10 साल से डार्क जोन घोषित पर अब तक नहीं उठाया जा सका भूजल स्तर, कई हिस्सों में 300 फीट नीचे पहुंचा पानी
World Water Day 2026 Report: बुंदेलखंड मंगलभूमि फाउंडेशन के प्रमुख रामबाबू तिवारी ने बताया कि भूजल स्तर खतरनाक तरीके से नीचे जा रहा है. तिंदवारी ब्लॉक को 10 साल पहले डार्क जोन घोषित किया गया था और तब से सरकारी कागजों पर जलस्तर उठाने का काम होता रहा पर नतीजे शून्य है. खेत तालाब योजना के नाम पर केवल गढ्ढे नजर आते हैं और इलाके की नदियां सूखकर छोटे नाले में तब्दील हो गई हैं.
देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर खतरनाक स्तर पर नीचे जाते हुए 300 फीट के नीचे चला गया है. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड, हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार और पंजाब के मोगा, संगरूर, दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में भूजल स्तर 300 फीट की गहराई में चला गया है. इन इलाकों को डार्क जोन और रेड जोन घोषित किया जा चुका है. बांदा के तिंदवारी इलाके को 10 साल पहले डार्क जोन घोषित किया गया था और राज्य सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी भूजल स्तर ऊपर नहीं उठाया जा सका है. जबकि, देश के कई हिस्सों में सरकारी सोलर सिंचाई पंप भी पानी नहीं खींच पा रहे हैं और ठूंठ बन गए हैं. यह स्थितियां बताती हैं कि हम गंभीर जल संकट के खतरे में हैं और अगर समय रहते सटीक प्रयास न हुए तो फसलों की सिंचाई के लिए भी धरती से पानी निकाल पाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाएगी.
राज्यवार भूजल स्तर की गहराती जा रही गंभीर स्थिति
देश की राजधानी दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में भूजल स्तर खतरे के निशान से भी नीचे चला गया है. भूजल बोर्ड ने कई इलाकों में भू-जल 300 फीट से भी नीचे जाने की बात कही है और इसके चलते कई क्षेत्र डार्क जोन घोषित किए जा चुके हैं. इसी तरह हरियाणा में गुरुग्राम, फरीदाबाद, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, भिवानी, हिसार के कई गांव रेड और डार्क जोन में डाले जा चुके हैं. कुछ जगहों पर बोरवेल 300 फीट या उससे ज्यादा गहराई तक किए जा रहे हैं. पंजाब के कई जिलों में जलस्तर 150–200 मीटर तक पहुंच चुका है और भविष्य में 300 मीटर से नीचे जाने का खतरा है.
किसान नेता ने गिरते भूजल स्तर को कृषि के लिए खतरनाक बताया
केंद्र सरकार एमएसपी कमेटी के सदस्य और किसान नेता गुणी प्रकाश ने किसान इंडिया को बताया कि हरियाणा में भूजल स्तर साल दर साल नीचे जा रहा है. उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कुछ हिस्सों में 300 फीट नीचे तक पानी चला गया है. उन्होंने कहा कि 1990 के दौरान कुछ फीट पर ही पानी मिल जाता था, लेकिन मानवीय गलतियों और भू-जल का अधिक दोहन भी गिरावट की वजह बन गई है. किसान नेता ने कहा कि देश में 300 फीट से नीचे भूजल स्तर में गिरावट सिर्फ हरियाणा में नहीं देखी जा रही है, बल्कि उत्तर-पश्चिम भारत पंजाब और राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के साथ ही महाराष्ट्र के विदर्भ, तेलंगाना के हैदराबाद समेत कई हिस्सों में भूजल स्तर गंभीर श्रेणी में नीचे चला गया है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति कृषि और पीने के पानी दोनों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है.
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बुंदेलखंड के तालाबों में नहीं बचा पानी.
10 साल से बांदा का इलाका डार्क जोन में
बुंदेलखंड में भूजल स्तर सुधार और जलाशयों को बचाने के लिए काम कर रहे बुंदेलखंड मंगलभूमि फाउंडेशन के प्रमुख रामबाबू तिवारी ने किसान इंडिया को बताया कि उत्तर प्रदेश का भूजल स्तर खतरनाक तरीके से नीचे जा रहा है और बुंदेलखंड में जलस्तर की स्थिति बेहद खराब है. उन्होंने कहा कि बांदा जिले के तिंदवारी ब्लॉक को 10 साल पहले डार्क जोन घोषित किया गया था और तब से सरकारी कागजों पर जलस्तर उठाने का काम होता रहा पर नतीजे शून्य है. तिंदवारी ब्लॉक डार्क जोन में हैं और यहां ट्यूबवेल या बोरवेल लगाना प्रतिबंधित हैं.
