गेहूं में निकल रही हैं बालियां तो इस अनुपात में करें लिक्विड फर्टिलाइजर का छिड़काव, चमकदार होंगे दाने
बाली निकलने के चरण में गेहूं की फसल को विशेष देखभाल की जरूरत है. विशेषज्ञों के अनुसार 90-100 दिन की फसल में पोटाश युक्त NPK 00:50 या 00:52:34 का छिड़काव दानों को भरपूर, चमकदार और वजनदार बनाता है. सही अनुपात में स्प्रे से उत्पादन और बाजार मूल्य बढ़ सकता है.
Wheat Farming: बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में नवंबर महीने के दौरान बोई गई गेहूं की फसल में अब बालियां निकलने लगी हैं. इसलिए अभी का समय किसानों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हो गया है. अगर किसान बाली निकलने के समय फसल की देखरेख नहीं करते हैं, तो फसल को नुकसान पहुंच सकता है. इससे पैदावार में गिरावट आ सकती है. ऐसे भी कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि गेहूं में बाली निकले के समय एक छोटी सी लापरवाही भी पैदावार पर असर डाल सकती है. इसलिए इस चरण में सही समय पर और सही मात्रा में उर्वरक देना बहुत जरूरी है.
एक्सपर्ट का कहना है कि अगर पोषक तत्वों की पूर्ति संतुलित तरीके से की जाए, तो दाने ज्यादा भरे हुए, चमकदार और वजनदार बनते हैं, जिससे बंपर उत्पादन मिलने की संभावना बढ़ जाती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, 90 दिन की गेहूं फसल में पोटाश का सही प्रबंधन बहुत जरूरी है. जब फसल में बालियां निकलने लगें, तब किसान NPK 00:50 या 00:52:34 जैसे लिक्विड फर्टिलाइजर का छिड़काव कर सकते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि 1 किलो पाउडर को 100 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करने से दाने ज्यादा चमकदार और वजनदार बनते हैं. इससे पौधों की रोगों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ती है और फसल अंत तक स्वस्थ रहती है.
पोटाश की जरूरत ज्यादा होती है
गेहूं की खेती में बुवाई के समय नाइट्रोजन और फास्फोरस देना आम बात है, लेकिन जब फसल में दाना भरने लगता है, तब पोटाश की जरूरत ज्यादा होती है. 90-100 दिन की फसल को इस समय अतिरिक्त ऊर्जा चाहिए होती है, ताकि पोषक तत्व और कार्बोहाइड्रेट सही तरीके से दानों तक पहुंच सकें. इस चरण में तरल उर्वरकों का पत्तियों पर छिड़काव करने से पौधों को सीधे पोषण मिलता है. इससे बालियां लंबी होती हैं और दाने एकसमान, भरे हुए और बेहतर आकार के बनते हैं.
अपनी मेहनत को अच्छे मुनाफे में बदल सकते हैं
फसल के दाने अगर चमकदार और वजनदार हों, तो न सिर्फ पैदावार बढ़ती है बल्कि बाजार में बेहतर कीमत भी मिलती है. पोटाश वाला स्प्रे फसल को खराब मौसम और कीटों से लड़ने की ताकत देता है. इससे दाने सिकुड़ते नहीं और उनकी प्राकृतिक चमक बनी रहती है. अगर किसान 100 लीटर पानी में 1 किलो उर्वरक का सही अनुपात रखकर छिड़काव करें, तो वे अपनी मेहनत को अच्छे मुनाफे में बदल सकते हैं.