न्यू इयर स्पेशल : मोबाइल के बाद क्या पंचायतें हैं एआई अपनाने को तैयार? खेती में तकनीक का अहम रोल

एआई के आगाज को लेकर भारत में मुकम्मल तैयारियों के क्रम में खेती किसानी से लेकर समूची ग्रामीण व्यवस्था को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है. एक तरफ किसानों को एआई की मदद पहुंचाने में ‘किसान ई मित्र’ नामक नया टूल काम करने लगा है. वहीं दूसरी ओर पंचायती राज सिस्टम को भी एआई की मदद से दुरुस्त किया जाएगा.

नोएडा | Updated On: 1 Jan, 2026 | 03:33 PM

 

विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए सरकार ने कमर कस ली है. इस मंजिल को पाने के लिए सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई को अपना सारथी बनाया है. पूरा सिस्टम, चाहे सरकारी हो या गैर सरकारी, व्यवस्था के हर स्तर पर अब एआई का दखल स्पष्ट रूप से दिखने लगा है. ऐसे में देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन चुका कृषि क्षेत्र भी एआई के प्रभाव से अछूता नहीं है. यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर एआई के प्रभाव को समझने के लिए ही नए साल के मौके पर आगामी फरवरी में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होने जा रहा है. भारत इस सम्मेलन की मेजबानी करेगा.

एआई के आगाज को लेकर भारत में मुकम्मल तैयारियों के क्रम में खेती किसानी से लेकर समूची ग्रामीण व्यवस्था को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है. एक तरफ किसानों को एआई की मदद पहुंचाने में ‘किसान ई मित्र’ नामक नया टूल काम करने लगा है. वहीं दूसरी ओर पंचायती राज सिस्टम को भी एआई की मदद से दुरुस्त किया जाएगा. किसान ई मित्र ऐसा प्रभावी टूल है, जिसकी मदद से किसान अपनी फसल के लिए बीज से लेकर बाजार और खेती में मौसम के प्रभाव तक, हर मुद्दे पर मदद ले सकते हैं. इस कड़ी में नए साल की सौगात के रूप में पंचायती राज के लिए खास तौर से तैयार किए गए एआई आधारित टूल का आगाज पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हो चुका है. सरकार को उम्मीद है कि ‘सभासार’ नामक यह टूल 2026 में पूरे देश की 2.66 लाख ग्राम पंचायतों को अपने दायरे में ले लेगा.

एआई की पंचायतों में पहुंच

पंचायती राज मंत्रालय की ओर से बताया गया कि पूरे देश में पहले से लागू त्रिस्तरीय पंचायती राज प्रणाली में पंचायतों के कामकाज को प्रभावी बनाने के लिए गत 15 अगस्त को एआई आधारित टूल सभासार का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया था. पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले त्रिपुरा सभी 1194 ग्राम पंचायतों में इसका प्रयोग किया गया. इसके शुरुआती चरण में ही त्रिपुरा की 1147 ग्राम पंचायतों के अलावा पूरे देश में कुल 12667 ग्राम पंचायतों ने इस टूल को सफलतापूर्वक अपना कर इसका उपयोग भी कर लिया.

मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक गत 3 दिसंबर तक सभासार टूल को देश की कुल 2,66,940 ग्राम पंचायतों में से 92,376 ग्राम पंचायतों ने एआई की मदद से अपना कामकाज शुरू कर दिया है. मंत्रालय ने इस बात पर संतोष जताया है कि सभासार टूल को अपनाने में देश के सभी 34 राज्यों एवं केंद्र शासित राज्यों ने समान रूप से रुचि दिखाई है. गौरतलब है कि नीति आयोग ने भी अपनी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की विकास दर 8 फीसदी के स्तर से आगे ले जाने में एआई की निर्णायक भूमिका होगी. इसके मद्देनजर ही सरकार ने 8 प्रतिशत से अधिक विकास दर का लक्ष्य पाने में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की अग्रणी भूमिका को सुनिश्चित करने का फैसला किया है. इसके लिए ही ग्राम पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता के साथ तेजी लाने के लिए एआई का सहारा लिया है.

पंचायती राज में एआई का काम

मंत्रालय का दावा है कि पंचायतों के कामकाज में एआई टूल का पिछले 6 महीनों में प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करने में बहुत हद तक कामयाबी मिली है. इस क्रम में सभासार टूल की मदद से ग्राम पंचायतों की बैठक में सदस्यों की हाजिरी दर्ज करने से लेकर बैठक की कार्यवाही के मिनट्स दर्ज करने का काम किया जा रहा है. इतना ही नहीं, बैठक में होने वाली चर्चाओं का प्रारूप हिंदी और अंग्रेजी सहित देश की 13 प्रमुख भाषाओं में वीडियो और ऑडियो फॉर्मेट में दर्ज किया जाता है. बैठक में ग्राम पंचायत के सदस्यों के द्वारा जो कुछ भी बोला जाता है, उसकी हूबहू ट्रांसक्रिप्ट इन 13 में से किसी भी इच्छित भाषा में लिखित रूप में भी दर्ज हो जाती है. ऑडियो, वीडियो या लिखित ट्रांसक्रिप्ट का इस्तेमाल किसी अन्य भाषा भाषी राज्य की पंचायतें कर सकती हैं. इससे पूरे देश की कोई भी पंचायत, किसी दूसरी पंचायत के बेहतर कामों को एक दूसरे से सीख सकती है. इसमें भाषा की बाधा का कोई संकट नहीं होगा.

खेती में एआई

भारत में किसान अपनी उपज को बढ़ाने से लेकर उपज की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए कीट प्रबंधन सहित अन्य मामलों में एआई आधारित टूल किसान ई मित्र चैटबॉट का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसकी मदद से किसान फसलों में लगने वाले 432 तरह के कीट की पहचान कर सकते हैं.

इसी प्रकार जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के दायरे में पहले पायदान पर किसान ही है. एआई की मदद से किसानों को मौसम संबंधी पूर्वानुमान समय से बहुत पहले मिल जाएंगे. इसमें अल नीनो और ला नीना के असर की परिणति के रूप में हीटवेव, चक्रवात और शीतलहर जैसी घटनाओं का दीर्घकालिक प्रभाव से किसानों को पहले ही आगाह कर दिया जाता है. इसके मद्देनजर एआई टूल किसानों को बता देता है कि उन्हें किस इलाके में किस दिन फसल की बुआई करना चाहिए और किस दिन सिंचाई या दवा देना मुनासिब रहेगा. सरकार का दावा है कि एआई की सलाह पर काम करने वाले किसानों को उपज की मात्रा और गुणवत्ता को सुधारने में प्रभावी रूप से मदद मिल रही है.

Published: 1 Jan, 2026 | 03:32 PM

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