Tip Of The Day: गर्मियों में हरा चारा बन सकता है जहर! ये 5 गलतियां पशुओं के लिए हो सकती है जानलेवा
Dairy Farming: गर्मियों में हरे चारे की सही देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है, क्योंकि तेज गर्मी और पानी की कमी से चारा सूखकर जहरीला भी बन सकता है. KVK के पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, अगर समय-समय पर सिंचाई की जाए, चारे की ताजगी जांची जाए और पशुओं को हमेशा हरा व सुरक्षित चारा दिया जाए, तो न केवल उन्हें बीमारियों से बचाया जा सकता है, बल्कि उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है और दुग्ध उत्पादन भी प्रभावित नहीं होता.

गर्मी बढ़ते ही हरे चारे की उपलब्धता और गुणवत्ता बनाए रखना पशुपालकों के लिए मुश्किल हो जाता है. थोड़ी सी लापरवाही चारे को खराब कर सकती है, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता है.

अत्यधिक गर्मी और पानी की कमी से चारे में ‘साइनोसाइड’ जैसे हानिकारक तत्व बनने लगते हैं. ऐसे चारे का सेवन करने से पशु बीमार पड़ सकते हैं और गंभीर स्थिति में उनकी जान तक जा सकती है.

गर्मियों में चारे की फसल को सूखने से बचाने के लिए नियमित सिंचाई बेहद जरूरी है. हर 7 से 10 दिन में हल्की सिंचाई करने से पौधों में नमी बनी रहती है और विषैले तत्व बनने से रोका जा सकता है.

बरसीम, ज्वार और बाजरा जैसी फसलें गर्मी में जल्दी प्रभावित होती हैं. इनकी पत्तियां सिकुड़ने या सूखने लगें तो तुरंत सिंचाई और देखभाल जरूरी है, वरना चारा नुकसानदेह बन सकता है.

पशुओं को चारा देने से पहले उसकी गुणवत्ता जरूर जांचें. अगर पत्तियां मुड़ी हुई, पीली या सूखी दिखें तो उसे न खिलाएं. हमेशा ताजा और हरा-भरा चारा ही पशुओं के लिए सुरक्षित होता है.

सिर्फ चारा ही नहीं, पशुओं के लिए ठंडी छाया, साफ पानी और संतुलित आहार भी जरूरी है. इससे उनका शरीर तापमान नियंत्रित रहता है, वे स्वस्थ रहते हैं और दूध उत्पादन में भी गिरावट नहीं आती.
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