Sawan Somwar: 10 अगस्त को बन रहा अद्भुत संयोग! सुबह कामिका एकादशी पारण, शाम को सोम प्रदोष, जानें मुहूर्त

Sawan Somvar Vrat: 10 अगस्त का सावन सोमवार इस बार बेहद खास होने वाला है. इस दिन सुबह कामिका एकादशी के व्रत का पारण होगा, जबकि शाम को सोम प्रदोष व्रत रखा जाएगा. यानी एक ही दिन सुबह भगवान विष्णु और शाम को भगवान शिव की पूजा का विशेष संयोग बन रहा है. जानिए इस दिन से जुड़ी 6 खास बातें और पूजा के जरूरी समय.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 10 Aug, 2026 | 06:00 AM
1 / 610 अगस्त को सावन का दूसरा सोमवार है. इसी दिन त्रयोदशी तिथि पड़ने के कारण सोम प्रदोष व्रत भी रखा जाएगा. सावन सोमवार और प्रदोष का एक साथ आना धार्मिक रूप से विशेष माना जाता है.

10 अगस्त को सावन का दूसरा सोमवार है. इसी दिन त्रयोदशी तिथि पड़ने के कारण सोम प्रदोष व्रत भी रखा जाएगा. सावन सोमवार और प्रदोष का एक साथ आना धार्मिक रूप से विशेष माना जाता है.

2 / 6कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त को रखा गया था. इसका पारण 10 अगस्त की सुबह 5:37 बजे से 8:00 बजे तक किया जा सकता है. पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा और तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा है.

कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त को रखा गया था. इसका पारण 10 अगस्त की सुबह 5:37 बजे से 8:00 बजे तक किया जा सकता है. पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा और तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा है.

3 / 610 अगस्त को सुबह करीब 8 बजे त्रयोदशी तिथि शुरू होगी. सोमवार के दिन त्रयोदशी पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष कहा जाएगा. यह तिथि 11 अगस्त की सुबह करीब 4:54 बजे तक रहेगी.

10 अगस्त को सुबह करीब 8 बजे त्रयोदशी तिथि शुरू होगी. सोमवार के दिन त्रयोदशी पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष कहा जाएगा. यह तिथि 11 अगस्त की सुबह करीब 4:54 बजे तक रहेगी.

4 / 6सोम प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में की जाती है. रुद्रप्रयाग-ऋषिकेश क्षेत्र के पंचांग के अनुसार पूजा का समय करीब शाम 7:03 बजे से रात 9:11 बजे तक रहेगा. शहर के हिसाब से समय में थोड़ा अंतर हो सकता है.

सोम प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में की जाती है. रुद्रप्रयाग-ऋषिकेश क्षेत्र के पंचांग के अनुसार पूजा का समय करीब शाम 7:03 बजे से रात 9:11 बजे तक रहेगा. शहर के हिसाब से समय में थोड़ा अंतर हो सकता है.

5 / 6प्रदोष काल में भगवान शिव का जल या गंगाजल से अभिषेक किया जा सकता है. इसके बाद दूध, दही, शहद आदि से अभिषेक और बेलपत्र, सफेद फूल व धतूरा अर्पित करने की परंपरा है. पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप भी किया जा सकता है.

प्रदोष काल में भगवान शिव का जल या गंगाजल से अभिषेक किया जा सकता है. इसके बाद दूध, दही, शहद आदि से अभिषेक और बेलपत्र, सफेद फूल व धतूरा अर्पित करने की परंपरा है. पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप भी किया जा सकता है.

6 / 610 अगस्त को श्रद्धालुओं को सुबह कामिका एकादशी का पारण कर भगवान विष्णु की पूजा करने और शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना करने का अवसर मिलेगा. इस तरह एक ही दिन दो महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं का संयोग बन रहा है.

10 अगस्त को श्रद्धालुओं को सुबह कामिका एकादशी का पारण कर भगवान विष्णु की पूजा करने और शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना करने का अवसर मिलेगा. इस तरह एक ही दिन दो महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं का संयोग बन रहा है.

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Published: 10 Aug, 2026 | 06:00 AM

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