सरकार ने माना GDP में कृषि का बड़ा रोल, कृषि विकास दर तेज रही.. मछली-फल और खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर

Economic Survey Report: केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने आर्थिक सर्वेक्षण पेश कर दिया है. इसमें देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था में कृषि को मजबूत आधार माना गया है. कृषि क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों के दौरान औसत वार्षिक विकास दर की रफ्तार 4.4 फीसदी रही है. कृषि विकास दर में तेजी के लिए कई वजहें जिम्मेदार मानी गई है.

रिजवान नूर खान
नई दिल्ली | Updated On: 30 Jan, 2026 | 06:16 PM

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश कर दिया है. इसमें देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था में कृषि को मजबूत आधार माना गया है. कहा गया है कि कृषि और संबद्ध क्षेत्र विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के केंद्र में होगा. कृषि से देश के विकास को बढ़ावा मिलेगा और करोड़ों लोगों की आजीविका को बेहतर बनेगी. वहीं, कृषि उत्पादन में सुधार कर किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया है.

कृषि विकास दर में तेजी के लिए कई जिम्मेदार फैक्टर

वित्त मंत्रालय के आर्थिक सर्वेक्षण में देश की प्रगति तेज रहने की बात पर जोर दिया गया है. वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अपर रेंज अनुमान 7.2 फीसदी रखा गया है और लोअर रेंज अनुमान 6.8 फीसदी है. वहीं, कृषि क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों के दौरान औसत वार्षिक विकास दर की रफ्तार 4.4 फीसदी रही है. वित्तीय वर्ष 2016 से लेकर वित्तीय वर्ष 2025 के दौरान दशकीय वृद्धि दर 4.45 फीसदी रही, जो पिछले दशकों की तुलना में सर्वाधिक है. वित्तीय वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही के दौरान कृषि क्षेत्र की विकास दर 3.5 फीसदी रही है.

मछली उत्पादन ने ग्रोथ को नई रफ्तार दी

कृषि विकास दर में बढ़ोत्तरी और तेजी के लिए कई वजहें जिम्मेदार मानी गई है, जिसमें मुख्य रूप से मवेशी विकास दर 7.1 फीसदी रहा है. इसके साथ ही कृषि विकास दर में मछली पकड़ने एवं उसके पालन की दर 8.8 फीसदी रही है. इसके बाद फसल क्षेत्र का स्थान रहा, जिसमें 3.5 फीसदी दर की बढ़त दर्ज की गई. वर्ष 2004-14 की तुलना में 2014-2025 के दौरान मछली के उत्पादन में 140 फीसदी से भी अधिक की बढ़त के साथ 88.14 लाख टन उत्पादन दर्ज किया गया है.

खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

खाद्यान्न उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी हुई है. इसके कृषि वर्ष 2024-25 के दौरान 3,577.3 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) तक पहुंच जाने का अनुमान है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 254.3 लाख मीट्रिक टन अधिक है. खाद्यान्न उत्पादन में यह बढ़ोतरी चावल, गेहूं, मक्का एवं मोटे अनाजों (श्री अन्न) की अधिक उपज के चलते संभव हुई है.

बागवानी फसल उत्पादन अनुमान टूटे

बागवानी क्षेत्र की कृषि मूल्य वर्धन (जीवीए) में 33 फीसदी की हिस्सेदारी रही है. देश की कृषि विकास यात्रा में इसकी अहम भूमिका है. वर्ष 2024-25 के दौरान बागवानी क्षेत्र का उत्पादन 362.08 मिलियन टन तक पहुंच गया और इसने उत्पादन अनुमान 329.68 मिलियन टन को पीछे छोड़ दिया. अगस्त 2025 तक बागवानी क्षेत्र का उत्पादन 2013-14 में 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 367.72 मिलियन टन तक जा पहुंचा.

जीडीपी ग्रोथ में कृषि की अहम भूमिका

आर्थिक समीक्षा में यह भी कहा गया है कि कृषि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के केंद्र में होगी, समावेशी विकास को बढ़ावा देगी और करोड़ों लोगों की आजीविका को बेहतर बनाएगी. भारत ने कृषि विकास दर में तेजी से खासकर देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. इसमें डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन एवं बागवानी क्षेत्र को आगे बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रगति की गई है.

किसानों की आय बढ़ोत्तरी में प्रगति दर्ज की जा रही है

आर्थिक सर्वेक्षण में बताया है कि अनिवार्य फसलों के लिए सुनिश्चित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), पीएम किसान मासिक पेंशन योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत किसानों की आय बढाने में मदद की जा रही है. पीएम किसान के शुरू होने से अबतक 21 किस्तों में पात्र किसानों को 4.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि जारी की जा चुकी है. वहीं,

एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत 31 दिसंबर 2025 तक लगभग 1.79 करोड़ किसान, 2.72 करोड़ व्यापारी और 4,698 एफपीओ शामिल हो चुके हैं. इसमें 23 राज्यों और चार संघशासित राज्य क्षेत्रों की 1,522 मंडियां शामिल हैं.

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Published: 29 Jan, 2026 | 02:42 PM
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