किसानों ने परंपरागत फसलों की खेती छोड़ नगदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. झारखंड के साहिबगंज समेत कई इलाकों में किसानों ने स्ट्रॉबेरी की खेती करने की शुरुआत कर दी है. इससे किसानों की कमाई भी बढ़ी है. यहां के किसान धर्मराज को गेहूं-मक्का समेत अन्य फसलों की खेती छोड़कर स्ट्रॉबेरी उगाने की शुरुआत की है. इसके लिए उन्हें प्रगतिशील किसान सम्मान से नवाजा गया है. अब इलाके के किसान उनसे खेती सीखकर खुद भी कैश क्रॉप्स उगा रहे हैं.
झारखंड के साहिबगंज जिले के किसान अब धान, गेहूं और मक्का जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ नगदी फसलों और आधुनिक बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं. केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और राष्ट्रीय बागवानी मिशन के प्रोत्साहन से अब साहिबगंज की मिट्टी में स्ट्रॉबेरी जैसी महंगी फसलें भी लहलहा रही हैं. जिला उद्यान विभाग के जरिए किसानों को आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है.
गेहूं, धान और मक्का की जगह कैश क्रॉप की खेती
जिला उद्यान पदाधिकारी अमितेश रंजन ने मीडिया के बताया कि स्ट्राबेरी की खेती से किसानों की कमाई में बढ़ोत्तरी हुई है.साहिबगंज जिला अब तक मुख्य रूप से गेहूं, धान और मक्का उत्पादन के लिए जाना जाता था, जिससे किसानों को एक सीमित आय ही प्राप्त होती थी. लेकिन किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ केंद्र सरकार अब उन्हें ‘हाई कैश क्रॉप्स‘ यानी अधिक मुनाफे वाली फसलों के लिए प्रोत्साहित कर रही है.
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जिले के बोरियो प्रखंड के चानन गांव के रहने वाले धर्मराज मंडल इसी बदलाव की एक जीती-जागती तस्वीर हैं. धर्मराज ने अपनी डेढ़ बीघा जमीन पर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की है. यह न केवल उनके परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र जरिया है, बल्कि उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि उन्हें ‘बिरसा कृषि एग्रोटेक कार्यक्रम’ में ‘प्रगतिशील किसान’ के सम्मान से नवाजा गया है.

अपने स्ट्रॉबेरी के खेत में काम करते किसान धर्मराज.
धर्मराज बोले- पारंपरिक फसलों से कम कमाई होती थी
किसान धर्मराज ने कहा कि पहले वह पारंपरिक फसलें उगाते थे, तब उन्हें कम आय होती थी, लेकिन उन्होंने बागवानी मिशन के तहत स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत की है. इससे उन्हें ज्यादा उत्पादन और कमाई की उम्मीद बंध गई है. उन्होंने कहा कि खेती में नवाचार के लिए बिरसा मुंडा कृषि विश्वविद्यालय से उन्हें प्रगतिशील किसान पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.
गांव के अन्य किसानों ने भी स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की
उद्यान विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि धर्मराज की इस सफलता ने आसपास के किसानों को भी नई राह दिखाई है. गांव के अन्य किसान पहली बार अपने क्षेत्र में मल्चिंग और टपक सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों को देख रहे हैं. तकनीक की सुलभता और मुनाफे को देखते हुए अब अन्य ग्रामीण भी अगली बार से नगदी फसलों की खेती सीखने और करने के लिए उत्साहित हैं. आधुनिक तकनीक और सीमित संसाधनों के इस्तेमाल से न सिर्फ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है, बल्कि साहिबगंज को कृषि के नए केंद्र के रूप में भी स्थापित कर रहा है. तकनीक और साहस का सही तालमेल ही खेती को लाभ का व्यवसाय बना सकता है.