Rajasthan News: राजस्थान में इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 10 मार्च से गेहूं की खरीदी शुरू होगी, लेकिन इससे पहले ही राज्य में माहौल गर्म हो गया है. व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि खरीद प्रक्रिया में अचानक बदलाव करने से मंडियों में गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं और उन्हें सरकारी खरीद से पीछे हटना पड़ सकता है. साथ ही व्यापारियों ने गेहूं खरीदी में पंजाब मॉडल अपनाने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि अगर सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है, तो वे सरकारी खरीद में सहयोग नहीं करेंगे.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान फूड ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा से उनके कार्यालय में मुलाकात की और नई प्रणाली से होने वाली परेशानियों से अवगत कराया. मंत्री ने कथित तौर पर उन्हें आश्वासन दिया कि यह मुद्दा दो से तीन दिन के अंदर हल कर दिया जाएगा. मंत्री से मुलाकात के बाद एसोसिएशन के नेता रतन लाल गोयल ने कहा कि मंत्री ने उन्हें ध्यान से सुना और जल्द ही ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया. गोयल ने कहा कि अगर सरकार हमारी चिंताओं को नहीं सुनेगी, तो व्यापारी सरकारी गेहूं खरीद में सहयोग नहीं कर पाएंगे.
सरकार ने गेहूं की खरीद प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है
इस साल राजस्थान सरकार ने गेहूं की खरीद प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है, जो पंजाब के फोकल प्वाइंट मॉडल से प्रेरित है. पंजाब में, जहां ग्रामीण मजदूरों की कमी रहती है, सरकार कुछ तय किए गए फोकल प्वाइंट पर व्यापारियों को जिम्मेदारी देती है. इसमें गेहूं तौलना, बोरी भरना और सिलाई करना और वाहन में लोड करना शामिल है. सरकार व्यापारियों को इन खर्चों का भुगतान करती है.
मंडी में मजदूरों की भारी कमी हो सकती है
लेकिन राजस्थान में फोकल प्वाइंट सिस्टम नहीं है. गेहूं सीधे मंडियों में आता है. पिछले कई सालों से यह काम खरीद एजेंसियों- फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI), तिलम संघ और राजफेड अपने कॉन्ट्रैक्टर्स के माध्यम से संभालते आए हैं. राजस्थान की मंडियों में गेहूं के साथ सरसों, जौ और चना भी एक ही समय में आता है, जबकि पंजाब में केवल गेहूं ही आता है. व्यापारियों का कहना है कि इससे मजदूरों की भारी कमी हो सकती है, क्योंकि वे ज्यादा कमाई वाले सरसों, जौ और चने को प्राथमिकता देंगे.
सरकार ने हैंडलिंग शुल्क 23 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है
अगर व्यापारियों को हैंडलिंग की जिम्मेदारी दी जाती है, तो उन्हें मजदूरों के लिए ESI, बीमा और PF लाइसेंस भी लेने होंगे. व्यापारी कहते हैं कि ये लाइसेंस लेने में समय लगता है और इसमें भ्रष्टाचार का जोखिम भी रहता है. सरकार ने हैंडलिंग शुल्क 23 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि अगर असली खर्च इससे ज्यादा हुआ तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा. व्यापारियों के मुताबिक, राजस्थान में पहले से चल रहे सिस्टम को ही बनाए रखना बेहतर रहेगा, क्योंकि नया मॉडल यहां लागू करना मुश्किल है. वहीं, बुधवार को श्रीगंगानगर जिला कलेक्टरेट में गेहूं खरीद की अंतिम तैयारी बैठक हुई. बैठक में व्यापारियों ने पंजाब मॉडल के खिलाफ आपत्तियां उठाईं. मजदूर यूनियनों ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि उनकी चिंताओं को ध्यान में नहीं रखा गया.
राजस्थान में इस दिन से शुरू होगी गेहूं की खरीदी
बता दें कि राजस्था में इस बार सरसों, चना और गेहूं की खरीद 10 मार्च से शुरू हो रही है. इस बार किसानों को MSP से ज्यादा दाम मिलेंगे, क्योंकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने बोनस देने का फैसला किया है. सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने वाले किसानों को प्रति क्विंटल 150 रुपये का बोनस मिलेगा. सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. बोनस मिलते ही किसानों को कुल 2,735 रुपये प्रति क्विंटल मिलेंगे. खास बात यह है कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा में खुद इस बोनस की घोषणा की थी.