Haryana News: कस्टम-मिल्ड राइस (CMR) की डिलीवरी की समय सीमा खत्म होने में सिर्फ कुछ हफ्ते बचे हैं, लेकिन करनाल जिला अभी पीछे चल रहा है. अब तक फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) को केवल लगभग 40 फीसदी चावल ही सप्लाई किया गया है, जबकि मई के अंत तक 90 फीसदी लक्ष्य पूरा होना चाहिए था. निर्धारित समय-सारणी के अनुसार, चावल मिल मालिकों को कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की आपूर्ति अलग-अलग चरणों में करनी होती है. इसमें दिसंबर तक 15 फीसदी, जनवरी तक 25 फीसदी, फरवरी तक 20 फीसदी, मार्च तक 15 फीसदी, मई तक 15 फीसदी और जून तक बाकी 10 फीसदी चावल देना जरूरी है.
लेकिन आपूर्ति की धीमी रफ्तार के कारण खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग ने करीब 150 चावल मिल मालिकों को नोटिस जारी किया है, जिन्होंने तय समय पर लक्ष्य पूरा नहीं किया है. कर्नाल के जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) मुकेश कुमार ने ‘द ट्रिब्यून’ कोबताया कि चावल मिल मालिकों द्वारा कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की आपूर्ति की समीक्षा की गई है. अब तक केवल लगभग 40 फीसदी चावल ही जमा किया गया है. उन्होंने कहा कि करीब 150 मिल मालिकों को नोटिस भेजा गया है और उन्हें तय समय सीमा से पहले पूरी आपूर्ति करने के निर्देश दिए गए हैं.
FCI गोदामों में पर्याप्त व्यवस्था नहीं
चावल मिल मालिकों ने देरी के लिए FCI गोदामों में पर्याप्त व्यवस्था न होने को जिम्मेदार बताया है. उनका कहना है कि अंबाला, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर जैसे दूसरे जिलों के मिल मालिकों को भी करनाल के FCI गोदामों से जोड़ा गया है, जिससे वहां जगह और माल उतारने के लिए मजदूरों की कमी हो गई है. करनाल राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन ने हाल ही में FCI के जनरल मैनेजर से मुलाकात कर गोदामों में पर्याप्त जगह और मजदूरों की व्यवस्था करने की मांग की, ताकि चावल की आपूर्ति समय पर और आसानी से हो सके.
मिल मालिकों ने चावल तैयार कर लिया
करनाल राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरभ गुप्ता ने कहा कि दूसरे जिलों के चावल मिल मालिकों को उनके अपने जिले के FCI गोदामों से जोड़ा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि करनाल के मिल मालिकों ने चावल तैयार कर लिया है और आपूर्ति के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन गोदामों में न तो पर्याप्त जगह मिल रही है और न ही माल उतारने के लिए मजदूर उपलब्ध हैं.
जुर्माने जैसी कार्रवाई हो सकती है
उन्होंने कहा कि इस समस्या को दो दिन पहले FCI के जनरल मैनेजर के सामने रखा गया था, जिस पर उन्हें आश्वासन दिया गया है कि जल्द ही समाधान के प्रयास किए जाएंगे. सौरभ गुप्ता ने कहा कि अपने ही शहर में FCI गोदाम होने के बावजूद मिल मालिक समय पर चावल की आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं. अगर तय लक्ष्य पूरे नहीं किए गए तो विभाग की ओर से ब्लैकलिस्टिंग और जुर्माने जैसी कार्रवाई हो सकती है. उन्होंने यह भी बताया कि पहले मिल मालिकों को फोर्टिफाइड राइस केर्नल्स (FRK) की कमी की समस्या का सामना करना पड़ा था, जो सरकार के चावल पोषण कार्यक्रम में इस्तेमाल होते हैं. हालांकि, 27 फरवरी को केंद्रीय मंत्रालय ने मिल मालिकों और अन्य हितधारकों की मांग के बाद इस कार्यक्रम को अस्थायी रूप से रोक दिया था.