Saudi Arabia import ban: निपाह वायरस को लेकर सतर्कता बरतते हुए सऊदी अरब ने भारत के केरल और पश्चिम बंगाल से फल और सब्जियों के आयात पर अस्थायी रोक लगा दी है. इस फैसले ने दोनों राज्यों के किसानों और निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है. खासकर केरल के निर्यातक खुद को मुश्किल स्थिति में महसूस कर रहे हैं. उनका कहना है कि राज्य में हाल के दिनों में निपाह का कोई नया मामला सामने नहीं आया है, फिर भी अचानक यह कदम उठा लिया गया.
6 फरवरी को सऊदी अरब के दूतावास ने भारतीय अधिकारियों को एक पत्र भेजकर अनुरोध किया कि जब तक महामारी से जुड़ी स्थिति पूरी तरह स्थिर और स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक इन दो राज्यों से कृषि उत्पादों का निर्यात रोका जाए. इसके साथ ही अन्य राज्यों से भेजे जाने वाले माल की भी कड़ी जांच सुनिश्चित करने की बात कही गई.
हर खेप की सख्त जांच के निर्देश
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब ने साफ कहा है कि वहां भेजे जाने वाले हर फल और सब्जी की खेप की गहन जांच होनी चाहिए. खास तौर पर यह देखा जाए कि कहीं उन पर जानवरों के काटने के निशान, मल-मूत्र के संकेत या किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि के प्रमाण तो नहीं हैं. उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित और साफ-सुथरे दिखने चाहिए.
इन निर्देशों के बाद भारत में निर्यात से जुड़ी एजेंसियों ने निरीक्षण और दस्तावेजी प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है. कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने भी 16 फरवरी को एक परामर्श जारी कर निर्यातकों से कहा कि अगली सूचना तक केरल और पश्चिम बंगाल से सऊदी अरब को माल भेजना रोक दिया जाए.
केरल के निर्यातकों पर सीधा असर
इस फैसले का सबसे ज्यादा असर केरल पर पड़ा है. केरल एक्सपोर्टर्स फोरम ने कहा है कि अचानक लगे प्रतिबंध से कई तैयार ऑर्डर रद्द हो गए हैं. छोटे और मध्यम स्तर के निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. उनके अनुसार, कई खेप पहले से पैक होकर एयर कार्गो के लिए तैयार थीं, लेकिन अब उन्हें रोकना पड़ा है.
जानकारी के अनुसार, केरल के चार प्रमुख हवाई अड्डों से हर महीने करीब 3,500 टन फल और सब्जियां खाड़ी देशों को भेजी जाती हैं. सऊदी अरब इस बाजार का बड़ा हिस्सा है. कालीकट अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पश्चिम एशिया के लिए एक अहम निर्यात केंद्र है, जहां से बड़ी मात्रा में कृषि उत्पाद जाते हैं. प्रतिबंध के बाद यहां की गतिविधियों पर भी असर पड़ा है.
निर्यातकों का कहना है कि सप्लाई चेन बाधित हो गई है. किसानों को अब यह चिंता सता रही है कि उनकी फसल का क्या होगा. कई किसानों ने खास तौर पर निर्यात के लिए उत्पादन किया था. अब बाजार अनिश्चित हो गया है और दाम गिरने की आशंका भी है.
राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयास
इस मुद्दे को जनप्रतिनिधियों ने भी उठाया है. कुछ सांसदों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह सऊदी अरब से बातचीत कर स्थिति स्पष्ट करे. उनका कहना है कि केरल में फिलहाल स्वास्थ्य व्यवस्था नियंत्रण में है और निपाह का कोई ताजा मामला सामने नहीं आया है. ऐसे में लंबे समय तक प्रतिबंध से राज्य की छवि और किसानों की आजीविका दोनों प्रभावित होंगी. बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार कूटनीतिक स्तर पर बातचीत कर रही है ताकि जल्द से जल्द स्थिति सामान्य हो सके और व्यापार फिर से शुरू हो पाए.
किसानों की निगाहें फैसले पर
केरल और पश्चिम बंगाल के हजारों किसान खाड़ी देशों के बाजार पर निर्भर हैं. आम, केला, सब्जियां और अन्य बागवानी उत्पाद बड़ी मात्रा में निर्यात किए जाते हैं. अचानक लगी रोक ने पूरी मूल्य श्रृंखला में अस्थिरता पैदा कर दी है.
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य सुरक्षा जरूरी है, लेकिन साथ ही व्यापारिक संबंधों और किसानों के हितों का भी ध्यान रखना चाहिए. यदि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और वैज्ञानिक आधार पर हो, तो प्रतिबंध ज्यादा समय तक नहीं टिकेगा.
फिलहाल किसान और निर्यातक यही उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही स्थिति साफ होगी और उनका कारोबार फिर से पटरी पर लौटेगा.