खरीफ फसलों पर मंडराया खतरा, 11 साल में सबसे कमजोर मानसून का अनुमान… कई राज्यों में सूखे जैसे हालात

मानसून की शुरुआत को लेकर भी इस बार स्थिति सामान्य नहीं रही है. पहले अनुमान था कि मानसून 26 मई तक केरल पहुंच जाएगा, लेकिन मौसम में आए बदलावों के कारण इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई. अब मौसम विभाग का कहना है कि मानसून अगले सप्ताह केरल तट पर दस्तक दे सकता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 30 May, 2026 | 06:35 AM

IMD monsoon forecast: देशभर के किसानों और आम लोगों के लिए इस बार मानसून को लेकर चिंताजनक खबर सामने आई है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून के अपने ताजा पूर्वानुमान में बारिश का अनुमान घटा दिया है. अब जून से सितंबर के बीच देश में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई गई है. यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो भारत को पिछले 11 वर्षों का सबसे शुष्क मानसून देखने को मिल सकता है.

मौसम विभाग के अनुसार इस बार मानसून दीर्घकालिक औसत (LPA) का केवल 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है. इससे पहले अप्रैल में विभाग ने 92 प्रतिशत बारिश का अनुमान जताया था, लेकिन बदलते मौसमीय हालात और मानसून की धीमी प्रगति को देखते हुए पूर्वानुमान को कम कर दिया गया है.

क्यों महत्वपूर्ण है यह पूर्वानुमान?

भारत की खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है. देश की सालाना बारिश का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान ही प्राप्त होता है. खासकर धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दलहन जैसी खरीफ फसलें मानसून की बारिश पर निर्भर रहती हैं. ऐसे में यदि बारिश सामान्य से कम होती है तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन, जलाशयों के जल स्तर, भूजल भंडार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.

11 साल में सबसे सूखा मानसून हो सकता है

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार यदि इस वर्ष मानसून 90 प्रतिशत के स्तर पर रहता है तो यह 2015 के बाद सबसे कमजोर मानसून होगा. वर्ष 2015 में बारिश दीर्घकालिक औसत का 86 प्रतिशत रही थी, जबकि 2014 में यह 88 प्रतिशत थी. साल 2023 में भी मानसून 92 प्रतिशत रहा था, जिसके कारण देश के एक बड़े हिस्से में लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बनी रही थी. ऐसे में इस बार बारिश और कम होने की आशंका ने चिंताएं बढ़ा दी हैं.

कब पहुंचेगा मानसून?

मानसून की शुरुआत को लेकर भी इस बार स्थिति सामान्य नहीं रही है. पहले अनुमान था कि मानसून 26 मई तक केरल पहुंच जाएगा, लेकिन मौसम में आए बदलावों के कारण इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई. अब मौसम विभाग का कहना है कि मानसून अगले सप्ताह केरल तट पर दस्तक दे सकता है. कुछ मौसम मॉडल यह संकेत दे रहे हैं कि 4 से 5 जून के आसपास मानसून का प्रवेश संभव है. हालांकि शुरुआती दिनों में मानसून की गतिविधियां कमजोर रहने की संभावना है. अनुमान है कि जून के दूसरे सप्ताह में इसकी रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है और बारिश मुख्य रूप से केरल तथा तटीय कर्नाटक तक सीमित रह सकती है.

किन क्षेत्रों में कम होगी बारिश?

मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण भारत, मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. सबसे ज्यादा चिंता मानसून कोर जोन (MCZ) को लेकर जताई गई है. यह वही क्षेत्र है जहां देश की बड़ी आबादी वर्षा आधारित खेती करती है. यदि यहां सामान्य से कम बारिश होती है तो फसल उत्पादन पर व्यापक असर पड़ सकता है.

हालांकि पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य स्तर की बारिश होने का अनुमान है. इसके अलावा दक्षिणी प्रायद्वीप और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में भी कुछ स्थानों पर सामान्य या उससे अधिक वर्षा हो सकती है.

जून में बढ़ सकती है गर्मी

कम बारिश के साथ-साथ मौसम विभाग ने जून महीने में अधिक गर्मी की भी चेतावनी दी है. अधिकतम तापमान देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से ऊपर रह सकता है. मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के कई इलाकों में गर्म और शुष्क मौसम का दौर फिर लौट सकता है. दक्षिण गुजरात, पश्चिमी मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. इसका असर न केवल आम लोगों पर बल्कि खेती और पशुपालन पर भी देखने को मिल सकता है.

किसानों के लिए क्या हैं चुनौतियां?

कम बारिश और अधिक तापमान का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है. यदि समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो बुवाई में देरी हो सकती है. वहीं फसलों की शुरुआती बढ़वार भी प्रभावित हो सकती है. विशेषज्ञ किसानों को मौसम की जानकारी पर लगातार नजर रखने, जल संरक्षण उपाय अपनाने और स्थानीय कृषि विभाग की सलाह के अनुसार खेती की योजना बनाने की सलाह दे रहे हैं.

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Published: 30 May, 2026 | 06:33 AM

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