चीनी स्टॉक में भारी गिरावट, घटकर 74.49 लाख टन रह गया भंडारण.. क्या कीमतों में होगी बढ़ोतरी?

सरकार द्वारा तय कोटे के अनुसार देश में घरेलू चीनी बिक्री  अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच 3.5 प्रतिशत घटकर 110.5 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 114.5 लाख टन थी. 

नोएडा | Updated On: 3 Feb, 2026 | 09:55 PM

Sugar Production: देश में चीनी भंडारण में गिरावट आई है. 31 जनवरी तक देश में चीनी का स्टॉक सालाना आधार पर 11 प्रतिशत घटकर 74.49 लाख टन रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 84.61 लाख टन था. यह गिरावट मौजूदा चीनी सीजन के अक्टूबर- जनवरी के दौरान उत्पादन में 17 प्रतिशत बढ़ोतरी और खपत में 4 प्रतिशत कमी के बावजूद दर्ज की गई है. उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी मिलों की नकदी स्थिति न तो चीनी से और न ही एथेनॉल से सुधरने वाली है, इसलिए उन्हें वैकल्पिक रास्तों पर विचार करना होगा.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इस साल 20 लाख टन कम गन्ना पिराई  हुई है और रिकवरी रेट 10 प्रतिशत से नीचे बना हुआ है. जनवरी में, जब पिराई चरम पर होती है, तब भी राज्य के चीनी उत्पादन में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. यानी इस सीजन यूपी से झटका लग सकता है, हालांकि यह पिछले साल महाराष्ट्र में आई स्थिति से छोटा होगा.

ओपनिंग स्टॉक 50 लाख टन से भी कम

इस सीजन की शुरुआत में ओपनिंग स्टॉक 50 लाख टन से भी कम था, जबकि 2024-25 सीजन में यह करीब 80 लाख टन था. यानी करीब 30 लाख टन का बड़ा अंतर है, जिसे पूरी तरह भरना जरूरी भी नहीं है, क्योंकि 65-70 लाख टन का ओपनिंग स्टॉक पर्याप्त माना जाता है. वहीं, सरकार ने न तो चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) बढ़ाने की उद्योग की मांग मानी है और न ही गन्ने से एथेनॉल बनाने के लिए कोई अतिरिक्त कोटा दिया है. हालांकि, 30 सितंबर तक 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी गई है, जो 2024-25 में दी गई 10 लाख टन की अनुमति से अधिक है.

चीनी की खपत में बढ़ोतरी का अनुमान

खाद्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, सरकार द्वारा तय कोटे के अनुसार देश में घरेलू चीनी बिक्री  अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच 3.5 प्रतिशत घटकर 110.5 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 114.5 लाख टन थी.  इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) द्वारा कराए गए और सितंबर 2025 में जारी भारत में चीनी खपत अध्ययन के अनुसार, 2024-25 से 2029-30 के बीच चीनी की खपत में 1.5 से 2 प्रतिशत की सालाना दर से लगातार बढ़ोतरी होने का अनुमान है. यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से एंड-यूज इंडस्ट्रीज के विस्तार से होगी.

संस्थागत खपत का दबदबा बना रहेगा

रिपोर्ट में कहा गया है कि संस्थागत खपत का दबदबा बना रहेगा, जबकि स्वास्थ्य और डायबिटीज  को लेकर बढ़ती जागरूकता के कारण रिटेल खपत लगभग स्थिर रह सकती है. संस्थागत खपत में पेय पदार्थों की मांग में सीमित बढ़त के साथ-साथ आइसक्रीम और कन्फेक्शनरी की मांग बढ़ने की संभावना है. वहीं, 2025-26 सीजन में 31 जनवरी तक देश में चीनी उत्पादन बढ़कर 193.05 लाख टन पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी अवधि में 165.3 लाख टन था. राष्ट्रीय सहकारी चीनी मिल संघ (NFCSF) के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में उत्पादन 42.3 प्रतिशत बढ़कर 78.95 लाख टन हो गया है. उत्तर प्रदेश में उत्पादन 4.6 प्रतिशत बढ़कर 55.1 लाख टन और कर्नाटक में 10.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 36.6 लाख टन दर्ज किया गया है.

 

Published: 4 Feb, 2026 | 06:45 AM

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