तेजी से महंगा हो रहा नारियल तेल, 410 रुपये लीटर पहुंची कीमत, जानिए क्या है वजह?

तेल के इतने महंगे होने से लोगों ने इसकी खपत कम करनी शुरू कर दी है. बाजार में बिक्री में करीब 10-20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. आम उपभोक्ता अब नारियल तेल की जगह सस्ते विकल्पों की तरफ बढ़ रहे हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 17 Jun, 2025 | 03:24 PM

कुछ साल पहले तक जो नारियल तेल रसोई में आम तौर पर इस्तेमाल होता था, वो अब लोगों की जेब पर भारी पड़ने लगा है. खासकर केरल जैसे राज्यों में, जहां खाना पकाने में नारियल तेल एक परंपरा है, वहां इसकी कीमतों में अचानक आई तेजी से लोग हैरान हैं. अभी हाल में नारियल तेल का रिटेल दाम 410 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है. पिछले हफ्ते के मुकाबले ये 80 रुपये तक की बढ़त है. ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर नारियल तेल इतना महंगा क्यों हो गया और इसका आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?

नारियल तेल महंगा क्यों हुआ?

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार कोचीन ऑयल मर्चेंट एसोसिएशन (COMA) के अध्यक्ष थालथ महमूद ने बताया कि इसकी मुख्य वजह कोप्रा (सूखे नारियल) की कमी है. कोप्रा की पैदावार में कमी आने से नारियल तेल की आपूर्ति घट गई है, जिससे कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. केरल की मंडियों में कोप्रा का रेट 231 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि तमिलनाडु में ये 227 रुपये प्रति किलो है. जब कच्चे माल की कीमतें बढ़ती हैं, तो जाहिर है तैयार उत्पाद यानी तेल की कीमतें भी ऊपर जाती हैं.

बढ़ती मिलावट और घटिया गुणवत्ता का डर

COMA के अध्यक्ष ने यह भी चिंता जताई कि जैसे-जैसे नारियल तेल महंगा हो रहा है, बाजार में मिलावटी और घटिया क्वालिटी वाले तेल आने लगे हैं. उन्होंने दावा किया कि कुछ व्यापारी खराब या फंगस लगे कोप्रा से तेल निकाल रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. उन्होंने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है.

खपत में गिरावट, लोग ढूंढ रहे विकल्प

तेल के इतने महंगे होने से लोगों ने इसकी खपत कम करनी शुरू कर दी है. बाजार में बिक्री में करीब 10-20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. आम उपभोक्ता अब नारियल तेल की जगह सस्ते विकल्पों की तरफ बढ़ रहे हैं, जैसे पामोलीन और सूरजमुखी तेल, जिनकी कीमतें 130 रुपये और 150 रुपये प्रति लीटर हैं.

सबसे ज्यादा असर केरल में

भारत में सिर्फ केरल ही ऐसा राज्य है जहां बड़ी संख्या में लोग खाना पकाने के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल करते हैं. वहां यह केवल एक तेल नहीं, बल्कि संस्कृति का हिस्सा है. ऐसे में इसके दाम बढ़ने से वहां के आम रसोईघरों पर सीधा असर पड़ा है. बहुत से परिवार अब नारियल तेल कम इस्तेमाल कर रहे हैं या फिर वैकल्पिक तेलों को आजमा रहे हैं.

वहीं अगर कोप्रा की पैदावार में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में नारियल तेल की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं. हालांकि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि जैसे-जैसे मॉनसून आगे बढ़ेगा और नारियल उत्पादन में सुधार होगा, बाजार थोड़ी राहत की सांस ले सकता है.

क्या मिलेगा राहत का रास्ता?

तेल व्यापारियों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार नारियल तेल और कोप्रा पर लगे आयात प्रतिबंध हटाती है, तो बाजार को राहत मिल सकती है. इसके साथ ही, कच्चे नारियल की बढ़ती कीमत (70 रुपये प्रति किलो) और अंतरराष्ट्रीय मांग में तेजी (FTA यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स के कारण) ने भी बाजार को गरमा दिया है.

आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं दाम

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो ओणम जैसे त्योहार तक नारियल तेल 500 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकता है. हालांकि, हाल ही में सरकार ने क्रूड वेजिटेबल ऑयल पर आयात शुल्क में कटौती की है, जिससे कुछ राहत की उम्मीद जरूर की जा सकती है.

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