Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र की सबसे चर्चित कल्याणकारी योजनाओं में से एक लाडकी बहिन योजना एक बार फिर सुर्खियों में है. e-KYC सत्यापन के बाद जहां लाखों महिलाओं को झटका लगा है, वहीं सरकार ने साफ कर दिया है कि यह योजना बंद नहीं होगी, लेकिन लाभार्थियों की सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं. करीब 80 लाख नाम हटने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किन कारणों से इतनी बड़ी संख्या में लोगों को योजना से बाहर किया गया.
e-KYC के बाद बड़ी कटौती
योजना के तहत किए गए सख्त सत्यापन अभियान के बाद बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पहले जहां लाभार्थियों की संख्या 2.46 करोड़ थी, वहीं अब यह घटकर लगभग 1.66 करोड़ रह गई है. यानी करीब 80 लाख नाम सूची से हटाए गए हैं.
क्यों हटाए गए 80 लाख नाम?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह कटौती एक व्यवस्थित जांच प्रक्रिया का हिस्सा है. इसके पीछे मुख्य कारण रहे:
- उत्तर प्रदेश में फसल बचाने के लिए छुट्टा पशुओं पर सख्ती की तैयारी, कृषि मंत्री शाही ने दिए बड़े संकेत
- बंगाल सरकार का बड़ा फैसला, कृषि और पशु उत्पादों के निर्यात से हटेगा प्रतिबंध.. किसानों को होगा फायदा
- फसल नुकसान पर अब सरकार दे रही सीधे पैसा, इस तारीख से पहले कर लें आवेदन तो हाथ से निकल जाएगा मौका!
- समय पर e-KYC पूरा न करना
- दस्तावेजों का अधूरा या गलत होना
- आय और पात्रता मानदंडों पर खरा न उतरना
- व्यक्तिगत जानकारी में गड़बड़ी या विसंगति
अधिकारियों ने बताया कि यह प्रक्रिया लाभार्थी सूची को पारदर्शी और सही बनाने के लिए जरूरी थी.
e-KYC की अंतिम तारीख और नियम
सरकार ने दस्तावेज अपडेट और e-KYC की अंतिम तिथि 30 अप्रैल तय की थी. इससे पहले कई बार समयसीमा बढ़ाई गई थी, लेकिन इस बार इसे अंतिम अवसर बताया गया था. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘इसके लिए लोगों को पर्याप्त समय दिया गया था, इसलिए अब और विस्तार की कोई योजना नहीं है.’ सूची से नाम हटने के बाद कई महिलाओं के लिए यह बड़ा आर्थिक झटका साबित हुआ है. पुणे की एक लाभार्थी ने कहा कि उन्होंने सभी दस्तावेज जमा किए थे, लेकिन फिर भी उनका नाम सूची से हट गया. वहीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि कई लोगों को उम्मीद थी कि तारीख फिर बढ़ेगी, लेकिन अचानक भुगतान रुक जाने से मुश्किलें बढ़ गई हैं.
सरकार का बचाव और राजनीतिक बयान
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने स्पष्ट किया है कि योजना को बंद करने की कोई योजना नहीं है. सरकार का कहना है कि यह योजना महिलाओं और किसानों के लिए महत्वपूर्ण सहायता कार्यक्रम है और इसे जारी रखा जाएगा.
योजना का उद्देश्य और खर्च
यह योजना 2024 विधानसभा चुनाव से पहले शुरू की गई थी, जिसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. सरकारी अनुमान के मुताबिक, इस योजना पर राज्य को हर साल 40,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करना पड़ रहा है.
लाडकी बहिन योजना महाराष्ट्र की सबसे बड़ी सामाजिक कल्याण योजनाओं में से एक है. हालांकि e-KYC के बाद बड़ी संख्या में नाम हटने से विवाद और असंतोष भी देखने को मिल रहा है, लेकिन सरकार का दावा है कि यह कदम केवल पारदर्शिता और सही लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने के लिए उठाया गया है.