उन्होंने बताया कि बांदा जिले के बबेरू में 246 फीट से भी नीचे पानी चला गया है. यहां कुछ हिस्सों में तो 300 फीट तक भी पानी नीचे चला गया है. उन्होंने कहा कि आमतौर पर पेयजल नल का पानी खींचने की क्षमता 140-142 फीट की गहराई तक ही है. लेकिन पानी 246 फीट नीचे होने की वजह से नल भी ठूंठ बनकर रह गए हैं. उन्होंने बताया कि सरकारी योजना वाले सोलर सिंचाई पंप भी काम नहीं कर रहे हैं. इन पंपों की पानी खींचने की क्षमता 120-150 फीट तक ही है.
भूजल स्तर उठने का दावा पर आंकड़ों के नाम पर सन्नाटा
बुंदेलखंड में वॉटर हीरोज के नाम से मशहूर रामबाबू तिवारी ने बताया कि वह कई सालों से तालाबों, कुओं और नए जलाशयों के निर्माण और बचाव के साथ ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे हैं और उनके संगठन के दर्जनों युवा इस काम में लगे हुए हैं. उन्होंने चिंता जताई कि भूजल बोर्ड बांदा की ओर से बीते 10 साल भूजल स्तर के आंकड़े भी अपडेट नहीं किए गए हैं. अधिकारियों से बात करने पर वह बढ़ने का दावा करते हैं पर आंकड़े या कागज पर प्रमाण देने से बचते हैं. उन्होंने इस स्थिति पर चिंता जताई है.
रामबाबू तिवारी (कुर्ता-जींस में ) अपने संगठन के जरिए पानी चौपाल लगाकर ग्रामीणों को जागरूक कर रहे हैं.
प्रशासन की कोशिशों पर राष्ट्रपति अवॉर्ड तो मिला पर चिंता अभी भी वही
उन्होंने कहा कि सभी जिलाधिकारी पानी बचाने का काम कर रहे हैं. कुआं, तालाब बचाया जा रहा है. बांदा जिले के डीएम हीरालाल ने कुआं तालाब जियाओ अभियान 2019 में चलाया था. उसके बाद अमित बंसल जिलाधिकारी बने और उन्होंने भी कोशिश की है. बाद में डीएम अनुराग पटेल ने 2022-23 में पानी बचाने के लिए तालाब बनाने की कोशिशें कीं. रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट शुरू किए गए. बांदा की जिलाधिकारी रहीं दुर्गाशक्ति नागपाल को पानी बचाने के लिए कुआं तालाब संरक्षण के प्रयासों के लिए राष्ट्रपति से अवॉर्ड भी मिला है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में पर्यावरण को लेकर जिला प्रशासन तेजी से काम किया जा रहा है. जिले के डीएम पानी बचाने के लिए कुआं तालाब बचाने की कोशिशें करते रहे और भूमि संरक्षण विभाग की ओर से खेत तालाब योजना भी चलाई गई लेकिन भूजल स्तर ऊपर आने के सकारात्मक नतीजे नहीं दिखे हैं.
खेत तालाब योजना के नाम पर गढ्ढे, नदियों का पानी सूखा
रामबाबू तिवारी ने बताया कि भूमि संरक्षण विभाग की ओर से खेत तालाब योजना का काम करके खानापूर्ति की जा रही है. किसान वेस्टलैंड पर तालाब बनवाता है. खेत-तालाब इलाके में महज गड्ढे बनकर रह गए हैं. उन्होंने कहा कि इलाकों की नदियां पथरीली हैं और इसके चलते धरती को अपने पानी से रीचार्ज करने का काम नहीं करती हैं. केन, मंदाकिनी, चंद्रावल समेत अन्य नदियों में मध्य प्रदेश के पहाड़ों से पानी आता है जो सीधे बहकर यमुना में चला जाता है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में ज्यादातर नदियां या तो सूख गई हैं या बहुत कम पानी बचा है, जिससे वह नाले की तरह दिखती हैं.
वर्तमान में ज्यादातर नदियां या तो सूख गई हैं या बहुत कम पानी बचा है.
भूजल स्तर उठाने के उपाय क्या हैं
रामबाबू तिवारी ने कहा कि वह अपने संगठन के जरिए युवाओं को शामिल कर ग्रामीणों में पानी संरक्षण, कुआं तालाब पुनर्जीवन और निर्माण कार्य करा रहे हैं. लोगों में जागरूक बढ़ रही है. उन्होंने चिंता जताते हुए बताया कि बांदा जिले में आश्चर्यजनक तरीके से धान का खेती का रकबा बढ़ा है. इससे भूजल का दोहन भी बढ़ा है. धान में पानी की खपत ज्यादा होती है. जो भूजल स्तर को नीचे ले जाने में मददगार होता है. उन्होंने कहा कि भूजल स्तर उठाने के लिए हमें कई मोर्चों पर काम करना होगा. उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड का इलाका मिलेट्स फसलों के लिए मशहूर रहा है और यह फसलें बेहद कम पानी में उग जाती हैं. उन्होंने कहा कि यहां का कठिया गेहूं नाममात्र पानी में हो जाता है. इसलिए हमें ऐसी ही अनुकूल फसलों को उगाना होगा. इसके साथ ही इलाके की धरती का पानी दोहन घटाने के लिए प्राकृतिक खेती करनी होगी.