रेतीली मिट्टी में भी खूब लहलहाती है काचरी, गेहूं–सरसों के बाद जरूर करें इसकी खेती

अगर किसान छोटे आकार की उन्नत काचरी किस्म का चयन करते हैं, तो उत्पादन और बाजार कीमत दोनों बढ़ जाती हैं. कृषि विभाग एवं बीज भंडारों में कई अच्छी किस्में उपलब्ध हैं जिन्हें किसान आसानी से ले सकते हैं.

नई दिल्ली | Updated On: 3 Dec, 2025 | 03:26 PM

Farming Tips: गर्मी का मौसम किसानों के लिए हमेशा चुनौती लेकर आता है. सरसों और गेहूं की कटाई के बाद खेत कई जगह खाली पड़े रहते हैं, क्योंकि इस मौसम में ज्यादातर फसलें तापमान की मार नहीं झेल पातीं. ऐसे में किसान एक ऐसी फसल की तलाश करते हैं, जो कम पानी, कम लागत और कम देखभाल में भी अच्छा उत्पादन दे सके. इन्हीं में से एक बेहतरीन विकल्प है काचरी की खेती, जो राजस्थान सहित कई इलाकों में गर्मी की सबसे लाभदायक फसल मानी जाती है.

कम लागत, ज्यादा मुनाफे वाली फसल

काचरी की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी लागत बेहद कम आती है. बीज, हल्की जुताई और सामान्य खाद मिलाकर कुल खर्च 10,000–15,000 रुपये तक ही होता है. इसके मुकाबले उत्पादन काफी ज्यादा मिलता है, एक एकड़ में 70–80 क्विंटल तक काचरी आसानी से मिल जाती है.

अगर मंडी में इसकी सामान्य कीमत 10–15 रुपये प्रति किलो भी मान ली जाए, तो किसान एक एकड़ से 70,000 से 1,20,000 रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. जहां लागत कम और मुनाफा इतना अधिक हो, वहां काचरी फसल किसानों के लिए गर्मी में एक मजबूत सहारा बन जाती है.

क्यों खास है काचरी की खेती?

काचरी एक ऐसी देसी सब्जी है, जो राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में स्वाभाविक रूप से उगती रही है, इसलिए गर्म हवा और कम नमी में भी इसका विकास बेहतर होता है.
यह फसल-

इन सब कारणों से यह गेहूं–सरसों के बाद गर्मी में उगने वाली सबसे कम जोखिम वाली और अधिक लाभदायक फसल बन गई है.

खेती का सही तरीका

काचरी की बुवाई के लिए मार्च के अंतिम सप्ताह से अप्रैल के पहले सप्ताह तक का समय सबसे बेहतर माना जाता है. खेत को हल्की जुताई देकर तैयार किया जा सकता है. बीज बोते समय कतारों के बीच करीब 5 फीट और पौधों के बीच लगभग 1 फीट की दूरी रखना सही रहता है, जिससे बेलों को फैलने और बढ़ने की पर्याप्त जगह मिल सके. बुवाई से पहले यदि खेत में दो ट्रॉली अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद डाल दी जाए तो पौधे जल्दी बढ़ते हैं और उत्पादन भी बेहतर मिलता है.

पोषक तत्व और खाद प्रबंधन

हालांकि काचरी कम खाद में भी अच्छी उपज देती है, लेकिन यदि सही मात्रा में रासायनिक खाद का उपयोग किया जाए तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि होती है. सामान्यत: प्रति एकड़ खेत में 30–40 किलो डीएपी, 10–15 किलो यूरिया और लगभग 20 किलो एमओपी डालना लाभदायक रहता है. इन खादों से पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं, बेलों की बढ़त तेज होती है और फल अधिक तथा बेहतर आकार के प्राप्त होते हैं.

उन्नत बीज से बढ़ता है उत्पादन

अगर किसान छोटे आकार की उन्नत काचरी किस्म का चयन करते हैं, तो उत्पादन और बाजार कीमत दोनों बढ़ जाती हैं. कृषि विभाग एवं बीज भंडारों में कई अच्छी किस्में उपलब्ध हैं जिन्हें किसान आसानी से ले सकते हैं.

Published: 3 Dec, 2025 | 03:25 PM

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