमा और मुआवजा व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी की जाएगी.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 7 Apr, 2026 | 10:28 PM

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जयपुर में आयोजित रीजनल कृषि कॉन्फ्रेंस के बाद बताया कि अब पूरे देश को विभिन्न एग्रो–क्लाइमेटिक जोनों में बांटकर हर राज्य के लिए अलग कृषि रोडमैप बनाया जाएगा, सभी किसानों को फार्मर आईडी से जोड़कर खाद, बीज, फसल बीमा और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के तहत 2024–25 में 429.89 लाख टन के रिकॉर्ड उत्पादन को और आगे बढ़ाते हुए तिलहन का क्षेत्र 290 लाख हेक्टेयर से 330 लाख हेक्टेयर पर ले जाना है. उन्होंने बीज उत्पादन, दाल मिलों की स्थापना, नई किस्मों को सीड चेन में लाने और किसानों से 100 फीसदी खरीद के जरिए देश को दालों में भी मजबूत बनाया जाएगा.

राज्यवार कृषि रोडमैप और रीजनल कॉन्फ्रेंस

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि यह देश की पहली रीजनल कॉन्फ्रेंस है, जिसमें ICAR के वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान, FPOs, नेफेड, NCCF और बीज से लेकर बाजार तक काम करने वाली सभी संस्थाएं एक मंच पर आई हैं. उन्होंने कहा कि अब देश को पांच एग्रो–क्लाइमेटिक जोनों में बांटकर पांच रीजनल कॉन्फ्रेंस होंगी, जिनमें हर राज्य की जलवायु, मिट्टी, पानी और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर अलग कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा और उसी के अनुसार यह तय होगा कि किस इलाके में कौन सी फसल, कौन सी किस्म और कौन सी कृषि पद्धति सर्वोत्तम होगी.

फार्मर आईडी: खाद, बीज, बीमा और मुआवजा की रीढ़

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सभी राज्यों में फार्मर आईडी बनाने का काम तेज गति से चल रहा है और विश्वास जताया कि लगभग तीन महीने में सभी किसानों की एकीकृत पहचान तैयार हो जाएगी, जिससे किसान को हर योजना का लाभ सीधे और सटीक रूप से मिल सकेगा. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में फार्मर आईडी के आधार पर खाद वितरण का जो मॉडल लागू है, उसी तर्ज पर पूरे देश में व्यवस्था की जाएगी, जिसमें किसान को लाइन में नहीं लगना पड़ेगा, उसकी जमीन और फसल के अनुसार आवश्यक मात्रा में खाद मिलेगा, नकली या ब्लैक मार्केटिंग रोकी जा सकेगी और बटाईदार किसानों को भी मालिक की स्वीकृति के आधार पर फार्मर आईडी से खाद व अन्य सुविधाएं मिलेंगी. यही आईडी आगे फसल बीमा, फसल क्षति मुआवजा और अन्य लाभों का भी आधार बनेगी.

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन से रिकॉर्ड प्रगति और आगे की उड़ान

शिवराज सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–तिलहन के अंतर्गत 2024–25 में तिलहन का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर 429.89 लाख टन तक पहुंच गया है, जो 2023–24 में 396.69 लाख टन था. उन्होंने कहा कि उत्पादकता 2023–24 के 1314 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2024–25 में 1412 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है, जो किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और यह संदेश देती है कि सही नीति, बीज, तकनीक और प्रोत्साहन से देश तिलहन में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है. शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 2025–26 में 1076 वैल्यू चेन क्लस्टरों के माध्यम से 13.35 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को तिलहन के अंतर्गत लाया गया है, 60 बीज केंद्र स्थापित किए गए हैं, 50 बीज भंडारण इकाइयों को मंजूरी दी गई है और 400 तेल मिलें स्थापित हो चुकी हैं, जबकि कुल 800 तेल मिलें स्थापित करने का लक्ष्य है.

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तिलहन में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य: क्षेत्र, उत्पादकता और उत्पादन

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि तिलहन में आत्मनिर्भरता के लिए 10,103 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि किसानों को तकनीक, बीज, सिंचाई, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में पूरा सहयोग मिल सके. उन्होंने बताया कि लक्ष्य यह है कि तिलहन का क्षेत्र 29 मिलियन हेक्टेयर से बढ़ाकर 33 मिलियन हेक्टेयर किया जाए, उत्पादकता 1353 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 2112 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की जाए और कुल उत्पादन 39.2 मिलियन मैट्रिक टन से बढ़ाकर 69.7 मिलियन मैट्रिक टन तक ले जाया जाए, ताकि खाद्य तेलों में आयात पर निर्भरता में निर्णायक कमी लाई जा सके और किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलों से अधिक आय मिले.

फसल क्षति, युद्ध का असर, आलू-प्याज-टमाटर और लचीली फंडिंग

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं से फसल खराब होने पर सेटेलाइट आधारित रिमोट सेंसिंग से फसल क्षति का वैज्ञानिक आकलन करने पर काम हो रहा है, ताकि राज्य सरकारें क्षति का आकलन कर आरबीसी 6(4) के तहत SDRF से राहत दें और साथ–साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से फार्मर आईडी के आधार पर रिकॉर्ड समय में बीमा राशि किसानों तक पहुंचे. उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक संकटों का असर खाद और कृषि इनपुट पर पड़ता है, लेकिन सरकार इस बात के लिए संकल्पबद्ध है कि भारत विशेषकर किसानों पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े और फिलहाल देश में खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए पर्याप्त खाद भंडार मौजूद है.

राज्य सरकारें किसानों से सीधे खरीद कर बड़े शहरों तक आपूर्ति करेंगी

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि आलू, प्याज और टमाटर जैसी फसलों में अधिक उत्पादन पर कीमत गिरने और किसानों को डिस्ट्रेस सेल करने की स्थिति से बचाने के लिए राज्य सरकारें अपनी संस्थाओं के माध्यम से किसानों से सीधे खरीद कर बड़े शहरों तक आपूर्ति करेंगी और इस प्रक्रिया में गांव से शहर तक ट्रांसपोर्ट और भंडारण का खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी, ताकि किसान को ठीक दाम और उपभोक्ता को वाजिब कीमत मिल सके. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि हर राज्य को उसकी आवश्यकता के अनुसार योजनाओं में लचीलापन मिले- जिसे ड्रिप सिंचाई की जरूरत है, उसे उसी मद में, जिसे मैकेनाइजेशन या प्रोसेसिंग की आवश्यकता है, उसे उसी मद में अधिक राशि दी जाएगी, ताकि संसाधन वहीं लगें जहाँ उनकी वास्तविक जरूरत हो.

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Published: 7 Apr, 2026 | 10:10 PM

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