अनार की खेती करने वाले किसानों के लिए एक नई खुशखबरी है. महाराष्ट्र के सोलापुर स्थित आईसीएआर नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन पामेग्रेनेट (ICAR-NRCP) के कृषि वैज्ञानिकों ने सोलापुर अनारदाना नाम की नई हाईब्रिड किस्म को विकसित की है, जो खासतौर पर प्रोसेसिंग यानी प्रसंस्करण के लिए तैयार की गई है. इस किस्म की सबसे खास बात यह है कि इसका उपयोग अनारदाना बनाने, जूस, सिरका और अन्य खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों के लिए बड़े पैमाने पर किया जा सकता है.
सोलापुर अनारदाना किस्म
सोलापुर अनारदाना किस्म को गणेश, नाना, दारू और भगवा जैसी लोकप्रिय अनार के किस्मों को मिलाकर विकसित किया गया है. यह एक ट्रिपल क्रॉस हाइब्रिड किस्म है, जिसे उत्पादन, गुणवत्ता और टिकाऊपन तीनों में बेहतरीन मानी जाती है. इसके फल बड़े होते हैं जिसका औसतन वजन 280 ग्राम , और इनका पकने का समय 148 से 150 दिन का होता है. एक पेड़ से लगभग 30.72 किलोग्राम फल का उत्पादन हो सकता है, जो कि अनार की पारंपरिक किस्मों की तुलना में काफी अधिक मानी जाती है.
अनार में होती है भरपूर मिठास
इस किस्म के दाने (अरिल) और छिलका दोनों गहरे लाल रंग के होते हैं, जो बाजार में ग्राहकों को खूब पसंद आते हैं. इसमें मिठास भरपूर होती है. इसके साथ ही विटामिन सी की मात्रा 18.20 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम है. इसके अलावा इसमें एंथोसाइनिन 456 मिलीग्राम जैसे पोषक तत्व भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो इसे सेहतमंद और प्रोसेसिंग के लिए बेहतर विकल्प बनाते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इससे 21.6 प्रतिशत अनारदाना की रिकवरी होती है, यानी यह किस्म सूखे अनारदाना उत्पादन के लिए भी बहुत फायदेमंद है.
कम पानी और खराब जलवायु के लिए बेस्ट
किसान अक्सर अनार की फसल में बैक्टीरियल ब्लाइट जैसी बीमारियों और सूखे की समस्या से परेशान रहते हैं. लेकिन सोलापुर अनारदाना किस्म में इन दोनों के प्रति मध्यम स्तर की सहनशील होती है. यानी यह किस्म कम पानी और खराब जलवायु में भी अच्छा उत्पादन देती है. यह किस्म देश के सभी अनार उत्पादक राज्य जैसे की महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक या आंध्र प्रदेश में आसानी से उगाई जा सकती हैं. इसकी खेती का सबसे अच्छा समय अगस्त से सितंबर या फरवरी से मार्च के बीच होता है.
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