Milk Village: मध्य प्रदेश अपनी अनोखी पहचान और अजब-गजब कहानियों के लिए जाना जाता है. यहां एक ऐसा गांव भी है, जहां लोगों से ज्यादा पशु नजर आते हैं. गांव की पहचान खेत-खलिहान से नहीं, बल्कि दूध की खुशबू से होती है. यही वजह है कि आसपास के इलाकों में इस गांव को आज दूध वाला गांव कहा जाने लगा है. यह गांव न सिर्फ अपने जिले बल्कि पड़ोसी राज्य तक दूध सप्लाई कर रहा है.
आबादी कम, पशु ज्यादा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के झांझर गांव की आबादी करीब 3 हजार है, लेकिन पशुओं की संख्या 10 हजार से भी ज्यादा है. लगभग हर घर में गाय-भैंस पाली जाती हैं. गांव में पशुपालन सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है. यहां बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक पशुओं की देखभाल में जुटे रहते हैं. सुबह-शाम पूरा गांव पशुओं के बाड़ों और दूध दुहने की हलचल से जीवंत नजर आता है.
हर दिन क्विंटल में दूध उत्पादन
इस गांव से हर दिन क्विंटल के हिसाब से दूध का उत्पादन होता है, जो पूरे जिले में सप्लाई किया जाता है. गांव की सबसे बड़ी पहचान यहां मिलने वाला शुद्ध और बिना मिलावट का दूध है. इसी वजह से आसपास के इलाकों के लोग खुद गांव तक दूध लेने पहुंचते हैं. पशुपालक दूध की गुणवत्ता पर खास ध्यान देते हैं और किसी तरह की मिलावट नहीं करते. भरोसेमंद दूध मिलने के कारण गांव धीरे-धीरे एक मजबूत दूध केंद्र के रूप में पहचान बना चुका है. आज यह गांव शुद्ध दूध और ईमानदार पशुपालन की मिसाल माना जाता है.
दूध से मिठाइयों तक का सफर
यहां के दूध से तरह-तरह की मिठाइयां और दुग्ध उत्पाद तैयार किए जाते हैं. गांव के पशुपालक पशुओं को हरा चारा, खल्ली और संतुलित आहार देते हैं, जिससे दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों बनी रहती है. कई परिवारों के पास 50 से लेकर 100 से ज्यादा पशु हैं. पशुओं को समय पर नहलाना, बाड़ों की सफाई और नियमित देखभाल यहां की दिनचर्या का हिस्सा है.
महाराष्ट्र तक जाती है सप्लाई
इस गांव का दूध सिर्फ जिले तक सीमित नहीं है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यहां से दूध पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के कई इलाकों तक सप्लाई किया जाता है. शुद्धता और स्वाद की वजह से डेयरी संचालक खुद गांव से दूध उठाते हैं. पशुपालकों का कहना है कि सही चारा, साफ-सफाई और मेहनत की बदौलत पशु अच्छा दूध देते हैं, जिससे गांव की आमदनी भी मजबूत बनी हुई है. यह गांव इस बात की मिसाल है कि अगर पशुपालन को सही तरीके से अपनाया जाए, तो यह न सिर्फ रोजगार देता है बल्कि पूरे इलाके की पहचान भी बन सकता है. कम आबादी और ज्यादा पशुओं वाला यह गांव आज मध्य प्रदेश का गर्व बन चुका है.