Public Examination Bill 2026: देश में पेपर लीक की घटनाओं और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. लोकसभा ने बुधवार (29 जुलाई) को पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को वॉयस वोट (ध्वनिमत) से पारित कर दिया. लोकसभा ने को इस विधेयक को बिना वोटों की गिनती कराए, सदन की सहमति से पास कर दिया. अब यह विधेयक राज्यसभा की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. अगर वहां भी इसे मंजूरी मिल जाती है, तो देशभर में पेपर लीक के मामलों में और सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा.
क्या है इस नए संशोधन का उद्देश्य?
सरकार का कहना है कि, सरकारी भर्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है. पिछले कुछ सालों में कई परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ. इन्हीं घटनाओं को ध्यान में रखते हुए मौजूदा कानून को और मजबूत बनाने के लिए यह संशोधन लाया गया है. सरकार का दावा है कि इससे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और नकल व पेपर लीक करने वाले गिरोहों पर सख्त कार्रवाई हो सकेगी.
अब हर राज्य में बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट
नए विधेयक में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि हर राज्य में पेपर लीक के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रस्ताव रखा गया है. इन अदालतों में केवल पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई होगी. साथ ही जांच एजेंसियों को दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगा.
सजा और जुर्माना पहले से होगा कहीं ज्यादा
संशोधन विधेयक में दोषियों के लिए सजा और आर्थिक दंड दोनों को काफी सख्त किया गया है. अगर कोई व्यक्ति पेपर लीक का दोषी पाया जाता है, तो उसे 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. वहीं अगर किसी संगठित गिरोह की भूमिका सामने आती है, तो उस पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. सरकार का मानना है कि इससे पेपर लीक कराने वाले संगठित नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगेगी.
सरकार ने क्या कहा?
लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह संशोधन सरकार की उस सोच को दिखाता है, जिसमें समय-समय पर मिले अनुभवों के आधार पर कानून को और मजबूत किया जाता है. उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने यह भी कहा कि नीट पेपर लीक मामले में सरकार ने तुरंत कार्रवाई की थी और आगे भी ऐसी घटनाओं पर सख्त रुख अपनाया जाएगा.
2024 के बाद क्या रहे आंकड़े?
लोकसभा में सरकार ने बताया कि 2024 में एंटी पेपर लीक कानून लागू होने के बाद अब तक 52 एफआईआर दर्ज की गई हैं. सरकार का यह भी दावा है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों के कारण छात्रों में होने वाली आत्महत्या की घटनाओं में कमी आई है. इसे सरकार ने कानून के सकारात्मक असर का संकेत बताया.
लोकसभा से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा. वहां मंजूरी मिलने के बाद यह कानून पूरे देश में लागू होगा. सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा और मजबूत होगा. वहीं, पेपर लीक जैसे अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ पहले से कहीं ज्यादा सख्त कार्रवाई की जा सकेगी.