Poultry Farming Sitapur News: गांव की गलियों में अक्सर लोग कहते हैं- रिटायरमेंट के बाद जिंदगी धीमी हो जाती है. लेकिन उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले (Sitapur) के रहने वाले बालेश्वर प्रसाद वर्मा ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया. बैंक की नौकरी से रिटायर होने के बाद उन्होंने ऐसा काम शुरू किया, जो आज न सिर्फ उनकी पहचान बन चुका है, बल्कि दर्जनों लोगों के लिए रोजगार का सहारा भी बन गया है. उनकी कहानी बताती है कि अगर सही ज्ञान और हिम्मत हो, तो किसी भी उम्र में नई शुरुआत की जा सकती है.
बैंक की नौकरी से पोल्ट्री फार्मिंग तक का सफर
बालेश्वर प्रसाद वर्मा एम.एस-सी. (कृषि) (Baleshwar Prasad Verma) की पढ़ाई कर चुके हैं और लंबे समय तक बैंक अधिकारी के रूप में काम करते रहे. बैंकिंग के दौरान उनका संपर्क कई पोल्ट्री किसानों से हुआ, जिससे उन्हें इस क्षेत्र की अच्छी समझ मिली. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपने अनुभव और पढ़ाई को मिलाकर कुछ अलग करने का फैसला किया. इसी सोच के साथ उन्होंने साल 2021 में स्मार्ट यील्ड एग्रो नाम से एक पार्टनरशिप फर्म शुरू की. इस फर्म में उनके परिवार की महिला उद्यमी भी साझेदार हैं, जो इस पहल को महिला सशक्तिकरण का भी शानदार उदाहरण बनाती है.

पोल्ट्री फार्मिंग से किसान की आय और रोजगार बढ़ा.
युवा नेतृत्व और परिवार का मजबूत साथ
इस कारोबार की खास बात यह है कि इसमें परिवार की भूमिका बेहद अहम है. फर्म का संचालन उनके भतीजे अंकित वर्मा संभाल रहे हैं, जो बी.टेक. पास हैं और नई तकनीकों को तेजी से अपनाते हैं. इस तरह एक तरफ अनुभव है, तो दूसरी तरफ युवा सोच-यही संतुलन इस व्यवसाय की सबसे बड़ी ताकत बन गया है. परिवार की महिलाओं की भागीदारी ने इसे और मजबूत बनाया है, जहां वे फैसलों में बराबर की हिस्सेदार हैं.
छोटे स्तर से बड़ी सफलता तक का सफर
स्मार्ट यील्ड एग्रो ने 2021 में 30,000 पक्षियों के साथ शुरुआत की थी. लेकिन मेहनत और सही योजना के दम पर सिर्फ दो साल में 2023 तक यह संख्या बढ़कर 90,000 हो गई. आज यह फार्म हर दिन करीब 80,000 अंडों का उत्पादन कर रहा है और सालाना कारोबार लगभग 12 करोड़ रुपये (FY 2025-26 अनुमानित) तक पहुंच चुका है. यहां स्काईलार्क और हाय-लाइन प्रजाति की मुर्गियों का पालन किया जाता है, जो अधिक उत्पादन के लिए जानी जाती हैं. इस फार्म से सीधे 18 लोगों को रोजगार मिला है, जबकि 10-12 लोग रोजाना मजदूरी के रूप में काम करते हैं. यानी यह व्यवसाय गांव में रोजगार का मजबूत जरिया बन चुका है.

पोल्ट्री प्रबंधन का प्रशिक्षण भी लेना है जरूरी.
नई तकनीक से बढ़ी उत्पादन क्षमता
इस फार्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी आधुनिक तकनीक है. यहां लेयर पोल्ट्री के लिए ऑटोमेशन सिस्टम लगाया गया है, जिसमें पर्यावरण नियंत्रण, फीड वितरण, खाद निष्कासन और अंडा संग्रहण जैसी सभी प्रक्रियाएं मशीनों से होती हैं. इससे न सिर्फ काम आसान हुआ है, बल्कि मुर्गियों को बेहतर माहौल मिलता है, जिससे उत्पादन भी लगातार अच्छा बना रहता है. इसके अलावा, वर्मा जी ने CARI, बरेली से पोल्ट्री प्रबंधन का प्रशिक्षण भी लिया, जिससे उन्हें तकनीकी ज्ञान मिला. उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार की पोल्ट्री विकास नीति 2013 और 2022 के तहत भी मदद मिली, जिसने उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई.
सोलर ऊर्जा से घटाई लागत, बढ़ाई कमाई
आज के समय में बढ़ती बिजली लागत हर किसान के लिए चिंता का विषय है. लेकिन बालेश्वर वर्मा ने इसका भी हल निकाल लिया. उनके फार्म में 65KW का ऑन-ग्रिड सोलर पावर सिस्टम लगाया गया है. इसके अलावा, पहले से 10KW का ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम भी मौजूद है, जिससे रोजमर्रा के काम जैसे लाइट और कूलिंग सिस्टम चलते हैं. इससे बिजली का खर्च काफी कम हो गया है और यह पर्यावरण के लिए भी बेहतर कदम है.

पोल्ट्री फार्मिंग.
किसानों के लिए भी बने सहारा
बालेश्वर वर्मा का काम सिर्फ अपने फार्म तक सीमित नहीं है. उन्होंने आसपास के किसानों को मक्का उगाने के लिए प्रेरित किया, जो पोल्ट्री फीड का मुख्य हिस्सा है. इससे किसानों को उनकी फसल का अच्छा बाजार मिला और उनकी आय बढ़ी. साथ ही, पोल्ट्री फार्म से निकलने वाली खाद ने भी किसानों की मदद की. यह खाद जमीन की उर्वरता बढ़ाती है और रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करती है. वर्मा जी और अंकित वर्मा अन्य किसानों और नए उद्यमियों को भी ट्रेनिंग और मार्गदर्शन देते हैं. बैंकिंग का अनुभव होने के कारण वे लोगों को लोन लेने में भी मदद करते हैं.
आने वाले समय की बड़ी योजनाएं
स्मार्ट यील्ड एग्रो अब अपने ब्रांड के पैकेज्ड अंडे बाजार में लाने की तैयारी कर रहा है. इससे ग्राहकों को साफ-सुथरे और ताजे अंडे मिलेंगे और कंपनी को ज्यादा मुनाफा भी होगा. इसके अलावा, फार्म पोल्ट्री खाद से पेलेट और फॉस्फोरस रिच ऑर्गेनिक मैन्योर (PROM) बनाने की योजना पर भी काम कर रहा है. इससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा और एक नया आय स्रोत तैयार होगा.
दूसरों के लिए मिसाल बनी यह सफलता
बालेश्वर प्रसाद वर्मा की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो कुछ नया करने का सपना देखते हैं लेकिन शुरुआत करने से डरते हैं. उन्होंने दिखा दिया कि सही जानकारी, मेहनत और नई सोच से खेती और पशुपालन में भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है. आज उनका यह मॉडल न सिर्फ एक सफल बिजनेस है, बल्कि गांव के विकास, रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया भी बन चुका है.