कमजोर बारिश ने बढ़ाई टेंशन, देश के 166 बड़े जलाशयों में सामान्य से कम पानी.. खेती पर मंडराया संकट

Reservoir Storage Report: देश में जून महीने में मॉनसून कमजोर रहने की वजह से 166 बड़े जलाशयों का जलस्तर पहली बार सामान्य से नीचे पहुंच गया है. 2 जुलाई तक जल भंडारण पिछले साल और 10 साल के औसत दोनों से कम दर्ज किया गया. हालांकि हाल के दिनों में बारिश बढ़ने से बांधों में पानी आना शुरू हो गया है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 4 Jul, 2026 | 10:30 PM

Water Storage India: देश में मॉनसून की शुरुआत भले ही हो चुकी है, लेकिन जून महीने में बारिश की कमी का असर अब साफ दिखाई देने लगा है. लगातार कमजोर रही बारिश के कारण देश के बड़े जलाशयों (रिजर्वायर) में पानी का स्तर सामान्य से नीचे पहुंच गया है. हालांकि पिछले कुछ दिनों में बारिश ने रफ्तार पकड़ी है और जलाशयों में पानी बढ़ना शुरू हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई और अगस्त में होने वाली बारिश ही तय करेगी कि, इस बार बांध कितने भर पाएंगे.

पहली बार सामान्य से नीचे पहुंचा जल भंडारण

देश के 166 बड़े जलाशयों में पानी का स्तर  इस सीजन में पहली बार सामान्य औसत से नीचे चला गया है. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, 2 जुलाई तक इन जलाशयों में कुल 47.72 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) पानी दर्ज किया गया. पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 78.07 BCM था, जबकि पिछले 10 साल का औसत 48.40 BCM रहा है. यानी इस बार जलाशयों में पानी का भंडारण न सिर्फ पिछले साल से काफी कम है, बल्कि सामान्य स्तर से भी नीचे पहुंच गया है.

कुछ ही दिनों में बदल गई तस्वीर

पिछले सप्ताह तक स्थिति इतनी खराब नहीं थी. तब देश के जलाशयों में पानी का स्तर 10 साल के औसत से करीब 6 फीसदी ज्यादा था. लेकिन जून में लंबे समय तक बारिश कमजोर रहने  की वजह से हालात तेजी से बदले और 2 जुलाई तक जल भंडारण सामान्य से 1 फीसदी नीचे पहुंच गया. हालांकि अब मॉनसून दोबारा सक्रिय हुआ है और कई राज्यों में अच्छी बारिश हो रही है, जिससे उम्मीद जगी है कि आने वाले दिनों में जलाशयों का जलस्तर सुधर सकता है.

जुलाई और अगस्त की बारिश होगी सबसे अहम

एक्सपर्ट का मानना है कि अभी चिंता की जरूरत जरूर है, लेकिन तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है. मॉनसून के सबसे महत्वपूर्ण महीने जुलाई और अगस्त अभी बाकी हैं. अगर इन दो महीनों में अच्छी और लगातार बारिश होती है, तो बड़े बांधों और जलाशयों में पानी की कमी  काफी हद तक पूरी हो सकती है. लेकिन अगर बारिश फिर कमजोर रही, तो सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है.

जून में सामान्य से 33 फीसदी कम हुई बारिश

इस साल 1 जून से 2 जुलाई के बीच पूरे देश में सामान्य के मुकाबले करीब 33 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. हाल के दिनों में कुछ राज्यों में बारिश बढ़ी है, लेकिन इससे पूरे देश की कमी अभी पूरी नहीं हो पाई है. कम बारिश का असर खासतौर  पर उन राज्यों में ज्यादा देखने को मिला है, जहां खेती पूरी तरह मॉनसून पर निर्भर करती है.

अल नीनो भी बढ़ा रहा चिंता

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस साल अल नीनो की स्थिति बनने से मॉनसून कमजोर रहने की आशंका पहले से ही जताई जा रही थी. भारत मौसम विज्ञान विभाग  (IMD) समेत कई मौसम एजेंसियों का अनुमान है कि जुलाई में भी बारिश सामान्य से कम रह सकती है. अगर ऐसा होता है, तो जलाशयों में पानी भरने की रफ्तार धीमी रह सकती है और खरीफ फसलों की सिंचाई पर भी असर पड़ सकता है.

किसानों और आम लोगों पर पड़ सकता है असर

देश के बड़े जलाशय सिर्फ सिंचाई के लिए ही नहीं, बल्कि पीने के पानी और जलविद्युत उत्पादन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं. यदि इनमें पानी सामान्य से कम रहता है, तो इसका असर खेती, बिजली उत्पादन और कई शहरों की जल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है. फिलहाल राहत की बात यह है कि कई राज्यों में मॉनसून फिर सक्रिय हो गया है. अब सभी की नजर जुलाई और अगस्त की बारिश पर टिकी है. यदि इन महीनों में अच्छी बारिश होती है, तो जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है और पानी की कमी की चिंता काफी हद तक दूर हो सकती है.

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Published: 4 Jul, 2026 | 10:30 PM

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