Kashmir cherry farmers: कश्मीर की वादियों में उगने वाली चेरी सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि हजारों किसानों की रोजी-रोटी का सहारा है. हर साल चेरी का मौसम आते ही किसानों को अच्छी कमाई की उम्मीद रहती है, लेकिन समय पर बाजार तक फल न पहुंच पाने की वजह से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है. अब रेलवे के जरिए चेरी को देश के बड़े शहरों तक पहुंचाने की योजना ने किसानों के लिए नई उम्मीद जगा दी है.
गांदरबल बना चेरी उत्पादन का केंद्र
कश्मीर में चेरी की खेती बड़े पैमाने पर होती है, लेकिन सबसे ज्यादा उत्पादन गांदरबल जिले में होता है. यहां करीब 1,200 हेक्टेयर क्षेत्र में चेरी की खेती की जाती है और यह अकेला जिला पूरे कश्मीर के लगभग 65 प्रतिशत चेरी उत्पादन में योगदान देता है. यही वजह है कि यहां के किसान इस नई पहल से सबसे ज्यादा उम्मीद लगाए हुए हैं.
पार्सल ट्रेन से मिलेगा बड़ा सहारा
बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, गांदरबल के किसान बशारत अहमद का कहना है कि पार्सल ट्रेन से चेरी भेजने से उनका नुकसान काफी हद तक कम हो सकता है. चेरी बहुत जल्दी खराब होने वाला फल है, इसलिए अगर इसे तेजी से बाजार तक पहुंचाया जाए, तो इसकी गुणवत्ता बनी रहती है और बेहतर दाम मिलते हैं.
रेलवे विभाग ने इस बार करीब 640 टन चेरी मुंबई भेजने की योजना बनाई है. इसके लिए 28 पार्सल वैन बुक की गई हैं, जिनमें हर एक की क्षमता लगभग 23 टन है. ये वैन सीधे मुंबई के बांद्रा टर्मिनस तक जाएंगी.
पहले भी मिल चुका है सकारात्मक अनुभव
साल 2025 में पहली बार कश्मीर से चेरी को ट्रेन के जरिए मुंबई भेजा गया था. उस समय श्री माता वैष्णो देवी कटरा स्टेशन से 14 पार्सल वैन रवाना की गई थीं. यह पहल काफी सफल रही थी और किसानों को दूर के बाजारों तक जल्दी पहुंचने का फायदा मिला था.
भारी नुकसान की बड़ी समस्या
कश्मीर के चेरी किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या फसल के खराब होने की है. नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, यहां चेरी में 40 से 49 प्रतिशत तक पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान होता है. इतना ज्यादा नुकसान इसलिए होता है क्योंकि चेरी को ज्यादा समय तक सुरक्षित रखना मुश्किल होता है और ट्रांसपोर्ट में देरी होने पर यह जल्दी खराब हो जाती है.
सड़क मार्ग पर निर्भरता बनी परेशानी
अब तक ज्यादातर किसान अपने फल को सड़क मार्ग से ही बाजार तक भेजते रहे हैं. लेकिन जम्मू-श्रीनगर हाईवे अक्सर बंद हो जाता है, जिससे ट्रांसपोर्ट में देरी होती है. इस देरी के कारण किसानों को मजबूरी में कम दाम पर अपनी फसल बेचनी पड़ती है, जिससे उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ता है.
शोपियां मंडी के अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ वानी का मानना है कि अगर रेल के जरिए सीधे फल भेजे जाएं, तो खराब होने की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है. इससे किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और बाजार भी स्थिर रहेगा.
कश्मीर की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका
कश्मीर में करीब 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र में चेरी की खेती होती है और हर साल लगभग 23,114.77 मीट्रिक टन उत्पादन होता है. इससे करीब 175 करोड़ रुपये का कारोबार होता है और लगभग 14,000 किसान परिवार इस फसल पर निर्भर हैं. इसलिए चेरी को यहां की सबसे अहम नकदी फसलों में गिना जाता है.
क्या हो सकता है बदलाव
अगर रेलवे के जरिए चेरी भेजने की यह योजना सफल रहती है, तो आने वाले समय में किसानों की आय में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है. इसके साथ ही अगर कोल्ड स्टोरेज और बेहतर पैकेजिंग जैसी सुविधाएं भी बढ़ाई जाएं, तो नुकसान और भी कम हो सकता है.