छत पर सोलर पैनल लगवा रहे हैं? इन आम गलतियों से बचेंगे तो मिलेगा पूरा फायदा

अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि किसी भी छत पर सोलर पैनल आसानी से लगाए जा सकते हैं. जबकि सच्चाई यह है कि हर छत इस काम के लिए उपयुक्त नहीं होती. सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि छत पैनलों का वजन सहन कर सकती है या नहीं.

नई दिल्ली | Published: 28 Feb, 2026 | 01:31 PM

Solar panel installation mistakes: आज के समय में बिजली के बढ़ते बिल और पर्यावरण की चिंता ने लोगों को सोलर ऊर्जा की ओर तेजी से आकर्षित किया है. छत पर सोलर पैनल लगाना अब सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि समझदारी भरा निवेश माना जा रहा है. इससे न सिर्फ बिजली का खर्च घटता है, बल्कि लंबे समय तक स्थिर और स्वच्छ ऊर्जा भी मिलती है.

लेकिन कई बार लोग जल्दीबाजी या अधूरी जानकारी के कारण ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनकी वजह से सोलर सिस्टम से उम्मीद के मुताबिक फायदा नहीं मिल पाता. सही योजना और तकनीकी समझ के बिना लगाया गया सिस्टम कम बिजली बना सकता है, जल्दी खराब हो सकता है या सुरक्षा के लिहाज से भी जोखिम भरा हो सकता है. आइए समझते हैं कि छत पर सोलर पैनल लगाते समय किन बड़ी गलतियों से बचना चाहिए.

छत की मजबूती और दिशा को नजरअंदाज करना

अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि किसी भी छत पर सोलर पैनल आसानी से लगाए जा सकते हैं. जबकि सच्चाई यह है कि हर छत इस काम के लिए उपयुक्त नहीं होती. सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि छत पैनलों का वजन सहन कर सकती है या नहीं. पुरानी या कमजोर छत पर सीधे पैनल लगा देना भविष्य में दरार, लीकेज या ढांचे की समस्या पैदा कर सकता है.

इसके अलावा छत की दिशा और ढलान भी बहुत मायने रखती है. जिस दिशा में ज्यादा समय तक धूप आती है, वहां पैनल लगाने से ज्यादा बिजली उत्पादन होता है. अगर छत पर दिनभर पेड़, टंकी या आसपास की इमारतों की छाया पड़ती है तो सिस्टम की क्षमता घट सकती है.

स्थानीय मौसम और धूप के पैटर्न को समझे बिना फैसला लेना

भारत के अलग-अलग राज्यों में मौसम अलग होता है. कहीं तेज गर्मी रहती है, कहीं लंबे समय तक बादल और बारिश होती है. अगर आप ऐसे क्षेत्र में रहते हैं जहां मानसून लंबा चलता है, तो साल के कुछ महीनों में बिजली उत्पादन कम हो सकता है. वहीं बहुत गर्म इलाकों में ज्यादा तापमान के कारण पैनलों की दक्षता थोड़ी घट सकती है. इसलिए सोलर सिस्टम लगाने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपके इलाके में सालभर धूप की स्थिति कैसी रहती है. सही गणना से यह तय किया जा सकता है कि कितनी क्षमता का सिस्टम आपके लिए बेहतर रहेगा.

गलत प्रकार के सोलर पैनल चुन लेना

बाजार में अलग-अलग तरह के सोलर पैनल मिलते हैं. हर पैनल की अपनी खासियत होती है. कुछ पैनल कम जगह में ज्यादा बिजली बनाते हैं, जबकि कुछ बजट में सस्ते होते हैं लेकिन उनकी दक्षता थोड़ी कम होती है.

अगर आपकी छत छोटी है और बिजली की जरूरत ज्यादा है, तो ज्यादा दक्षता वाले पैनल बेहतर रहेंगे. वहीं यदि बजट सीमित है और जगह पर्याप्त है, तो दूसरा विकल्प चुना जा सकता है. गलत चुनाव करने से या तो जरूरत से कम बिजली मिलेगी या अनावश्यक ज्यादा खर्च हो जाएगा.

इन्वर्टर की गुणवत्ता पर ध्यान न देना

सोलर सिस्टम में इन्वर्टर बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. पैनल जो डीसी बिजली बनाते हैं, उसे घर में इस्तेमाल योग्य एसी बिजली में बदलने का काम इन्वर्टर करता है. अगर इन्वर्टर अच्छी गुणवत्ता का नहीं है या पैनलों के साथ सही तरीके से मेल नहीं खाता, तो सिस्टम का प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है. सस्ता और घटिया इन्वर्टर बार-बार खराब हो सकता है, जिससे मेंटेनेंस खर्च बढ़ेगा और बिजली उत्पादन भी प्रभावित होगा.

सिस्टम का सही आकार तय न करना

कई लोग पैसे बचाने के लिए जरूरत से छोटा सिस्टम लगवा लेते हैं. बाद में जब बिजली की खपत बढ़ती है, तो सिस्टम पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पाता. घर में भविष्य में एसी, मोटर या अन्य उपकरण जोड़ने की योजना है तो पहले से ही उसकी गणना कर लेनी चाहिए. सही क्षमता का सिस्टम चुनने से बार-बार अपग्रेड की जरूरत नहीं पड़ेगी और निवेश का पूरा लाभ मिलेगा.

पैनलों का गलत एंगल और गलत जगह पर इंस्टॉलेशन

सोलर पैनल किस कोण पर लगाए जाएं, यह बहुत महत्वपूर्ण है. अलग-अलग राज्यों में आदर्श झुकाव अलग हो सकता है. अगर पैनल बहुत सपाट या बहुत ज्यादा झुके हुए लगाए गए हैं तो धूप का पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा. इसके अलावा पैनलों के बीच पर्याप्त दूरी और हवा का प्रवाह भी जरूरी है. गलत तरीके से लगाए गए पैनल गर्म होकर कम उत्पादन कर सकते हैं.

अनुभवहीन इंस्टॉलर चुन लेना

सोलर सिस्टम की सफलता काफी हद तक इंस्टॉलेशन पर निर्भर करती है. अगर इंस्टॉलर प्रशिक्षित और प्रमाणित नहीं है, तो वायरिंग, माउंटिंग या कनेक्शन में गलती हो सकती है. बहुत सस्ते दाम का लालच कई बार महंगा साबित होता है. अधूरी जानकारी, अस्पष्ट शर्तें या बिना गारंटी के काम करने वाले ठेकेदार से बचना चाहिए. विश्वसनीय कंपनी और अनुभवी तकनीशियन से काम करवाने पर सिस्टम लंबे समय तक सुरक्षित और कुशलता से चलता है.

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