दिल्ली में प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने और सब्सिडी दर पर बिक्री के लिए महाराष्ट्र से प्याज मंगाई गई है. कांदा एक्सप्रेस के जरिए 453 टन की दूसरी खेप आज शुक्रवार को दिल्ली पहुंच गई है. इस बीच प्याज की खराब क्वालिटी को लेकर आरोप लगाए गए हैं, जिसपर उपभोक्ता मामले विभाग ने जवाब दिया है और ऐसे आरोपों को निराधार बताते हुए प्याज की बेहतर क्वालिटी का दावा किया है. बता दें कि दो दिन से ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं, जिसमें खराब क्वालिटी की प्याज सप्लाई करने के आरोप लगाए गए हैं.
नासिक से 453 टन प्याज लेकर ‘कांदा एक्सप्रेस’ पहुंची दिल्ली
राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के शहरों में आपूर्ति बढ़ाने तथा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए महाराष्ट्र के नासिक से लगभग 453.65 टन प्याज लेकर पहली ‘कांदा एक्सप्रेस’ शुक्रवार को दिल्ली पहुंची. इससे पहले 26 अगस्त को भी महाराष्ट्र से प्याज की खेप मंगाई गई थी. दिल्ली में प्याज की कीमतें 60 रुपये के पार पहुंच गई हैं, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए सरकार ने सहकारी स्टोर्स के जरिए 35 रुपये में प्याज की बिक्री शुरू की है. दिल्ली में 100 स्टोर्स पर 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज की बिक्री की जा रही है.
खराब प्याज क्वालिटी के आरोप बेबुनियाद- उपभोक्ता मामले विभाग
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र के प्याज बफर स्टॉक की गुणवत्ता अच्छी है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्याज की बेहतर भंडारण अवधि पक्की करने के लिए इस साल पहली बार केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) को भंडारण का जिम्मा सौंपा गया था. खरे ने उन खबरों का खंडन किया जिनमें दावा किया गया था कि सरकार द्वारा रखे गए 1.21 लाख टन प्याज बफर स्टॉक का 30 फीसदी हिस्सा सड़ चुका है. उन्होंने पीटीआई को बताया कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है. भंडारित प्याज की गुणवत्ता अच्छी है.
प्याज में 90 फीसदी पानी, जो हर महीने थोड़ा सिकुड़ती है
उपभोक्ता मामलों की सचिव ने कहा कि पिछले वर्षों में प्याज का बफर स्टॉक व्यापारियों के पास रखा जाता था. लेकिन, इस बार प्याज के भंडारण की जिम्मेदारी केंद्रीय भंडारण निगम सीडब्ल्यूसी को सौंपी गई है. इस भंडारण की निगरानी के लिए अलग से सरकारी एजेंसी रखी गई है. यहां रखे गए प्याज की क्वालिटी सही है. प्याज भंडारण के पीछे के विज्ञान को समझाते हुए खरे ने कहा कि प्याज में 90 फीसदी पानी होता है और कटाई के बाद यह तीन महीने तक अपनी गुणवत्ता बनाए रखती है, जिसके बाद पानी के भाप बनने के चलते यह हर महीने सिकुड़ती जाती है. उन्होंने कहा कि खराब होने की सीमा भंडारण की स्थिति और हवा की आवाजाही पर निर्भर करती है.
स्टॉक में रखी प्याज की रिकवरी इस बार सबसे ज्यादा
उन्होंने कहा कि हालांकि कुछ प्याज मई में खरीदा गया था, लेकिन बफर स्टॉक का बड़ा हिस्सा जून-जुलाई में खरीदा गया था, यही वजह है कि गुणवत्ता अच्छी बनी हुई है. उन्होंने आगे कहा कि इस साल प्याज की रिकवरी 72 फीसदी रहने का अनुमान है, जो 2022 में 49 फीसदी , 2023 में 54 फीसदी और 2024 में 63 फीसदी थी. उन्होंने कहा कि प्याज की खरीद नैफेड और एनसीसीएफ जैसी एजेंसियों के माध्यम से की जाती है.
प्याज पर अल नीनो का डर नहीं
खरे ने कहा कि अल नीनो का डर अब खत्म होने के साथ खरीफ प्याज की फसल की संभावनाएं भी आशाजनक हैं. उन्होंने रबी प्याज की फसल पर अल नीनो के प्रभाव को लेकर चिंताओं को दूर करते हुए कहा कि सिंचाई में सुधार हुआ है और प्रमुख जलाशयों में जल स्तर बेहतर बना हुआ है. उन्होंने कहा कि आगामी प्याज का उत्पादन रहने वाला है. ऐसे में प्याज की उपलब्धता की कहीं कोई दिक्कत नहीं होने वाली है.