कच्छ की फ्लेमिंगो सिटी के दीवाने हुए पीएम मोदी, लाखों पक्षियों को बताया ‘लाखा जी के बाराती’

मन की बात में पीएम मोदी ने कच्छ की फ्लेमिंगो सिटी का जिक्र कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया. लाखों प्रवासी पक्षियों का यहां आना प्राकृतिक संतुलन का संकेत बताया गया. उन्होंने लोगों से अपील की कि प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सभी मिलकर प्रयास करें और जिम्मेदारी निभाएं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 26 Apr, 2026 | 01:49 PM

Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात के 133वें एपिसोड में देश के पर्यावरण, वन्यजीव और स्थानीय प्रयासों की प्रेरक कहानियां साझा कीं. इस बार उन्होंने गुजरात के कच्छ की फ्लेमिंगो सिटी का खास जिक्र किया, जहां हर साल लाखों फ्लेमिंगो पक्षी आते हैं और पूरे इलाके को गुलाबी रंग में रंग देते हैं. पीएम ने इन पक्षियों को लाखा जी के बाराती बताते हुए प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया और लोगों को पर्यावरण बचाने के लिए प्रेरित किया.

लाखा जी के बाराती क्यों कहलाते हैं ये पक्षी

पीएम मोदी  ने एक दिलचस्प बात भी बताई. उन्होंने कहा कि कच्छ के लोग इन फ्लेमिंगो पक्षियों को प्यार से लाखा जी के बाराती कहते हैं. यह नाम स्थानीय संस्कृति और प्रकृति के बीच गहरे जुड़ाव को दिखाता है. आज ये पक्षी सिर्फ सुंदरता का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देते हैं. मोदी ने कहा कि ये हमें सिखाते हैं कि अगर हम प्रकृति का ध्यान रखें, तो प्रकृति भी हमें खुशियां देती है.

बारिश से बढ़ी रौनक, फ्लेमिंगो का बड़ा संदेश

इस साल अच्छी बारिश के कारण कच्छ क्षेत्र में पानी की भरपूर उपलब्धता हुई, जिससे फ्लेमिंगो पक्षियों  की संख्या में बड़ा इजाफा देखने को मिला. अनुकूल माहौल और पर्याप्त भोजन मिलने से लाखों प्रवासी पक्षी यहां पहुंचे हैं. यह ‘फ्लेमिंगो सिटी’ एक बार फिर गुलाबी रंग में रंग गई है. प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इसे पर्यावरण संतुलन का बड़ा संकेत बताया. उनका कहना है कि स्वच्छ जल, सुरक्षित जमीन और साफ हवा से ही वन्यजीवों का जीवन सुरक्षित रहता है और प्रकृति का संतुलन बना रहता है.

वन्यजीव संरक्षण में बढ़ रही सफलता

पीएम मोदी ने छत्तीसगढ़ से आई एक अच्छी खबर का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि यहां काले हिरण (ब्लैकबक) की संख्या फिर से बढ़ने लगी है. कुछ समय पहले इनकी संख्या काफी कम हो गई थी, लेकिन लगातार प्रयासों से अब ये फिर से खुले मैदानों में घूमते नजर आ रहे हैं. यह वन्यजीव संरक्षण  की दिशा में बड़ी सफलता मानी जा रही है. इसके अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र का भी उदाहरण दिया. यहां फसल कटाई के समय हाथियों और गांव वालों के बीच टकराव का खतरा रहता है. लेकिन अब गज मित्र जैसी पहल शुरू की गई है, जिससे इंसानों और हाथियों के बीच संतुलन बनाया जा रहा है. यह पहल लोगों को जागरूक कर रही है और टकराव को कम करने में मदद कर रही है.

प्रकृति और इंसान के रिश्ते का मजबूत संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में साफ कहा कि देशभर में कई ऐसे प्रयास हो रहे हैं, जो प्रकृति और इंसान के रिश्ते को मजबूत बना रहे हैं. कच्छ की फ्लेमिंगो सिटी हो, पूर्वोत्तर का बांस उद्योग  या छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश की पहल-ये सभी उदाहरण बताते हैं कि जब लोग मिलकर काम करते हैं, तो बड़े बदलाव संभव हैं. उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण में अपनी भूमिका जरूर निभाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रकृति की यह खूबसूरती देखने को मिल सके.

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