सोलर स्कीम में सब्सिडी का खेल, योजना की खामियों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ाईं 

PM surya ghar scheme: पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के नाम में ही इसकी खूबी और खामी दोनों छुपी हैं. एक तरफ यह योजना बिजली उपभोक्ताओं को मुफ्त में बिजली मिलने के लिए आकर्षित करती हैं. वहीं, दूसरी तरफ इसमें दी जा रही सब्सिडी के खेल में इसकी खामी साफ झलकती नजर आती है.

निर्मल यादव
नोएडा | Published: 21 Apr, 2026 | 01:13 PM

सौर ऊर्जा के इस्तेमाल के लिए सौर ऊर्जा मिशन के जरिए कई योजनाएं केंद्र सरकार चला रही है. इसमें पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना भी शामिल है. लेकिन इस योजना के नाम में ही इसकी खूबी और खामी दोनों छुपी हैं. एक तरफ यह योजना बिजली उपभोक्ताओं को मुफ्त में बिजली मिलने के लिए आकर्षित करती हैं. वहीं, दूसरी तरफ इसमें दी जा रही सब्सिडी के खेल में इसकी खामी भी झलकती नजर आती है. योजना के प्रावधानों के अनुसार शहरी क्षेत्र के बिजली उपभोक्ता अपने मकान की छत पर 1 से 3 किलोवाट तक का सोलर सिस्टम, सब्सिडी पर लगवा सकते हैं. इसके तहत 1 किलोवाट के सिस्टम की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 65 हजार रुपये है. इसे लगवाने पर 30 हजार रुपये की केंद्र सरकार से सब्सिडी मिलती है. इस पर राज्य सरकारें भी सब्सिडी दे रही हैं. मसलन 1 किलोवाट के सिस्टम पर यूपी सरकार 15 हजार रुपये की सब्सिडी दे रही है. ऐसे में यूपी सरकार के उपभोक्ताओं को यह सिस्टम महज 20 हजार रुपये में मिल जाता है.

इसी प्रकार 2 किलो वाट के सिस्टम की अनुमानित बाजार कीमत 1.30 लाख रुपये पर केंद्र सरकार 60 हजार रुपये की सब्सिडी और 3 किलोवाट के सोलर सिस्टम की 1.80 लाख रुपये अनुमानित बाजार कीमत पर 78 हजार रुपये की सब्सिडी दे रही है. इस योजना के तहत बिजली उपभोक्ता 10 किलोवाट तक की क्षमता वाले सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं. लेकिन 3 से 10 किलो वाट तक की क्षमता वाले सोलर सिस्टम पर 78 हजार रुपये ही सब्सिडी मिलती है. यही वजह है कि सर्वाधिक सब्सिडी वाले 3 किलो वाट के सोलर सिस्टम को सबसे ज्यादा लोग लगवा रहे हैं.

इस योजना के लागू होने के बाद सोलर कंपनियों के बीच गलाकाट प्रतियोगिता तेज होने के कारण 2024 के अंत तक बाजार में सोलर सिस्टम की कीमत काफी कम हो गई हैं. इस कारण अब 1 से 3 किलोवाट के सोलर सिस्टम बाजार में उतनी ही कीमत पर मिलने लगे हैं, जितनी राशि इस योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी मिलने के बाद चुकानी पड़ती है. यही कारण से सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि इस योजना के लाभार्थियों को दी जा रही सब्सिडी की राशि सही मायने में सोलर कंपनियों को मिल रही है.

इस योजना में ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम लगवाने में दूसरी बडी खामी जनता द्वारा बनाई जा रही बिजली का इस्तेमाल जनता के द्वारा नहीं कर पाना है. ऑन ग्रिड सिस्टम से बनी बिजली सीधे ग्रिड में जाती है. सोलर सिस्टम से जितनी बिजली ग्रिड में गई, उसका पैसा उपभोक्ता के बिल में समायोजित हो जाता है. इसकी दूसरी बड़ी खामी बिजली की कीमत में दोगुने का अंतर होना है. अर्थात सरकार जिस कीमत पर बिजली उपभोक्ताओं को बिजली देती है, उससे लगभग आधी कीमत पर उपभोक्ताओं द्वारा सोलर सिस्टम से बनाई गई बिजली खरीदती है. इस सिस्टम की तीसरी बडी खामी बिजली कटौती होने पर पूरा सोलर सिस्टम अपने आप बंद होना है. बिजली आपूर्ति बाधित होने पर उपभोक्ताओं को अपने घर में सोलर सिस्टम लगा होने के बावजूद अंधेरे या गर्मी में रहना पड़ता है. यानी ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम लगवाने वाले बिजली उपभोक्ताओं को इनवर्टर से मुक्ति अभी नहीं मिल सकी है.

ये है विकल्प

ऐसे में सवाल यह उठता है कि आम उपभोक्ताओं के लिए कौन सा सोलर सिस्टम सबसे बेहतर है? इसके विकल्प के रूप में हाइब्रिड या ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम मौजूद हैं. हाइब्रिड सोलर सिस्टम की कीमत, ऑन ग्रिड और ऑफ ग्रिड से ज्यादा होती है. हालांकि हाइब्रिड सिस्टम के लाभ भी भरपूर हैं. इसे अब पीएम सूर्य घर योजना में लगाने पर उपभोक्ता को ऑन ग्रिड सिस्टम के बराबर ही सब्सिडी भी मिल जाती है और बिजली कटौती होने पर सोलर सिस्टम बंद नहीं होता है. इस दौरान सोलर सिस्टम से बन रही बिजली उपभोक्ता के घर में इस्तेमाल हो जाती है. इस प्रकार हाइब्रिड सिस्टम इन्वर्टर से मुक्ति प्रदान करता है. साथ ही इसमें बैटरी लगाकर रात के बैकअप का भी इंतजाम किया जा सकता है.

