कुरुक्षेत्र धान घोटाले से जुड़ा बड़ा अपडेट, अब CBI जांच की उठी मांग.. जानें क्या है पूरा मामला

कुरुक्षेत्र के दो चावल मिलों में 17 करोड़ रुपये के सरकारी धान की चोरी का खुलासा हुआ. रिकॉर्डेड और असली मात्रा में अंतर मिला. एफआईआर 17 और 28 मार्च को दर्ज की गई. किसानों ने सीबीआई जांच की मांग की और अनियमितताओं पर पहले ही चेतावनी दी थी.

Kisan India
नोएडा | Published: 30 Mar, 2026 | 10:23 AM

Paddy Scam: कुरुक्षेत्र धान घोटाले से जुड़ा बड़ा अपडेट सामने आया है. जांच में दो चावल मिलों में लगभग 17 करोड़ रुपये के सरकारी धान की चोरी का खुलासा हुआ है. जांच में पता चला कि बाजार से खरीदे गए धान की रिकॉर्ड में लिखी गई मात्रा और असली मात्रा में काफी अंतर था, जिससे बड़ी अनियमितता सामने आई. इस मामले में पहली एफआईआर 17 मार्च को पेहवा के चौधरी राइस मिल के खिलाफ दर्ज की गई, जहां लगभग 5.80 करोड़ रुपये का धान गायब पाया गया. दूसरी एफआईआर 28 मार्च को इस्माइलाबाद के जगदंबा राइस मिल के मिलरों और उनके गारंटरों के खिलाफ दर्ज हुई, जहां 11.11 करोड़ रुपये का धान और 14.24 लाख रुपये के जूट के बोरे गायब मिले.

दरअसल, खरीद एजेंसियों द्वारा मिलरों को कस्टम मिलिंग  के लिए धान दिया जाता है और फिर चावल सरकार को सौंपा जाता है. दोनों मिलों से 63,210 क्विंटल से अधिक धान की कमी ने पूरी खरीद और वितरण प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं, धान घोटाले को लेकर एमएसपी कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन (मान) के पूर्व हरियाणा अध्यक्ष गुणी प्रकाश ने कहा कि आढ़ती, मंडी अधिकारी और खरीद एजेंसियां मिलकर कई सालों से धान घोटाला कर रहे थे, लेकिन यह मामला अब सामने आया है.

सीबीआई जांच की उठी मांग

वहीं, भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रवक्ता राकेश बैंस ने द ट्रिब्यून से कहा कि हम शुरू से ही सीबीआई जांच की मांग  कर रहे हैं. खरीद प्रक्रिया के दौरान हमने कई अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया था. किसानों ने सरकार को फर्जी गेट पास और पीडीएस के लिए चावल लोड ट्रकों के राइस मिलों की ओर जाने की जानकारी दी थी, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब एफआईआर दर्ज की जा रही हैं, जो साफ दिखाती हैं कि किसान संघ सही थे.

4.83 लाख किसानों ने किया पंजीकरण

उन्होंने कहा कि ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल’ पर 4.83 लाख किसानों ने 28,80,192 एकड़ पंजीकृत किए, जबकि सत्यापित क्षेत्र 30,16,285 एकड़ था. अन्य फसलों और अवैध कॉलोनियों के क्षेत्र को धान के रूप में दिखाया गया और दूसरे राज्यों से लाए गए स्टॉक को फर्जी खरीद  के रूप में समायोजित किया गया. यह एक बड़ा नेटवर्क है और उच्च स्तरीय जांच की जरूरत है. केवल निचले अधिकारियों या मिलरों के खिलाफ एफआईआर से असली समस्या हल नहीं होगी. किसान संघ इस मुद्दे को 2 अप्रैल को चंडीगढ़ में होने वाली बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री के सामने उठाएगा.

67,065 क्विंटल धान कस्टम मिलिंग के लिए दिया था

एफआईआर के अनुसार, फूड एंड सिविल सप्लाइज विभाग ने गुरु नानक एग्रो फूड्स को 67,065 क्विंटल धान कस्टम मिलिंग के लिए दिया था. नियमों के अनुसार लगभग 44,934 क्विंटल चावल देना था, लेकिन केवल 26,307 क्विंटल ही डिलीवर किया गया, जिससे विभाग को 8.26 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इस बीच, भारतीय किसान यूनियन (पहेवा) के प्रवक्ता प्रिंस वराइच ने कहा कि खरीद प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आ रही हैं. अगर प्रशासन सही तरीके से भौतिक सत्यापन करे तो आने वाले दिनों में और एफआईआर दर्ज हो सकती हैं. हाल ही में कुछ ऑडियो क्लिप्स वायरल हुईं, जिसमें मिलर अन्य मिलरों से प्रत्येक मिल के लिए 15,000 रुपये जमा करने के लिए कहता सुनाई दे रहा था, जिससे लगता है कि मिलर भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट अपने पक्ष में कराने के लिए पैसे ले रहे हैं.

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