उत्तर प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को ज्यादा लाभकारी बनाने के लिए योगी सरकार बागवानी क्षेत्र को तेजी से बढ़ावा दे रही है. एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत किसानों को फल, फूल, सब्जी, मसाला फसलों के साथ-साथ संरक्षित खेती और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है.
सरकार का उद्देश्य है कि किसान पारंपरिक खेती के साथ बागवानी को अपनाकर कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन और बेहतर आमदनी हासिल कर सकें. योजना के तहत पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस, शेडनेट हाउस, हाईटेक नर्सरी, जैविक खेती और पोस्ट हार्वेस्ट सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
संरक्षित खेती पर 50 प्रतिशत तक अनुदान, पॉलीहाउस से बढ़ेगा उत्पादन
बदलते मौसम और बाजार की मांग को देखते हुए संरक्षित खेती किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बन रही है. MIDH योजना के तहत पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस और शेडनेट हाउस जैसी संरचनाओं में फूल और सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है. बाकी सब में 40 प्रतिशत अनुदान है। इसी तरह कोल्ड स्टोरेज में 35 प्रतिशत तक की छूट है. ऑर्गेनिक खेती में 40 से 50 प्रतिशत तक छूट है.
इस सहायता से किसान तापमान, नमी और अन्य परिस्थितियों को नियंत्रित कर गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कर सकते हैं. इससे ऑफ सीजन सब्जियों और फूलों की खेती को भी बढ़ावा मिल रहा है.
फल, सब्जी और मसाला खेती के विस्तार पर सरकार का फोकस
उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों की ओर प्रोत्साहित कर रही है. योजना के तहत नए फल उद्यान लगाने, सब्जी उत्पादन, मसाला फसलों और पुष्प खेती के लिए 40 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है.
केला, आम, करौंदा, ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलों के नए बाग लगाने वाले किसानों को भी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. इन पर 40 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है. इसके अलावा संकर शाकभाजी, गेंदा, ग्लैडियोलस, प्याज, लहसुन और धनिया जैसी फसलों को भी योजना में शामिल किया गया है.
हाईटेक नर्सरी और गुणवत्तापूर्ण पौध उत्पादन को बढ़ावा
बागवानी क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण पौध की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार हाईटेक नर्सरी और पौधशालाओं को प्रोत्साहित कर रही है. छोटी पौधशालाओं की स्थापना और मौजूदा पौधशालाओं के एक्रीडिटेशन पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है.
वहीं बड़ी पौधशालाओं, टिश्यू कल्चर लैब और हाईटेक नर्सरी की स्थापना के लिए 40 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है. इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले पौधे आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे.
पुराने बागों के कायाकल्प और जैविक खेती पर जोर
सरकार केवल नए बाग लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पुराने बागों के पुनर्जीवन पर भी ध्यान दे रही है. पुराने बागों के जीर्णोद्धार, समेकित कीट प्रबंधन (IPM), जैविक खेती और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाने के लिए किसानों को सहायता दी जा रही है.
इसके अलावा ट्रैक्टर, पावर टिलर, नैपसेक स्प्रेयर, इको फ्रेंडली नाइट ट्रैप, मधुमक्खी पालन, हनी बी कॉलोनी, बी हाइव और अन्य उपकरणों पर भी 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है.
पोस्ट हार्वेस्ट सुविधाओं से कम होगा नुकसान
बागवानी फसलों में उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सरकार पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट पर भी विशेष ध्यान दे रही है. किसानों और उद्यमियों को कोल्ड स्टोरेज, कोल्ड रूम, पैक हाउस और राइपनिंग चैंबर जैसी सुविधाएं विकसित करने के लिए 35 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है. इससे किसानों को फसल का बेहतर मूल्य मिलने और बाजार तक पहुंच मजबूत होने की उम्मीद है.
छोटे किसानों और वंचित क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान
योगी सरकार ने छोटे किसानों और अनुसूचित जाति-जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों के लिए विशेष सहायता का प्रावधान किया है. राज्य सेक्टर की औद्यानिक विकास योजना के तहत अधिकतम 0.20 हेक्टेयर भूमि वाले किसानों को 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है.
इसके तहत शाकभाजी और मसाला बीज, पुष्प क्षेत्र विस्तार, मशरूम उत्पादन, कृषि यंत्रीकरण, क्रेट्स और जैव उर्वरक जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.
ऐसे ले सकते हैं योजना का लाभ
बागवानी योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसान अपने जिले के जनपदीय उद्यान अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं. आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक खाते का विवरण, खतौनी और दस रुपए के स्टैंप पेपर सहित निर्धारित दस्तावेज जमा करने होंगे.
सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक और सरकारी सहायता के साथ बागवानी खेती किसानों के लिए आय का मजबूत जरिया बन सकती है और उत्तर प्रदेश को बागवानी उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकती है.