Maharashtra Farmers: महाराष्ट्र में किसानों की बढ़ती परेशानियों को लेकर नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. उन्होंने राज्य में किसानों की आत्महत्या, सिंचाई की समस्याएं, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), फसल बीमा योजना और नकली बीज-खाद जैसे कई अहम मुद्दों पर केंद्र सरकार से तत्काल कदम उठाने की अपील की है.
22 जुलाई 2026 को लिखे गए इस पत्र में शरद पवार ने कहा कि, महाराष्ट्र का कृषि क्षेत्र गंभीर चुनौतियों से गुजर रहा है. उनका कहना है कि किसानों को राहत देने के लिए सिर्फ घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है.
किसान आत्महत्या पर जताई चिंता
शरद पवार ने अपने पत्र में दावा किया कि महाराष्ट्र में औसतन हर तीन घंटे में एक किसान आत्महत्या कर रहा है. उन्होंने कहा कि, पिछले एक साल में विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र में 2,700 से ज्यादा किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं.
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उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित परिवारों को मिलने वाला 1 लाख रुपये का सरकारी मुआवजा अक्सर लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया और पात्रता संबंधी शर्तों के कारण समय पर नहीं मिल पाता. उन्होंने मांग की कि डिजिटल सत्यापन की प्रक्रिया तेज की जाए और सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजी जाए.
सिंचाई परियोजनाओं पर उठाए सवाल
पवार ने सिंचाई और पेयजल योजनाओं की धीमी प्रगति पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन सहित कई परियोजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये मंजूर होने के बावजूद खराब योजना, भ्रष्टाचार, राजनीतिक दखल और लापरवाही के कारण काम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है. उन्होंने इन परियोजनाओं का स्वतंत्र थर्ड-पार्टी ऑडिट कराने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की.
MSP की कानूनी गारंटी की मांग
शरद पवार ने कहा कि, केंद्र सरकार 23 फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है, लेकिन महाराष्ट्र के अधिकांश किसानों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता. उनका कहना है कि सरकारी खरीद केंद्र समय पर नहीं खुलते, जिससे किसान अपनी उपज बाजार में कम कीमत पर बेचने को मजबूर हो जाते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में सोयाबीन, कपास, दालों और धान की सरकारी खरीद सीमित रहती है. इसी वजह से उन्होंने सभी किसानों के लिए MSP की कानूनी गारंटी लागू करने की मांग की.
फसल बीमा और नकली बीज-खाद का भी उठाया मुद्दा
पवार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में भी कई कमियां बताईं. उन्होंने कहा कि फसल नुकसान के सर्वे में देरी, तकनीक का सही इस्तेमाल न होना और शिकायतों का समय पर समाधान नहीं होने से किसानों को परेशानी होती है. उन्होंने जियो-टैगिंग को अनिवार्य बनाने, नियमों का पालन न करने वाली बीमा कंपनियों पर कार्रवाई करने और मुआवजा तय समय में किसानों के खाते में भेजने की मांग की.
इसके अलावा उन्होंने नकली बीज और खाद की बिक्री पर सख्त कार्रवाई, कृषि इनपुट पर जीएसटी कम करने और जलवायु परिवर्तन से होने वाले फसल नुकसान को ध्यान में रखते हुए राहत नियमों में बदलाव की भी मांग की.
पीएम मोदी से मुलाकात में भी उठाए कई मुद्दे
पत्र के अलावा शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी की. पवार ने बताया कि, इस दौरान किसानों की समस्याओं, पानी के बेहतर प्रबंधन, शिक्षा और NEET पेपर लीक से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई.
पवार के अनुसार, प्रधानमंत्री ने इन विषयों पर सकारात्मक और ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया. हालांकि, सरकार की ओर से इन मांगों पर किसी औपचारिक फैसले की घोषणा फिलहाल नहीं की गई है.