Radish farming: खेती में आज हर किसान यही चाहता है कि कम समय में फसल तैयार हो, लागत कम लगे और बाजार में अच्छा दाम मिले. ऐसी ही एक सब्जी है मूली, जो बहुत कम दिनों में तैयार होकर बढ़िया पैदावार देती है. मूली की खेती भारत के लगभग हर हिस्से में की जाती है और इसकी मांग सालभर बनी रहती है. सलाद से लेकर सब्जी, पराठे और आयुर्वेदिक उपयोग तक, मूली का इस्तेमाल हर घर में होता है. यही वजह है कि अगर किसान सही किस्म और सही तरीके से मूली की खेती करें, तो वे कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
आज कृषि वैज्ञानिकों ने मूली की कई उन्नत किस्में विकसित की हैं, जो 25 से 30 दिन में ही तैयार हो जाती हैं और प्रति हैक्टेयर 350 क्विंटल तक पैदावार देने की क्षमता रखती हैं. आइए आसान भाषा में जानते हैं मूली की खेती से जुड़ी पूरी जानकारी.
मूली की खेती क्यों है फायदेमंद?
मूली की सबसे बड़ी खासियत है कि यह जल्दी तैयार होने वाली फसल है. सामान्य तौर पर मूली 40 से 50 दिनों में तैयार हो जाती है, जबकि कुछ उन्नत किस्में इससे भी पहले खेत से निकल आती हैं. बाजार में मूली की कीमत आमतौर पर 500 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक रहती है. ऐसे में अगर किसान एक हैक्टेयर में अच्छी पैदावार ले लेते हैं, तो वे 1 से 1.5 लाख रुपये तक की आमदनी आसानी से कर सकते हैं. इसके अलावा मूली की खेती में ज्यादा पानी और खाद की जरूरत नहीं होती, जिससे लागत भी कम रहती है.
मूली की टॉप 5 उन्नत किस्में
अगर आप ज्यादा उत्पादन और अच्छी क्वालिटी चाहते हैं, तो इन उन्नत किस्मों की खेती जरूर करें.
पूसा हिमानी
यह किस्म खासतौर पर ठंडे इलाकों के लिए उपयुक्त मानी जाती है. इसकी मूली मोटी, सफेद और एकसमान आकार की होती है. स्वाद में हल्की तीखी होने के कारण बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है. यह किस्म लगभग 50 से 60 दिन में तैयार हो जाती है और 320 से 350 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक पैदावार दे सकती है.
पंजाब पसंद
पंजाब पसंद मूली की एक जल्दी तैयार होने वाली किस्म है. यह लगभग 45 दिन में ही खेत से निकालने लायक हो जाती है. इसकी जड़ें लंबी, सफेद और चिकनी होती हैं. यह किस्म मुख्य मौसम के साथ-साथ बेमौसम खेती के लिए भी उपयुक्त है. इसकी पैदावार मुख्य मौसम में 215–235 क्विंटल और बेमौसम में करीब 150 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक मिल जाती है.
जापानी सफेद
यह किस्म अपने कम तीखे और हल्के मीठे स्वाद के लिए जानी जाती है. इसकी जड़ें चिकनी और बेलनाकार होती हैं, जिन्हें बच्चे और बुजुर्ग भी आसानी से खा सकते हैं. यह किस्म 45 से 55 दिन में तैयार हो जाती है और 250 से 300 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक पैदावार देती है.
पूसा रेशमी
पूसा रेशमी किस्म की मूली देखने में बेहद आकर्षक होती है. इसकी जड़ें लंबी, सफेद और एकसमान होती हैं. यह किस्म लगभग 55 से 60 दिन में तैयार हो जाती है और 315 से 350 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है. बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है.
रैपिड रेड व्हाइट टिप्ड
यह मूली की सबसे जल्दी तैयार होने वाली किस्मों में से एक है. यह सिर्फ 25 से 30 दिन में तैयार हो जाती है. इसका रंग बाहर से लाल और अंदर से सफेद होता है, जो ग्राहकों को काफी पसंद आता है. जल्दी फसल लेने वाले किसानों के लिए यह किस्म बेहद फायदेमंद है.
मूली की बुवाई कैसे करें?
- अच्छी पैदावार के लिए बुवाई का तरीका सही होना बहुत जरूरी है.
- मूली की बुवाई समतल क्यारियों या मेड़ों पर करनी चाहिए.
- लाइन से लाइन की दूरी 45–50 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 5–8 सेमी रखें.
- बीज को 3–4 सेमी गहराई में बोना चाहिए.
- मेड़ों की ऊंचाई करीब 20–25 सेमी रखें ताकि पानी का निकास सही रहे.
बीज उपचार क्यों जरूरी है?
बीज उपचार से फसल को शुरुआती बीमारियों से बचाया जा सकता है. रासायनिक तरीके से 1 किलो बीज को 2.5 ग्राम थायरम से उपचारित करें. अगर जैविक तरीका अपनाना चाहें, तो बीज को गोमूत्र में भिगोकर बो सकते हैं. इससे अंकुरण अच्छा होता है.
सिंचाई और देखभाल
मूली की फसल को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन मिट्टी में नमी रहनी चाहिए. बुवाई के बाद पहली सिंचाई जरूर करें. इसके बाद 7–10 दिन के अंतर पर पानी दें. खरपतवार समय-समय पर निकालते रहें, ताकि पौधों की बढ़वार सही हो.