Mango Business: महाराष्ट्र में गर्मी ने आम की फसल को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. अधिक गर्मी के चलते पैदावार में भारी गिरावट आई है. इस साल कई किसान के बाग में आम के फल ही नहीं आए हैं. ऐसे में किसानों को नुकसान का भय सता रहा है. अब स्थिति ऐसी हो गई है कि ऑनलाइन किराना कंपनियों के ऑर्डर पूरे करने के लिए कई किसानों को दूसरे किसानों से आम खरीदना पड़ रहा है. उनका कहना है कि अगर वे ग्राहकों को समय पर आम नहीं पहुंचा पाए, तो बड़े खरीदार अगले साल उनसे कारोबार नहीं करेंगे.
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है और 2024-25 में देश में करीब 2.8 करोड़ टन आम का उत्पादन हुआ. हालांकि, महाराष्ट्र अपने प्रसिद्ध अल्फांसो आम के लिए जाना जाता है, लेकिन अधिकारियों के अनुसार इस साल बढ़ती गर्मी और प्रतिकूल मौसम के कारण ‘आमों के राजा’ कहे जाने वाले अल्फांसो आम की फसल को भारी नुकसान हुआ है.
अल्फांसो आम की पैदावार
देवगढ़ इलाके की 26 वर्षीय बागवानी विशेषज्ञ कोमल वाल्के ने ‘न्यूज एजेंसी रॉयटर्स’ से कहा कि इस साल ऑनलाइन किराना कंपनियों के ऑर्डर पूरे करने के लिए दूसरे किसानों से आम खरीदने को मजबूर हैं, क्योंकि उनके परिवार के तीन एकड़ के बाग में अल्फांसो आम की पैदावार लगभग नहीं हुई. उन्होंने कहा कि अगर समय पर ऑर्डर पूरे नहीं किए गए तो बड़े ग्राहक अगले साल वापस नहीं आएंगे. वहीं, देवगढ़ के सरकारी कृषि अधिकारी बापूसाहेब माणिकराव लांबाडे के अनुसार, दिसंबर और जनवरी में दिन और रात के तापमान में बड़े अंतर के कारण आम के पेड़ों में फूल और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हुई. इसके बाद अप्रैल और मई में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने से तैयार हो रहे फलों को भी नुकसान पहुंचा. अधिकारियों का मानना है कि इसके पीछे एल नीनो जैसी मौसमीय स्थिति भी एक बड़ी वजह हो सकती है.
- बढ़ती गर्मी और अल नीनो ने बिगाड़ा ‘आम के राजा’ का स्वाद, किसानों को भारी नुकसान
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अल्फांसो को 85 फीसदी तक नुकसान
एल नीनो एक जलवायु पैटर्न है, जो दुनिया भर के मौसम को प्रभावित करता है और कई क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी या अन्य चरम मौसम की स्थितियां पैदा कर सकता है. इसका असर एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका की फसलों पर भी पड़ने की आशंका जताई गई है. इस साल सरकारी वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया है कि देवगढ़ क्षेत्र में अल्फांसो आम की फसल को 85 से 90 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है. केवल देवगढ़ ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के अन्य आम उत्पादक इलाकों में भी मौसम की मार से आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है.
देश में आम की पैदावार और कीमत
भारत में आम का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है. रिसर्च फर्म मॉर्डर इंटेलिजेंस के अनुसार, पिछले साल देश की आम की फसल का कुल मूल्य करीब 2.3 अरब डॉलर था, जो 2031 तक बढ़कर 3.4 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. भारत में उत्पादित अधिकांश आम घरेलू बाजार में ही खप जाता है, क्योंकि गर्मियों के मौसम में इसकी मांग काफी अधिक रहती है. हालांकि, वर्ष 2025 में भारत ने लगभग 5.6 करोड़ डॉलर मूल्य के ताजे आम और 8 करोड़ डॉलर मूल्य के आम के पल्प का निर्यात भी किया था.