पंजाब में मूंग खरीद पर घमासान, MSP पर खरीद नहीं होने पर सुखबीर बादल ने सरकार को घेरा

Punjab Moong Procurement: शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर मूंग की सरकारी खरीद नहीं करने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि MSP 8,780 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद किसानों को बाजार में केवल 6,500-7,000 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 8 Jul, 2026 | 04:33 PM

Moong MSP Purchase: पंजाब में मूंग की सरकारी खरीद को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है. शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर किसानों से किए गए वादे तोड़ने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि, सरकार ने किसानों को मूंग की खेती के लिए प्रोत्साहित तो किया, लेकिन जब फसल तैयार हुई तो उसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने का वादा पूरा नहीं किया. बादल का दावा है कि सरकारी खरीद नहीं होने की वजह से किसानों को अपनी फसल मजबूरी में निजी व्यापारियों को कम दाम पर बेचनी पड़ रही है.

MSP से काफी कम कीमत पर बिक रही मूंग

सुखबीर सिंह बादल के मुताबिक, इस समय मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 8,780 रुपये प्रति क्विंटल तय है. लेकिन मंडियों में किसानों को केवल 6,500 से 7,000 रुपये प्रति क्विंटल तक का ही भाव मिल रहा है. यानी किसानों को हर क्विंटल पर करीब 1,500 से 2,000 रुपये तक का नुकसान झेलना पड़ रहा है. उनका कहना है कि, अगर सरकार समय पर खरीद करती, तो किसानों को अपनी उपज का सही दाम मिल सकता था.

2022 के वादे की दिलाई याद

अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि साल 2022 में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसानों से अपील की थी कि वे धान के साथ-साथ मूंग जैसी दलहनी फसलों की खेती बढ़ाएं. उस समय सरकार ने भरोसा दिलाया था कि किसानों की पूरी मूंग फसल MSP पर खरीदी जाएगी. लेकिन अब हालात इसके बिल्कुल उलट हैं. बादल का आरोप है कि सरकार अपने वादे पर खरी नहीं उतरी और किसानों को बाजार के भरोसे छोड़ दिया.

सरकारी खरीद के आंकड़ों पर भी उठाए सवाल

सुखबीर बादल ने सरकारी खरीद के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि, साल 2022 में सरकारी एजेंसियों ने मंडियों में आई कुल मूंग का केवल करीब 1 प्रतिशत ही खरीदा था. उन्होंने दावा किया कि साल 2023 में यह खरीद 1 प्रतिशत से भी कम रही, जबकि 2024 से लेकर अब तक सरकारी एजेंसियों ने मूंग की खरीद नहीं की है. उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो किसान मूंग की खेती से दूरी बनाने लगेंगे.

मूंग की खेती क्यों है जरूरी?

बादल ने कहा कि, मूंग केवल किसानों की आमदनी बढ़ाने वाली फसल ही नहीं है, बल्कि यह मिट्टी की सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है. दलहनी फसल होने के कारण मूंग जमीन में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन बढ़ाती है. इससे मिट्टी की उर्वरता सुधरती है.

2027 के लिए किया बड़ा वादा

सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि, अगर साल 2027 के विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल की सरकार बनती है, तो किसानों के लिए नई कृषि नीति लागू की जाएगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार बनने पर मूंग की पूरी फसल MSP पर खरीदी जाएगी, ताकि किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके और उन्हें आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े. फिलहाल पंजाब के मूंग उत्पादक किसान सरकारी खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि, अगर MSP पर खरीद नहीं होती है तो उन्हें हर साल भारी नुकसान झेलना पड़ेगा. अब सभी की नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर क्या फैसला लेती है.

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