वहीं, बिजली आपूर्ति बहाल रहने के दौरान सोलर सिस्टम से बन रही बिजली ग्रिड में भी जाती रहती है. इसकी कीमत का समायोजन बिजली के बिल में हो जाता है. इस प्रकार आर्थिक रूप से सक्षम उपभोक्ता हाइब्रिड सिस्टम अपनाकर ऑन ग्रिड सिस्टम की कमियों को पूरा कर सकते हैं. हालांकि सोलर बाजार में दिनों दिन बढ़ रही प्रतिस्पर्धा के कारण हाइब्रिड सोलर सिस्टम के विकल्प और कीमत भी उपभोक्ताओं के अनुकूल हो रही है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि 2027 तक हाइब्रिड सोलर सिस्टम भी आम उपभोक्ताओं की सामान्य पहुंच में हो जाएगा.

फिलहाल जो उपभोक्ता हाइब्रिड सिस्टम महंगा होने के कारण नहीं लगा सकते हैं, उनके लिए ऑफ ग्रिड सिस्टम एक सुरक्षित विकल्प है. यह ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम के बाजार मूल्य से कम कीमत में लगाया जा सकता है. अभी सामान्य धारणा यह है कि जिन घरों में बिजली के कनेक्शन नहीं हैं, उनमें ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम लगता है. लेकिन, अब बिजली कनेक्शन से युक्त घरों में भी इस सिस्टम को लगवा कर दिन के समय बिजली की पूरी खपत सोलर सिस्टम से की जा सकती है और रात के समय सरकारी व्यवस्था में मिल रही बिजली का इस्तेमाल करके बिजली के बिल में खासी कटौती की जा सकती है. इसके अलावा ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम के साथ बैटरी बैकअप का इंतजाम करके रात के समय भी बिजली की जरूरत को पूरा किया जा सकता है. इस स्थिति में बिजली के कनेक्शन को आपात स्थिति के लिए बहाल रखा जा सकता है. ऐसे में बिजली का न्यूनतम बिल ही देना पडे़गा.

किसानों के लिए सौर ऊर्जा

ग्रामीण इलाकों में किसानों को सिंचाई के लिए बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. इसके लिए किसान पूरी तरह से जुगाड़ सिस्टम पर आश्रित रहते हैं. महज एक फीसदी से भी कम किसानों के खेत पर ट्रांसफार्मर के जरिए बिजली पहुंच पा रही है. बाकी के किसान खेतों पर लगे ट्रांसफार्मर से डोरी डालकर बिजली का अवैध कनेक्शन लेकर सिंचाई करते हैं. इसके एवज में किसानों को हर बार सिंचाई करने पर 500 रुपये प्रति बीघा की दर से हर ट्रांसफार्मर मालिक को भुगतान करना पड़ता है. साथ ही बिजली विभाग को भी अस्थाई कनेक्शन शुल्क के रूप में पैसा देना पड़ता है.

किसानों को इस संकट से बचाते हुए सिंचाई के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने मार्च 2019 में पीएम कुसुम योजना शुरू की थी. इसके तहत किसानों को 1 से 7.5 हॉर्स पावर तक की क्षमता वाले सोलर पंप अनुदान पर दिए जाते हैं. इस योजना के लाभार्थी किसानों को 60 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है. अनुसूचित जाति एवं जनजाति के किसानों को अलग अलग राज्यों में इससे भी ज्यादा अनुदान दिया जाता है.

अब सरकार ने इस योजना में भी व्यवहारिक दिक्कतों को देखते हुए लाभार्थी किसानों को ज्यादा सहूलियतें देने की पहल की है. इसमें पहली व्यवहारिक दिक्कत यह थी कि किसान को सिंचाई के लिए साल भर में सिर्फ 35 से 40 दिन तक सोलर पंप की जरूरत होती है. बाकी समय सोलर पैनल से विद्युत ऊर्जा बनती तो रहती है, लेकिन इसके संचय का कोई इंतजाम नहीं होने के कारण यह ऊर्जा अनुपयुक्त ही रह जाती है. इसके लिए अब सरकार ने पीएम कुसुम योजना का दूसरा चरण जल्द ही शुरू करने का फैसला किया है. इस चरण में किसान अपने सोलर पंप के साथ दिए गए सोलर पैनल की मदद से छोटी ग्रिड बनाकर अपने फार्म या आसपास के किसानों की बिजली जरूरतों को पूरा कर सकेंगे.

इसके अलावा पीएम कुसुम योजना के तहत बडे किसान अपनी बंजर जमीन पर सरकारी अनुदान से सोलर ग्रिड भी लगा सकते हैं. इस ग्रिड से बनने वाली बिजली को सरकार खरीद कर किसान को अन्न उत्पादक के साथ साथ ऊर्जा उत्पादक भी बनने का मौका देती है.

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