Railway CAG Report: रेलवे को देश की लाइफलाइन कहा जाता है, लेकिन यात्रियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 12 अगस्त को संसद में पेश CAG की ऑडिट रिपोर्ट में रेलवे के गैर-उपनगरीय स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं और साफ-सफाई की स्थिति की पड़ताल की गई. रिपोर्ट में कई स्टेशनों के पीने के पानी में सेहत के लिए खतरनाक E-Coli जैसे बैक्टीरिया पाए गए. शौचालयों और साफ-सफाई की व्यवस्था में भी कई जगह गंभीर कमियां सामने आई हैं.
512 में से 458 स्टेशन तय मानकों पर फेल
CAG ने देशभर के 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों का ऑडिट किया. इनमें से 458 स्टेशन यानी करीब 89 फीसदी से ज्यादा स्टेशन न्यूनतम जरूरी सुविधाओं (Minimum Essential Amenities) के तय मानकों पर खरे नहीं उतरे. इन स्टेशनों पर यात्रियों के लिए पीने का पानी, बैठने की जगह, शौचालय, पंखे, प्लेटफॉर्म शेड और इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड जैसी जरूरी सुविधाओं की कमी पाई गई. कुछ जगह सुविधाएं मौजूद थीं, लेकिन यात्रियों की संख्या के हिसाब से पर्याप्त नहीं थीं. इसका मतलब है कि रेलवे के कई स्टेशनों पर यात्रियों को रोजमर्रा की जरूरी सुविधाओं के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
वाटर कूलर के पानी में मिला E-Coli
रिपोर्ट का सबसे गंभीर हिस्सा रेलवे स्टेशनों पर पीने के पानी की क्वालिटी से जुड़ा है. CAG के मुताबिक, 6 रेलवे जोनों के 59 स्टेशनों पर पीने के पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच ही नहीं कराई गई. जिन जगहों पर पानी के सैंपल लिए गए, वहां कई स्टेशनों के वाटर कूलर के पानी में E-Coli बैक्टीरिया मिला. इनमें मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावाला जैसे स्टेशन शामिल हैं.
इसके अलावा कोयंबटूर, पलक्काड जंक्शन, हैदराबाद और मधुपुर स्टेशन के पानी में भी बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आई. रिपोर्ट के मुताबिक, 2022-23 में 49 स्टेशनों और 2023-24 में 56 स्टेशनों के नलों से लिए गए पानी के नमूनों में टोटल कोलीफॉर्म (Total Coliforms) पाए गए. इनमें E-Coli भी शामिल होता है.
बड़े और प्रीमियम स्टेशन भी सवालों के घेरे में
यह समस्या सिर्फ छोटे स्टेशनों तक सीमित नहीं है. CAG रिपोर्ट में बताया गया है कि NSG-1 श्रेणी के बड़े और महत्वपूर्ण स्टेशन भी कई जरूरी सुविधाओं के मामले में पीछे पाए गए. नई दिल्ली, CSMT, हावड़ा, सियालदह और मुंबई सेंट्रल जैसे बड़े स्टेशनों पर भी यूरिनल, शौचालय, डस्टबिन, पानी के नल और साइन बोर्ड जैसी सुविधाओं में कमियां मिलीं. रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में निर्देश दिया था कि 31 अगस्त 2018 तक सभी स्टेशनों पर न्यूनतम जरूरी सुविधाओं उपलब्ध कराई जाएं. इसके बावजूद कई साल बाद भी बड़ी संख्या में स्टेशन इन मानकों को पूरा नहीं कर पाए हैं.
E-Coli बैक्टीरिया से क्या नुकसान हो सकता है?
E-Coli बैक्टीरिया वाला दूषित पानी पीने से सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है. इससे दस्त, पेट में दर्द या ऐंठन, उल्टी, मितली और बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कुछ तरह के E-Coli संक्रमण ज्यादा गंभीर हो सकते हैं और उनमें खूनी दस्त भी हो सकते हैं. छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में गंभीर संक्रमण का खतरा ज्यादा हो सकता है. इसलिए पीने के पानी की नियमित जांच और साफ-सफाई बेहद जरूरी है.
CAG ने रेलवे को दिए सुधार के सुझाव
CAG ने रेलवे मंत्रालय को पानी की सप्लाई और उसकी जांच व्यवस्था को मजबूत करने की सलाह दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जल आपूर्ति से जुड़े निरीक्षण के तय नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए. इसके अलावा सभी स्टेशनों पर एकसमान पेयजल गुणवत्ता निगरानी प्रोटोकॉल (Uniform Drinking Water Quality Protocol) के तहत नियमित और व्यापक जांच कराने की जरूरत बताई गई है. इससे पानी में मौजूद बैक्टीरिया और दूसरी गड़बड़ियों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा.