Odisha News: ओडिशा सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड 10 साल से अधिक पुराने कमर्शियल वाहनों के प्रवेश और संचालन पर रोक लगा दी है. इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे पुराने वाहनों के दोबारा रजिस्ट्रेशन को रोकना है. यह फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि दिल्ली- NCR में प्रदूषण को देखते हुए 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों पर पहले ही प्रतिबंध लगा हुआ है. ऐसे में आशंका थी कि ये वाहन ओडिशा में रजिस्टर कराए जा सकते हैं, जिसे रोकने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है.
स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) के अधिकारियों ने कहा कि इन पुराने वाहनों के प्रवेश और संचालन पर रोक लगाने का फैसला 19 जुलाई 2023 की बैठक में ही ले लिया गया था. हालांकि, कुछ क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) इस नियम को ठीक से लागू नहीं कर रहे थे, जबकि ऐसे मामले सामने भी आए थे. इसी वजह से अब वाणिज्य एवं परिवहन मंत्री विभूति भूषण जेना के निर्देश पर नया आदेश जारी किया गया है, ताकि राज्य की परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके और यात्रियों की सुरक्षा मजबूत हो.
ओडिशा में प्रवेश और संचालन पर सख्त रोक
स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) के आदेश के अनुसार, दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड 10 साल से ज्यादा पुराने कमर्शियल वाहनों के ओडिशा में प्रवेश और संचालन पर सख्त रोक रहेगी. ऐसे वाहनों को राज्य में चलाने के लिए कोई नया परमिट भी जारी नहीं किया जाएगा. साथ ही आरटीओ को निर्देश दिया गया है कि इन वाहनों का पता बदलने, मालिकाना हक ट्रांसफर करने या किसी भी तरह का टैक्स लेने की अनुमति न दी जाए.
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इससे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी
अधिकारियों को इस नियम को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. माना जा रहा है कि इससे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी, पुराने और अनुपयुक्त वाहन कम होंगे और प्रदूषण भी घटेगा. ओडिशा सरकार 15 साल से पुराने उन सभी वाहनों को धीरे-धीरे हटाने की प्रक्रिया में है, जो फिटनेस टेस्ट में फेल हो रहे हैं. इसमें कमर्शियल और निजी दोनों तरह के वाहन शामिल हैं. यह कार्रवाई ओडिशा रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी पॉलिसी-2022 के तहत की जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे हजारों पुराने वाहनों को पहले ही स्क्रैप किया जा चुका है और कई अन्य वाहनों की पहचान कर उन्हें अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर पर भेजने की प्रक्रिया जारी है.
पुराने वाहनों से प्रदूषण फैलाता है
दरअसल, 10 साल से पुराने वाहन, खासकर डीजल गाड़ियां, पुराने इंजन और कम क्षमता की वजह से ज्यादा प्रदूषण फैलाती हैं. इनमें पुराने उत्सर्जन मानक (जैसे BS-III या उससे नीचे) होते हैं, इसलिए ये आधुनिक वाहनों की तुलना में अधिक जहरीली गैसें छोड़ते हैं. ऐसे वाहन नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), ब्लैक कार्बन और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें उत्सर्जित करते हैं, जो स्मॉग बढ़ाने के साथ-साथ सांस से जुड़ी बीमारियों का बड़ा कारण बनती हैं.
पुराने वाहनों में समय के साथ इंजन घिसने लगता है
पुराने वाहनों में समय के साथ इंजन घिसने लगता है, जिससे ईंधन पूरी तरह नहीं जलता और ज्यादा हानिकारक धुआं निकलता है. साथ ही, इनमें BS-IV या BS-VI जैसी आधुनिक उत्सर्जन तकनीक नहीं होती, जो प्रदूषण को कम करती है. इसलिए 10 साल पुराने वाहन नए वाहनों के मुकाबले लगभग 90 फीसदी ज्यादा पीएम (PM) और 70फीसदी ज्यादा NOx गैस छोड़ सकते हैं.