हरियाणा में इस दिन से शुरू होगी सरसों- मसूर की खरीदी, जानें किन फसलों का कितना है खरीद रेट

हरियाणा सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के तहत सरसों, चना, मसूर, मूंग और सूरजमुखी की खरीद की तारीखें घोषित कर दी हैं. किसानों को तय MSP पर फसल बेचने का मौका मिलेगा. खरीद प्रक्रिया PSS योजना के तहत होगी और एजेंसियों को अधिकतम 25 फीसदी तक खरीद सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.

नोएडा | Updated On: 6 Mar, 2026 | 01:36 PM

Haryana News: हरियाणा में तिलहन और दलहन की खेती करने वाले किसानों के लिए खुशखबरी है. सरकार ने तिलहन और दलहन की खरीदी के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया है. मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के अनुसार, रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 में प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत सरसों, चना, मसूर, सूरजमुखी और मूंग की खरीद की के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. मसूर की खरीद 20 मार्च से शुरू होगी और 30 अप्रैल तक चलेगी. जबकि, सरसों की खरीदी 28 मार्च से शुरू होकर 1 मई तक चलेगी.

इस दिन से शुरू होगी मसूर और मूंग की खरीदी

इसी तरह चना की खरीदी 1 अप्रैल से शुरू हो जाएगी और 10 मई तक किसानों के पास उपज बेचने का मौका होगा. वहीं, मूंग 15 मई से 20 जून और सूरजमुखी की खरीदी 1 जून से 30 जून तक की जाएगी. सरकार ने इन फसलों के MSP भी तय किए हैं. सरसों की खरीदी 6,200 रुपये प्रति क्विंटल, चना 5,875 रुपये प्रति क्विंटल, मसूर 7,000 रुपये प्रति क्विंटल, सूरजमुखी 7,721 रुपये प्रति क्विंटल और समर मूंग 8,768 रुपये प्रति क्विंटल की जाएगी. अधिकारियों को किसानों को MSP और खरीद प्रक्रिया की पूरी जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही एजेंसियों को नियमों का पालन करते हुए PSS के तहत अधिकतम 25 फीसदी तक ही खरीद सुनिश्चित करने को कहा गया है.

वहीं, सरकार को उम्मीद है कि समय पर खरीदी शुरू होने से दलहन और तिलहन किसानों  को फायदा होगा. उन्हें उनकी उपज का उचित रेट मिल पाएगा. ऐसे में किसानों की कमाई में इजाफा होगा. इसके चलते हरियाणा में दलहन और तिलहन का रकबा बढ़ेगा.

फसल खरीदी की तारीखें

फसलों की खरीद कीमत (MSP)

2.67 लाख एकड़ में होती है दलहन की खेती

बता दें कि हरियाणा में दलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. इसके चलते हरियाणा में दलहन की खेती तेजी से बढ़ रही है. साल 2019-20 में लगभग 1.95 लाख एकड़ में दलहन की खेती होती थी, जो बढ़कर 2024-25 में करीब 2.67 लाख एकड़ तक पहुंच गई है. इनमें मूंग (करीब 1.47 लाख एकड़) और चना प्रमुख फसलें हैं. खास तौर पर दक्षिण हरियाणा के हिसार, भिवानी, महेंद्रगढ़ और नूंह जिलों में इसकी खेती ज्यादा हो रही है. किसानों को दलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार प्रति एकड़ 4,000 रुपये की वित्तीय सहायता भी देती है.

सरसों की खेती का रकबा और उत्पादन दोनों ही उत्साहजनक

हरियाणा में 2025-26 के दौरान सरसों की खेती का रकबा और उत्पादन दोनों ही उत्साहजनक हैं. अनुमान है कि इस साल राज्य में करीब 13.17 लाख मीट्रिक टन सरसों का उत्पादन होगा, जो पिछले वर्षों की तुलना में बढ़ोतरी को दर्शाता है. वहीं 2024-25 में सरकार ने 8.12 लाख मीट्रिक टन से अधिक सरसों की खरीद की थी. इससे साफ है कि राज्य में सरसों की खेती और सरकारी खरीद दोनों लगातार मजबूत हो रही हैं.

हरियाणा के इन जिलों में होती है सरसों की खेती

हरियाणा में सरसों रबी (सर्दियों) की एक प्रमुख नकदी फसल है. इसकी खेती खासकर महेंद्रगढ़, भिवानी, रेवाड़ी और हिसार जैसे दक्षिण-पश्चिमी जिलों में बड़े पैमाने पर की जाती है. सरसों की फसल पर 10 से 30 फीसदी तक खरपतवार  का असर हो सकता है, इसलिए अच्छी पैदावार के लिए सही समय पर खेती करना जरूरी है. विशेषज्ञों के अनुसार 25 सितंबर से 31 अक्टूबर के बीच बुवाई, उचित बीज दर और संतुलित पोषक तत्वों खासकर सल्फर का सही प्रबंधन करने से उत्पादन बेहतर होता है. इन उपायों से सरसों की औसत पैदावार लगभग 26.12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मिल सकती है.

Published: 6 Mar, 2026 | 12:35 PM

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