किसान अलर्ट! सरसों की फसल में सफेद रोली का खतरा… आज ही करें ये उपाय, बचाएं अपनी पैदावार

Sarson Ki Kheti: सरसों के खेत अब पीले होने लगे हैं और किसान उम्मीद लगाए बैठे थे कि इस साल अच्छी पैदावार होगी. लेकिन कटाई से पहले ही सफेद रोली रोग ने चिंता बढ़ा दी है. कई खेतों में यह बीमारी फैल रही है और इसके चलते दाने सिकुड़ रहे हैं या पूरी तरह नष्ट हो रहे हैं. किसान सोच रहे हैं कि आखिर अपनी मेहनत की कमाई कैसे बचाई जाए. ऐसे में समय पर सही जानकारी और उपाय ही फसल को बचा सकते हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 22 Jan, 2026 | 07:44 PM
1 / 6सरसों के पौधों में यह रोग सबसे पहले डंठल और फलियों पर सफेद रंग की पतली परत के रूप में दिखाई देता है. समय के साथ यह परत मोटी होने लगती है और फलियों के अंदर दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते. इसके कारण दाने सिकुड़ जाते हैं या पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित होती हैं.

सरसों के पौधों में यह रोग सबसे पहले डंठल और फलियों पर सफेद रंग की पतली परत के रूप में दिखाई देता है. समय के साथ यह परत मोटी होने लगती है और फलियों के अंदर दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते. इसके कारण दाने सिकुड़ जाते हैं या पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित होती हैं.

2 / 6सफेद रोली रोग की वजह से किसानों की उपज कम हो जाती है. दानों के नष्ट होने से उनकी आमदनी पर भी सीधा असर पड़ता है. अगर समय रहते उपाय नहीं किए गए तो पूरा खेत प्रभावित हो सकता है, जिससे आर्थिक नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है.

सफेद रोली रोग की वजह से किसानों की उपज कम हो जाती है. दानों के नष्ट होने से उनकी आमदनी पर भी सीधा असर पड़ता है. अगर समय रहते उपाय नहीं किए गए तो पूरा खेत प्रभावित हो सकता है, जिससे आर्थिक नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है.

3 / 6एक्सपर्ट के अनुसार, जैसे ही रोग की पहचान हो जाए, किसान तुरंत कार्रवाई करें. जल्दी कदम उठाने से ही रोग के फैलाव को रोका जा सकता है. देर होने पर यह तेजी से पूरे खेत में फैल सकता है और नुकसान बहुत बढ़ सकता है.

एक्सपर्ट के अनुसार, जैसे ही रोग की पहचान हो जाए, किसान तुरंत कार्रवाई करें. जल्दी कदम उठाने से ही रोग के फैलाव को रोका जा सकता है. देर होने पर यह तेजी से पूरे खेत में फैल सकता है और नुकसान बहुत बढ़ सकता है.

4 / 6कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे सुझाई गई फफूंदनाशक दवाओं का सही मात्रा में ही छिड़काव करें. बिना विशेषज्ञ की सलाह के दवा का प्रयोग करना फसल के लिए नुकसानदेह हो सकता है. यह उपाय रोग के नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है.

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे सुझाई गई फफूंदनाशक दवाओं का सही मात्रा में ही छिड़काव करें. बिना विशेषज्ञ की सलाह के दवा का प्रयोग करना फसल के लिए नुकसानदेह हो सकता है. यह उपाय रोग के नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है.

5 / 6किसानों को केवल रासायनिक उपायों पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए. नीम की पत्तियों का धुआं करना, रोगग्रस्त पौधों को खेत से अलग करना, और खेत में हवा का पर्याप्त संचार बनाए रखना भी फसल को रोग से बचाने में मदद करता है. ये उपाय फसल की सुरक्षा के लिए सरल और प्रभावशाली विकल्प हैं.

किसानों को केवल रासायनिक उपायों पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए. नीम की पत्तियों का धुआं करना, रोगग्रस्त पौधों को खेत से अलग करना, और खेत में हवा का पर्याप्त संचार बनाए रखना भी फसल को रोग से बचाने में मदद करता है. ये उपाय फसल की सुरक्षा के लिए सरल और प्रभावशाली विकल्प हैं.

6 / 6यदि किसी किसान को रोग या किसी अन्य समस्या का संदेह हो तो तुरंत नजदीकी कृषि कार्यालय या कृषि विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए. समय पर सलाह और सही कदम उठाने से फसल को बचाया जा सकता है और संभावित नुकसान से बचाव भी किया जा सकता है. विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और समय रहते सावधानी अपनाएं.

यदि किसी किसान को रोग या किसी अन्य समस्या का संदेह हो तो तुरंत नजदीकी कृषि कार्यालय या कृषि विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए. समय पर सलाह और सही कदम उठाने से फसल को बचाया जा सकता है और संभावित नुकसान से बचाव भी किया जा सकता है. विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और समय रहते सावधानी अपनाएं.

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Published: 22 Jan, 2026 | 07:44 PM

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