गन्ना और संतरे की खेती में एआई का इस्तेमाल कर रहे किसान, कीट रोकथाम और उत्पादन बढ़ाने में कामयाबी

AI Use in Agriculture: एआई से किसानों को मौसम का सटीक पूर्वानुमान, फसलों में रोग और कीटों की समय रहते पहचान, मिट्टी का विश्लेषण, सिंचाई और उर्वरकों का सही प्रबंधन, उत्पादन का अनुमान तथा बाजार भाव की जानकारी आसानी से मिल रही है.

Kisan India
नोएडा | Published: 20 Jul, 2026 | 02:49 PM

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को खेती में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि इससे पानी और खाद के इस्तेमाल को कम करने में मदद मिल सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि विदर्भ क्षेत्र के हजारों किसानों की गन्ने और संतरे की खेती में एआई का इस्तेमाल करने में मदद करने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं. एआई की मदद से किसानों को मौसम का सटीक पूर्वानुमान, फसलों में रोग और कीटों की समय रहते पहचान, मिट्टी का विश्लेषण, सिंचाई और उर्वरकों का सही प्रबंधन, उत्पादन का अनुमान तथा बाजार भाव की जानकारी आसानी से

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने नागपुर में एक कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि खेती में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के इस्तेमाल से पानी की खपत और खाद का खर्च कम होता है. इसके साथ ही फसलों को प्रभावित करने वाली बीमारियों का पहले ही पता लगाने में मदद मिलती है. इसलिए किसानों को खेती में एआई और ड्रोन का इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षित करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकारी, निजी संस्थाएं काम कर रही हैं.

6 हजार किसान एआई का इस्तेमाल कर रहे

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि एग्रोविजन फाउंडेशन इस इलाके में कम से कम 1,000 संतरा किसानों और 5,000 गन्ना उत्पादकों को एआई का इस्तेमाल करने में मदद करने के लिए काम कर रहा है. एग्रोविजन फाउंडेशन के वह प्रमुख हैं. उन्होंने कहा कि संगठन किसानों को आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने में मदद कर रहा है.

सरकार और निजी संस्थान एआई टूल्स ला रहे

भारत में खेती में एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है. केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, आईसीएआर, कृषि विज्ञान केंद्र, एग्रीटेक स्टार्टअप और निजी कंपनियां मिलकर लाखों किसानों तक एआई आधारित सेवाएं पहुंचा रही हैं. इनमें मौसम पूर्वानुमान, फसल रोगों की पहचान, सिंचाई प्रबंधन, ड्रोन आधारित निगरानी और खेती संबंधी सलाह जैसी सुविधाएं शामिल हैं. हालांकि, अधिकांश किसान अभी शुरुआती स्तर पर ही एआई आधारित तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं.

एआई से कीट, मिट्टी की जांच और प्रबंधन आसान हुआ

एआई के उपयोग से किसानों को मौसम का सटीक पूर्वानुमान, फसलों में रोग और कीटों की समय रहते पहचान, मिट्टी का विश्लेषण, सिंचाई और उर्वरकों का सही प्रबंधन, उत्पादन का अनुमान तथा बाजार भाव की जानकारी आसानी से मिल रही है. इससे खेती की लागत कम करने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने, फसल नुकसान घटाने और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल रही है. ड्रोन, सेंसर और मोबाइल ऐप के साथ एआई के उपयोग से किसान समय पर बेहतर निर्णय ले पा रहे हैं और आधुनिक खेती को बढ़ावा मिल रहा है.

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