पाकिस्तान को छोड़ भारत से बासमती खरीद सकता है अफगानिस्तान, दोनों देशों के बीच होगी अहम बैठक

अफगानिस्तान भारत से सीधे बासमती चावल खरीदने की तैयारी में है. अगले महीने दोनों देशों के व्यापारियों की बैठक में लॉजिस्टिक्स, भुगतान और व्यापार व्यवस्था पर चर्चा होगी. पाकिस्तान के साथ तनाव के बीच यह कदम भारत के लिए नया निर्यात बाजार खोल सकता है और अफगानिस्तान को सस्ती व भरोसेमंद आपूर्ति का विकल्प दे सकता है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 29 Jun, 2026 | 07:57 AM

Basmati Export: अफगानिस्तान अब बासमती चावल की खरीद के लिए भारत की ओर रुख कर सकता है. इस दिशा में भारत और अफगानिस्तान के व्यापारियों की अगले महीने एक अहम बैठक होने की संभावना है, जिसमें दोनों देशों के बीच सीधे बासमती चावल के व्यापार को बढ़ाने के तौर-तरीकों पर चर्चा की जाएगी. इससे पहले पिछले सप्ताह दोनों देशों के अधिकारियों के बीच प्रारंभिक बातचीत हुई थी. यह बैठक पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की पहल पर आयोजित की गई थी.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में हर साल करीब 5 लाख टन बासमती चावल की खपत  होती है. अब तक वह अपनी अधिकांश जरूरत पाकिस्तान से पूरी करता रहा है, क्योंकि दोनों देशों के बीच सीधा जमीनी संपर्क है. हालांकि, हाल के दिनों में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के चलते काबुल वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश कर रहा है. ऐसे में भारत से सीधे बासमती चावल आयात करने का विकल्प गंभीरता से देखा जा रहा है.

भारतीय बासमती निर्यातकों को नया बाजार मिलेगा

जानकारों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सीधा व्यापार शुरू होता है, तो इससे भारतीय बासमती निर्यातकों को नया बाजार मिलेगा और अफगानिस्तान को भी चावल की आपूर्ति के लिए एक भरोसेमंद विकल्प उपलब्ध होगा. अफगानिस्तान भारत से सीधे बासमती चावल खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहा है. हाल ही में हुई एक बैठक में नई दिल्ली स्थित अफगान राजनयिक मिशन के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और भारतीय बासमती चावल की खरीद बढ़ाने की इच्छा जताई.

फिलहाल अफगानिस्तान कुछ मात्रा में भारतीय बासमती चावल दुबई और ईरान के व्यापारियों के जरिए खरीदता है. इस वजह से परिवहन और अन्य खर्च बढ़ जाते हैं, जिससे चावल महंगा पड़ता है. बैठक में मौजूद उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अफगान अधिकारियों का मानना है कि भारत से सीधे खरीद करने पर चावल की आपूर्ति सस्ती, तेज और अधिक भरोसेमंद हो सकती है.

अब्बास बंदरगाह के इस्तेमाल करने के विकल्प पर भी चर्चा

दोनों देशों के बीच चावल की आपूर्ति के लिए ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह का इस्तेमाल करने का विकल्प भी चर्चा में है. हालांकि, इसके लिए भारत और अफगानिस्तान की सरकारों के बीच सहमति बनना जरूरी होगा. उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि जुलाई में प्रस्तावित भारतीय निर्यातकों और अफगान आयातकों की बैठक में परिवहन व्यवस्था, भुगतान प्रणाली और संभावित वस्तु विनिमय (बार्टर) व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी.

भारत अफगानिस्तान से बड़ी मात्रा में सूखे मेवे खरीदता है

दिलचस्प बात यह है कि भारत अफगानिस्तान से बड़ी मात्रा में सूखे मेवे (ड्राई फ्रूट्स) आयात करता है. ऐसे में दोनों देशों के बीच चावल और ड्राई फ्रूट्स के बदले व्यापार की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है, जिससे व्यापार को और आसान बनाया जा सके. भारत और अफगानिस्तान के बीच बासमती चावल के सीधे व्यापार की संभावनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन इसके सामने एक बड़ी चुनौती दोनों देशों के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंधों का अभाव है. फिलहाल नई दिल्ली ने काबुल की तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, जिससे व्यापारिक समझौतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

भारत ने कब कितना किया निर्यात

आंकड़ों के अनुसार, अफगानिस्तान को भारत से बासमती चावल का निर्यात अभी तक सीमित स्तर पर ही रहा है. भारत ने पहली बार 2005-06 में अफगानिस्तान को करीब 63 टन बासमती चावल निर्यात किया था. इसके बाद कुछ समय के अंतराल के बाद 2010-11 में निर्यात फिर शुरू हुआ और तब से यह अपेक्षाकृत कम स्तर पर बना हुआ है. अफगानिस्तान को बासमती निर्यात का सबसे अच्छा वर्ष 2020-21 रहा, जब भारत ने 19,440 टन बासमती चावल भेजा था, जिसकी कीमत लगभग 108.9 करोड़ रुपये थी.

वहीं, अप्रैल 2026 में भारत ने अफगानिस्तान को 979 टन बासमती चावल निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत 7.74 करोड़ रुपये रही. इस दौरान बासमती चावल का औसत निर्यात मूल्य करीब 79 रुपये प्रति किलोग्राम रहा.विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भुगतान और परिवहन से जुड़ी समस्याओं का समाधान हो जाता है, तो अफगानिस्तान भारतीय बासमती चावल के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बन सकता है.

कम कीमत मिलने के कारण कुल निर्यात आय घट गई

वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 65.2 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया, जो पिछले वर्ष के 60.7 लाख टन के मुकाबले अधिक रहा. हालांकि, निर्यात बढ़ने के बावजूद कम कीमत मिलने के कारण कुल निर्यात आय घट गई. 2025-26 में बासमती निर्यात से भारत को 5.67 अरब डॉलर की कमाई हुई, जबकि एक साल पहले यह 5.94 अरब डॉलर थी. इस दौरान बासमती का औसत निर्यात मूल्य घटकर करीब 77 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया.

पाकिस्तान ने किया 8 लाख टन बासमती चावल का निर्यात

उद्योग के अनुमान के अनुसार, पाकिस्तान ने 2024-25 में करीब 8 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया था. इसके अलावा, अफगानिस्तान को गैर-बासमती श्रेणी में भेजे जाने वाले चावल में भी काफी मात्रा में सुगंधित किस्मों का मिश्रण शामिल होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत से सीधे आपूर्ति शुरू होने पर अफगानिस्तान को बेहतर गुणवत्ता वाला बासमती चावल प्रतिस्पर्धी कीमतों पर मिल सकता है. वहीं, भारतीय निर्यातकों को भी एक नया और संभावनाओं से भरा बाजार मिलेगा, जिससे बासमती निर्यात को और मजबूती मिल सकती है.

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Published: 29 Jun, 2026 | 07:51 AM

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