दूध की मशीन है ये बकरी! 800 से 1000 लीटर तक दे सकती है दूध, जानें कमाई का पूरा गणित

Saanen Goat Farming Business: अगर आप कम लागत में खेती के साथ एक मजबूत अतिरिक्त कमाई का जरिया ढूंढ रहे हैं, तो सानेन नस्ल की बकरी पालन आपके लिए एक शानदार विकल्प बन सकता है. इसे “दूध की रानी” भी कहा जाता है, क्योंकि यह सामान्य बकरियों की तुलना में कई गुना ज्यादा दूध देती है और किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है. आज देश के कई हिस्सों में किसान इसे अपनाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 23 May, 2026 | 11:30 PM
1 / 6सानेन नस्ल की बकरी किसानों के लिए पारंपरिक खेती के साथ अतिरिक्त आय का एक बहुत अच्छा और लाभकारी विकल्प बनकर उभरी है, क्योंकि यह कम लागत में अच्छा मुनाफा देती है.

सानेन नस्ल की बकरी किसानों के लिए पारंपरिक खेती के साथ अतिरिक्त आय का एक बहुत अच्छा और लाभकारी विकल्प बनकर उभरी है, क्योंकि यह कम लागत में अच्छा मुनाफा देती है.

2 / 6यह बकरी दूध उत्पादन के मामले में काफी उन्नत मानी जाती है और सामान्य बकरियों की तुलना में कहीं अधिक, यानी रोजाना लगभग 5 से 7 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है.

यह बकरी दूध उत्पादन के मामले में काफी उन्नत मानी जाती है और सामान्य बकरियों की तुलना में कहीं अधिक, यानी रोजाना लगभग 5 से 7 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है.

3 / 6एक लैक्टेशन पीरियड (लगभग 250 से 300 दिन) में यह करीब 800 से 1000 लीटर तक दूध दे सकती है, जिससे किसानों को लगातार अच्छी आमदनी मिलती है.

एक लैक्टेशन पीरियड (लगभग 250 से 300 दिन) में यह करीब 800 से 1000 लीटर तक दूध दे सकती है, जिससे किसानों को लगातार अच्छी आमदनी मिलती है.

4 / 6इसके दूध में 3 से 4 प्रतिशत तक वसा पाई जाती है, जिसकी वजह से बाजार में इसकी मांग और कीमत दोनों अच्छी रहती हैं.

इसके दूध में 3 से 4 प्रतिशत तक वसा पाई जाती है, जिसकी वजह से बाजार में इसकी मांग और कीमत दोनों अच्छी रहती हैं.

5 / 6दूध के अलावा इसका मांस भी किसानों के लिए कमाई का एक अतिरिक्त स्रोत है, जिसमें प्रोटीन अधिक होता है और बाजार में इसे अच्छी कीमत मिलती है.

दूध के अलावा इसका मांस भी किसानों के लिए कमाई का एक अतिरिक्त स्रोत है, जिसमें प्रोटीन अधिक होता है और बाजार में इसे अच्छी कीमत मिलती है.

6 / 6यह नस्ल ठंडे इलाकों की होने के बावजूद भारत के कई राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में सफलतापूर्वक पाली जा रही है और किसानों की आय बढ़ा रही है.

यह नस्ल ठंडे इलाकों की होने के बावजूद भारत के कई राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में सफलतापूर्वक पाली जा रही है और किसानों की आय बढ़ा रही है.

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Published: 23 May, 2026 | 11:30 PM

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